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WHO WILL CRY WHEN YOU DIE?

Who Will Cry When You Die?

WHO WILL CRY WHEN YOU DIE?
WHO WILL CRY WHEN YOU DIE?

जीवन का उद्देश्य और ऐसी सीख जिसे आप नज़र अंदाज नहीं कर सकते

“हू विल क्राई व्हेन यू डाई” किताब साल 1999 में रिलीज हुई थी। इस किताब को पढ़कर आपको जीवन को सही ढंग से जीने का सार प्राप्त होगा। क्या आप खुद के बेस्ट वर्जन हो? इस किताब के माध्यम से आपको इस सवाल का जवाब भी मिल जाएगा। ये किताब इंसान को वो रास्ता दिखाती है कि आप जीवन के असल मायने को कैसे समझें? अपने जीवन को इतना बेहतर कैसे बनाएं कि जब आप इस दुनिया में ना रहें, तो आपके प्रिय जनों को याद बस आपकी ना आए बल्कि वो आपको इस तरह मिस करें कि उनके जीवन से कोई हिस्सा कट गया हो। कई लोगों का सवाल रहता है कि अच्छी जिन्दगी कैसे बिताई जाती है? इस किताब को पढ़ने के बाद आप उस सवाल का जवाब मिल जाएगा। साथ ही साथ ये भी पता चल जाएगा कि दूसरों की जिन्दगी में भी आप कैसे बदलाव ला सकते हैं।

लेखक

Robin Sharma

रॉबिन शर्मा नाम ही काफी है। अगर आप लेखन की बात कर रहे होंगे तो, इनका पेशा ही लेखन है। इनकी 8 किताबें पब्लिश हो चुकी हैं। बेस्ट सेलिंग नॉवेल ‘द मोंक व्हू सोल्ड हीज फरारी’ इन्होने ही लिखी है। एक लेखक होने के साथ ही साथ ये स्पीकर और मोटिवेशनल कोच भी हैं।

सेल्फ डिसीप्लीन आपकी बहुत मदद कर सकता है।

इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है कि आज का दौर, जिसे आप डिजिटल क्रान्ति के तौर पर भी जानते हैं। कहने को तो हमारे हांथो में ही पूरी दुनिया आ चुकी है। लेकिन फिर भी आज के समय में ही हम सबसे अकेले भी हैं। सब एक दूसरे से कनेक्टेड हैं लेकिन किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है। इसी के बीच हमारे सामने एक सवाल और खड़ा रहता है कि आखिर मीनिंगफुल लाइफ कैसे जियें?

इसको लेकर लेखक कहते हैं कि सेल्फ इम्प्रूवमेंट अच्छी बात है, लेकिन हमको इसका भी ख्याल रखना चाहिए कि हमारा प्रभाव हमारे चाहने वालों के ऊपर कैसा पड़ रहा है। सिर्फ और सिर्फ सेल्फ इम्प्रूवमेंट के ही बारे में सोचते रहने से कुछ नहीं होता है। आपको खुद से पहले दूसरों के बारे में भी सोचना सीखना चाहिए।

ऑथर कहना चाहते हैं कि जीवन इस तरह जीना चाहिए कि आपके जाने के बाद लोग आपको मुस्कुराते हुए याद करें। मतलब साफ़ है कि, अपने जीवन के पथ को इतना साफ़ रखिये कि आपके आस-पास का माहौल भी खुशनुमा बने रहे।

आप अगर लाइफ में कुछ छोटे-छोटे रूल्स को फॉलो करें तो ऐसी लाइफ जी सकते हैं। जिससे आपको फायदा होगा और दूसरों को भी, इसलिए इस अध्याय में लेखक आपसे सवाल करते हैं कि क्या आप ऐसी जिंदगी के लिए तैयार हैं?

उस रुल का पहला प्रिंसिपल है कि पर्सपेक्टिव को मेंटेन रखिए।

स्टीफेन हाकिंग लोगों को एक सिंपल सी स्टोरी बताते हैं कि हम जिस दुनिया में रहते हैं, ये भी ब्रह्माण्ड का बस एक छोटा सा तारा है। इस बात से वो ये समझाना चाहते हैं कि हमको हर चीज को इतना सीरियस लेने की ज़रूरत नहीं है। हमें एक पर्सपेक्टिव बनाकर रखना चाहिए।

लेखक भी इस अध्याय के माध्यम से यही कहना चाहते हैं कि हार और जीत में नज़रिए का फर्क होता है। कई बार जो आपको हार लग रही है। वो किसी के लिए जीत से भी ज्यादा हो सकती है। अंतर बस इतना है कि आपको अपने नज़रिए को थोड़ा सा शिफ्ट करना पड़ेगा।

उदाहरण के लिए आप किसी का इंतजार सीढ़ी के पास कर रहे हों, लेकिन वो आपको वहां ना मिले। क्या पता उसने सीढ़ी का रास्ता ना लेकर एलीवेटर का रास्ता ले लिया हो। जीवन में ऐसे कई पडाव आयेंगे जब आपको लगेगा कि बात नहीं बन रही है। तभी आपके करैक्टर का टेस्ट भी होता है कि आप अंदर से कितने मज़बूत हैं? उस दौर में बस आपको अपने नज़रिए को थोड़ा सा बदलना पड़ेगा। आपकी बात बन जायेगी।

दूसरा नियम है सेल्फ डिसीप्लीन, अगर आप इस नियम को भी फॉलो करते हैं तो आप अपने गोल्स तक आसानी से पहुंच जाएंगे। सेल्फ डिसीप्लीन शब्द सुनने में जितना छोटा लगता है इसके परिणाम उतने ही बड़े होते हैं। आग आप अपने एक्शन के ऊपर कंट्रोल करना सीख लिया तो समझ जाइए कि आप अपनी जिंदगी को भी खुशहाल बना लेंगे। जिंदगी में खुश रहना है तो अपने आस-पास के साथ खुद के अंदर सेल्फ डिसीप्लीन होना बहुत ज़रूरी है।

इसकी शुरुआत भी आपको अभी से कर देनी चाहिए। लिस्ट बनाइए कि ऐसी कौन सी बुदी आदतें आपने पाल रखीं हैं। जो आपके लिए और समाज के लिए ठीक नहीं है। तुरंत प्रभाव से उन आदतों को छोड़ने की शुरुआत कर दीजिये। अपने आपके ऊपर लगाम लगाइए।

नाकामी से डील करना सीखिए।

आपने अपने आस-पास ऐसे कई लोगों को देखा होगा कि जो लोग जान बूझकर गलत वादा करते हैं। मतलब साफ़ है कि, ऐसे लोगों को पता होता है कि वो अपने वादे को निभा नहीं पाएंगे लेकिन फिर भी लोग फेक प्रॉमिस करते हैं। अगर आप भी इसी कैटेगरी में आते हैं तो अपनी ये आदत छोड़ दीजिये। क्योंकि एक कहावत है कि ‘जो इंसान अपनी ज़बान का नहीं वो इंसान ही नहीं।’ इसलिए इंसान बने रहना है तो खुद से और अपने चाहने वालों से ऐसे ही वादे करिए जो आप पूरा कर सकें।

आप सोचते होंगे कि अगर गलत वादा कर भी दिया तो क्या गुनाह कर दिया? शायद, आप कोई गुनाह ना कर रहे हों लेकिन आप हमेशा के लिए सामने वाले को खो सकते हैं। सामने वाला आपके ऊपर विश्वास करता है। आपने उस विश्वास को तोड़ा है। अब इससे बड़ा क्या ही गुनाह होगा।

अगर आप प्रॉमिस तोड़ते रहेंगे तो आप कभी भी खुश नहीं रहेंगे। इसलिए आज से ही एक कोशिश करिए कि ऐसे वादे ना करें जिन वादों को आप निभा ना सकें।

अगर आपको खुश रहना है तो बस एक छोटी सी शुरुआत कीजिये, वो शुरुआत ये है कि खुद से वादा कीजिये कि आप एक सप्ताह लॉयल रहेंगे, इसके बाद आप खुद ओब्सर्व करेंगे कि आपकी जिंदगी में हैप्पीनेस एड हुई है।

आप हमेशा कोशिश करिए कि अपने शब्दों में अडिग रहें। आप जैसे-जैसे इस खूबी को अंदर लाते जाएंगे आपकी जिंदगी खुशनुमा होती जायेगी।

एक और बेसिक रुल आपको फॉलो करना पड़ेगा। वो ये है कि आपको असफलता से भी सीखना पड़ेगा। ये जितना मुश्किल सुनने में लग रहा है। ये उतना ही आसान फॉलो करने में है। अपनी जिंदगी में आप जितनी बार टूटेंगे, हर बार आपको नई सीख मिलेगी। बुरा समय इंसान को बेहतर बनाकर जाता है।

उदाहरण के लिए आपने कई बार देखा होगा कि जो लोग भयानक बीमारी से ठीक होकर आते हैं। वो अपने जीवन में औरों से ज्यादा खुश रहते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का कारण क्या है? इसके पीछे का कारण ये है कि उन्हें उनके जीवन की वैल्यू पता चल जाती है। इसलिए वो उसकी केयर करना भी सीख जाते हैं। याद रखिये, खुशी की वैल्यू दुख ही सिखाकर जाएगा।

अपने आपको खुद मोटिवेट करना कभी ना भूलें। कई बार जिंदगी बहुत व्यस्त हो जाती है। इतनी व्यस्त कि इंसान को खुद के लिए भी समय नहीं मिलता है। कभी- कभी के लिए तो ये सिचुएशन ठीक है। लेकिन आपको अगर ऐसा लगने लगा है कि काम के भार की वजह से आपको सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है। तो फिर आपने गलत ट्रेन पकड़ ली है बॉस, तुरंत अगले स्टेशन पर उतर जाइए।

उतरकर सबसे पहला काम ये करिये कि अपनी प्राथमिकता को सेट करिए। आपको पता होना चाहिए कि आपकी ज़िन्दगी में सबसे ज़रूरी क्या है? इसकी एक लिस्ट तैयार करिए।

इसको हम एक कहानी से समझने की कोशिश करते हैं। ये कहानी है एक चीन में रहने वाले आदमी की, ये तलवार बनाया करता था। इसके तलवार से चीन साम्राज्य के महाराजा काफी खुश हुए, एक दिन वो खुद उस आदमी के पास गए और पूछे कि तुम्हारी काबिलियत का राज़ क्या है? तुम्हारे जैसे ही तलवार कोई और क्यों नहीं बना पाता है? उस आदमी के जवाब ने महाराजा को सीख दे दी थी। आदमी ने जवाब दिया था कि मैं पिछले 20 सालों से सिर्फ और सिर्फ अपने कला को बेहतर करने में लगा हुआ हूँ। मेरे पास और कोई काम नहीं है। मैं जितनी देर उठा रहता हूँ। सिर्फ और सिर्फ अपना काम ही करता हूँ। यह काहानी आज भी रिलेवेंट है।

अच्छी दोस्ती या फिर रिलेशनशिप भी आपकी जिन्दगी को सही रास्ते में लाने के लिए काफी होती है। हमेशा कोशिश करिए कि आप कुछ बेहतर सीख सकें। जीवन में बेहतर सीखने की कोशिश कब आपको बेहतर इंसान बना देगी आपको पता भी नहीं चलेगा। अपने काम से जब भी आपको फुर्सत मिला करे थोड़ा समय खुद के लिए भी निकाल लिया करिए। ऐसा करने से आपके दिमाग का प्रेशर कम होगा। आपको महसूस होगा कि आपका दिमाग काफी खुश है। इस फ्री टाइम का मैनेजमेंट भी आपको आना चाहिए। कोशिश करिए की फ्री टाइम को हर हफ़्ते निकाल सकें। अगर ऐसा होता है तो आपके लॉन्ग टर्म गोल के लिए बेहतर होगा।

WHO WILL CRY WHEN YOU DIE?
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जिंदगी को एन्जॉय करना सीखिए।

अब आते हैं इस पहलु पर कि जिंदगी को प्यार कैसे करें? जिंदगी को प्यार करने के लिए सबसे पहले हमको हमारे बचपन को प्यार करना पड़ेगा। बचपन को याद करना पड़ेगा कि कैसे हम छोटी-छोटी चीजों में खुशियाँ ढूंढ लिया करते थे। क्या हम आज अपने बचपन की नकल नहीं कर सकते हैं?

हम इतने भी बड़े तो नहीं हो गये हैं कि अपने खुद के बचपन को याद ना कर सकें। तो चलिए सबसे पहले उन बोझ को खत्म करते हैं। जिनके ऊपर हम अपना समय और जिंदगी व्यर्थ कर रहे हैं। मकान का किराया, बिजली के बिल की टेंशन, पड़ोसी से लड़ाई तमाम चीजें हैं जिनके ऊपर हम अपने दिन भर की एनर्जी लगा देते हैं। रिटर्न में हमें क्या मिलता है? डिप्रेशन जैसी बीमारी। तो आज हम कुछ समय अपने बचपन को याद करते हुए बिताते हैं। सवाल कि रिटर्न में क्या मिलेगा? बता दें कि रिटर्न में जिंदगी को प्यार करने का तरीका मिलेगा। आपको पता चलेगा कि ज़िन्दगी कितनी खुबसूरत है। इस जिन्दगी को हम ऐसे भी जी सकते हैं।

अगर आप आज खुश नहीं हैं। तो सबसे पहले अपने अंदर के बच्चे को ढूंढिए वो कहां है? उसे बाहर निकालिए। ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो बस उसी बच्चे की तरह आइसक्रीम खाइए, लूडो खेलिए, कूदिये, ये सब बचकानी हरकतें आपको जिंदगी से मिलने का मौका देंगी।

आप सोचिये बचपन में आप इतना खुश क्यों रहते थे? इसके पीछे एक कारण ये भी था कि आप स्वस्थ थे। पहले रोम के लोग ये माना करते थे कि इंसान की ख़ुशी उसके बॉडी से होकर गुजरती है। क्या आज आप हेल्दी हैं? अगर नहीं, तो सबसे पहले कसरत करना शुरू करिए।

हावर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च भी बताती है कि एक्सरसाइज का इंसान की ख़ुशी से सीधा नाता होता है। जो लोग फिट होते हैं। वो लोग खुश भी होते हैं। इसलिए फिट रहिये और खुश रहिये।

आज की भागती दौड़ती दुनिया में, लोग भी गोल ओरिएंटेड हो चुके हैं। फैंसी दुनिया में लोग अपनी खुशी तलाशते हैं। फैंसी घर, महंगी गाड़ी, ब्रांडेड कपड़ों से लोगों को ख़ुशी मिलती है। क्या ये ख़ुशी अल्टीमेट गोल है? क्या ये ख़ुशी परमानेंट है? बाज़ारवाद ही क्या ख़ुशी की असली परिभाषा है?

सबसे पहले तो किसी भी ख़ुशी को हम बाज़ारवाद मानकर ना चलें। अगर किसी को मटेरियल वर्ल्ड में भी ख़ुशी मिल रही है तो ठीक है। ये सब चीज जीवन में एक प्रोसेस की तरह होती हैं। जिससे हर किसी को गुजरना ही पड़ता है। इसी प्रोसेस से गुजरकर आप मैच्यूर बनते हो। जब आपके अंदर मैच्यूरटी आती है तभी समझदारी भी आती है।

मानिए कि आप एक लीडर हो और साथ ही साथ पैरेंट्स भी होते हो इन दोनों स्किल्स में से किसने आपके जीवन को ज्यादा खुशी दी? लीडरशिप स्किल हो या फिर पैरेंटिंग स्किल, एक दिन में तो नहीं आई है ना? ये पूरी प्रोसेस के बाद आई है
अगर आप पर्सनल डेवलपमेंट की एप्रोच रखेंगे तो आप अपनी अचीवमेंट को बेहतर तरीके से एन्जॉय कर पायेंगे। इसलिए कहा जाता है कि मजा तो सफर में है। आप पूरी प्रोसेस को एन्जॉय करिए। रिजल्ट तो अपने आप अच्छा ही होगा।

अगर आपको पॉजिटिव बदलाव लाना है तो सबसे पहले अपनी खामियों का पता लगाइए।

इस अध्याय के माध्यम से लेखक अपने शुरूआती दौर का एग्जाम्पल देते हैं कि जब उन्होंने रेडियो शो में स्पीकर के तौर पर जाना शुरू किया था। कई शो करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके बोलने में कुछ तो दिक्कत है। वो थोड़ा जल्दी-जल्दी बोल जाते हैं जिससे लिसनर उनकी बातों को समझ नहीं पाते हैं। फिर उन्होने स्पीकर के तौर पर रेडियो शो में जाने की बजाए ऑनलाइन पब्लिक स्पीकिंग की क्लास लीं, इस क्लास के बाद उन्हें एक्सपीरियंस हुआ कि उनकी स्पीकिंग में काफी सुधार हुआ है।

ऑनलाइन क्लास के बाद लेखक की पब्लिक स्पीकिंग में काफी सुधार भी आया और उन्हें प्रोफेशनल सक्सेस भी मिली।
आप भी ये एप्रोच को फॉलो कर सकते हैं। सबसे पहले खुद को ओब्सर्व करिए। अपनी खामियां निकालिए। फिर उन खामियों पर काम शुरू करिए। जितनी जल्दी आप अपनी खामियों के ऊपर काम करना शुरू करेंगे। उतनी ही जल्दी आपको खुद के अंदर बदलाव भी देखने को मिलेगा। खुशी का रास्ता भी बदलाव से ही होकर गुजरता है।

समय के महत्त्व को समझिये, इमोशनल फूल मत बनिए।

आप से पूछा जाए कि एक लाइन बताइए जो आप अधिकतर लोगों के मुंह से सुनते हो? आपका जवाब आएगा कि ‘टाइम नहीं है यार’ बस यही लाइन सबके मुंह में जम सी गई है। एक दिलचस्प बात ये भी है कि जो ये लाइन बोलते हैं। वही घंटो फेसबुक भी चलाते रहते हैं।

ये साइन दिखाता है कि हमें टाइम मैनेजमेंट को लेकर बेहतर एप्रोच रखनी चाहिए।
सबसे पहली चीज आपको समझनी पड़ेगी कि समय किसी भी चीज से ज्यादा कीमती है। जितनी जल्दी आप समय की कीमत को जान लेंगे। उतनी ही जल्दी सफलता और खुशियाँ भी आपके द्वार की दहलीज में होंगी।

सोसाइटी में ज़्यादातर लोग की ये सोच होती है कि पूरी जिन्दगी पड़ी है। बहुत समय है। इतनी जल्दी क्या है? कल कर लेंगे टाइम ही टाइम है। इस बात की गांठ बांध लीजिये कि अगर आप टाइम की इज्जत नहीं करेंगे। तो टाइम भी आपकी इज्जत नहीं करेगा।

हम सभी के लिए सबसे ज़रूरी ये है कि हम अपने टाइम की वैल्यू को समझें। अपने काम की लिस्ट बनाएं। हमें पता होना चाहिए कि ज़िन्दगी में हमारी प्रायोरिटी क्या है? इसका पता चल जाए तो टाइम के अनुसार उन्हें मैनेज करें। टाइम मैनेजमेंट की स्किल हमको सीखनी ही पड़ेगी।

कुछ छोटे-छोटे बदलाव लाकर हम अपनी पूरी जिन्दगी भी बदल सकते हैं, जैसे कि सबसे पहले तो हम अपनी रूटीन में एक्सरसाइज को जोड़ें, इसके अलावा हम मेडीटेशन का भी सहारा ले सकते हैं। टाइम मैनेजमेंट से आप खुश रह सकते हैं। अगर आपने इस टाइम मैनेजमेंट में इमोशन को एड कर दिया तो आपकी ख़ुशी दो गुनी हो जायेगी।

इसलिए नेगेटिव चीजों में अपना टाइम व्यर्थ करना बंद कर दीजिये। जितना टाइम हम नेगेटिव चीजों में खर्च करते हैं। अगर उतना ही टाइम हम टाइम मैनेजमेंट में खर्च करें तो हमारी जिन्दगी की रूप रेखा ही बदल जायेगी।

नेगेटिव चीजों से मतलब है कि आपके आस-पास कोई भी आदमी जिससे आपकी ना बनती हो, उससे आप दूर ही रहें तो बेहतर है। क्योंकि आप जितना समय उसके ऊपर खर्च करेंगे बहस करने में उतने में तो आप इस समरी को सुन लेंगे। इसलिए याद रखिये कि नेगेटिविटी से टाइम मैनेजमेंट पर भी फर्क पड़ता है।

उदाहरण के लिए हम समझते है कि आपका किसी काम पर फोकस हैं। तभी आपको अचानक से याद आ जाए कोई ऐसी घटना जिससे आप कभी डिस्टर्ब हुए थे। वो घटना कोई भी हो सकती है। तो फिर उसी समय आपका फोकस काम से हट जाएगा। घंटो आपका मूड खराब हो जाएगा। नेगेटिविटी आपके टाइम मैनेजमेंट को सीधा इफ़ेक्ट करती है। इसलिए हमेशा कोशिश करिए कि पॉजिटिव लोगों के साथ रहें। जीवन में एक ऐसा पर्सपेक्टिव बनाइए जिसमे पॉजिटिव लोगों के लिए ही जगह हो।

इस बात का सार ये है कि आपको अपने इमोशन पर कंट्रोल करना सीखना पड़ेगा। अगर आप अपने इमोशन को कंट्रोल कर सकते हो, तो आप ख़ुशी पाने के लायक हो। आपको खुश होने से कौई रोक नहीं सकता है।

आज के बाद अगर कोई आपको कुछ गलत कहे तो अपने इमोशन पर कंट्रोल करना और नेगेटिविटी से तुरंत दूर चले जाना। जितनी जल्दी आप इस कला में माहिर बन जाएंगे, उतनी ही जल्दी आप दूसरों को भी पॉजिटिव रहने के तरीके से रूबरू करवाएंगे। क्योंकि ये
एक चैन है जिसे अब हमे बनाना ही पड़ेगा। समाज को इस चैन की बहुत ज्यादा ज़रूरत है। नेगेटिविटी ने अवसाद नाम की बीमारी के रूप में अपनी जगह बना ली है। लोगों की मेंटल हेल्थ की जिम्मेदारी अब खुद लोगों को लेनी पड़ेगी। इसकी शुरुआत होती है हमसे। जब हम खुश रहेंगे तो हमारे आस पास भी हम खुशी ही बाटेंगे।

नेचर के साथ कनेक्ट होने का वक्त आ गया है

ज़िन्दगी में ज़्यादातर चीजें बस एक बार ही होती हैं। हमें उस एक मौके को ही इस्तेमाल करना आना चाहिए। सोचिये, कि एक अच्छे अखबार में छपे हुए एक आर्टिकल में कितनी इनफार्मेशन रहती है। वह आर्टिकल दोबारा नहीं छपता। हमें कोशिश करना है कि हम जीवन में मिल रहे अनुभव का सही इस्तेमाल कर सकें।

आपको अपने ब्रेन को कुछ इस तरह ट्रेन करना है कि आपको मिलने वाले पहले मौके को ही आप भुना सकें। उस मौके से जितना हो सके उतना फायदा आप ले सकें।

खुश रहने का एक और तरीका है। वो ये है कि अपने आपको आप नेचर के साथ कनेक्ट करिए। इस प्रोसेस के फैन ऑथर भी हैं।

ऑथर अपने हफ्ते भर के व्यस्त स्केड्यूल के बाद समय निकालकर नेचर के पास जाते हैं। वो किसी ऐसे पार्क में समय बिताने जाते हैं। जहाँ उनको हवा की आवाज सुनाई देती है। इस तरह वो अपने दिमाग को रिलैक्स करते हैं। उस पार्क में बैठकर लेखक पेड़, पक्षियों को निहारते रहते हैं। इसी के साथ वो मेडीटेशन भी करते हैं। इस पूरी प्रोसेस से उनके हफ्ते भर की थकान मिट जाती है। साथ ही नई उर्जा का भी संचार होता है।

अगर आप भी ऐसा कुछ कर सकें तो बहुत अच्छा होगा। नेचर के पास जाने का एक और बड़ा फायदा ये है कि वहां आपकी क्रिएटिविटी में इजाफा होता है। आपको भूलना नहीं चाहिए कि न्यूटन ने ग्रेविटी का पता भी नेचर के पास बैठकर ही लगाया था। तो अगर आपकी क्रिएटिविटी में रूचि है तो आपको भी इस रास्ते पर जाना चाहिए।

अगर आपको लगता हो कि नेचर से जुड़ना अभी कठिन है तो आप एक दूसरा रास्ता भी अपना सकते हैं। वो ये है कि थोड़ी सी सी ग्रीनरी ग्र को अपने जीवन में आने दीजिये। इसके लिए आप रोजाना 15 मिनट का पार्क में वॉक भी कर सकते हैं। इससे भी आपके दिमाग को काफी सुकून मिलेगा।

अगर आप ग्रीनरी के बीच हफ्ते में 30 से 90 मिनट भी समय दे सकें तो इससे आपके जीवन में काफी अच्छे बदलाव होंगे। अगर आप ये करने में भी सक्षम नहीं है तो फिर आप पॉडकास्ट सुन सकते हैं या फिर पुराने बॉलीवुड गाने का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं। इससे भी आपके दिमाग को काफी ज्यादा शांति मिलेगी। जितना आपका दिमाग शांत रहेगा उतनी ही शांति आपके मन में रहेगी।

अगर आप अपने जीवन में बदलाव देखना चाहते हैं तो सबसे पहले सेल्फ इम्प्रूवमेंट का रास्ता अपनाइए। इस रास्ते से ही आपको ख़ुशी और सुकून का मार्ग मिलेगा। इस बात से कोई गुरेज नहीं करना चाहिए कि आप अपनी जिंदगी के कुछ घंटे खुद के ऊपर खर्च कर दें। खुद के ऊपर खर्च किया गया समय ही आपको रियल रिटर्न देकर जाएगा। ये रिटर्न किसी भी एफडी से बढ़कर होगा।

आपको ऐसे कई लोग मिलते होंगे जो हमेशा ही कम्प्लेन करते होंगे कि उनके पास वर्कआउट करने का टाइम ही नहीं रहता है। इस तरह की कम्प्लेन करने वाले लोग नेगेटिव माइंड सेट के होते हैं।

अगर ऐसी ही फितरत आपकी भी है तो आपको हम बता दें कि इस माइंड सेट से आप बाहर भी आ सकते हैं। तो अगर आपको लगता है कि आपके पास वर्कआउट के लिए समय नहीं बच रहा है तो सबसे पहले तो आप आप सुबह इस आदत से आपकी ये दिक्कत खत्म हो जाएगी। जल्दी उठने की आदत डाल लीजिये।

पहला कदम हमेशा कठिन होता है। तो इस बार भी ये सरल नहीं होने वाला है। लेकिन जब एक बार आपको बदलाव नज़र आने लगेंगे तो आपको पता चलेगा कि कम्प्लेन करना सबसे बुरी आदत होती है।

इन सबके साथ हमेशा कोशिश करिए कि आप अपनी स्किल्स पर अपना टाइम खर्च कर सकें। इससे आपकी वैल्यू बढ़ेगी। जब आपकी वैल्यू बढ़ेगी तभी आप इस विश्व के लिए कुछ करने के लायक बनोगे। हमेशा अपने से सवाल करते रहिये कि आप इस सोसाइटी को क्या दे रहे हो?

इसका एक सीधा सा एग्जाम्पल है। आप एक सर्जन को देखिए। सोसाइटी में इनकी इज्जत काफी ज्यादा होती है। इसके पीछे का कारण ये है कि इन्होने अपनी स्किल्स को बेहतर करने के लिए काफी ज्यादा समय दिया है। इन्होने अपनी वैल्यू क्रिएट की है। सोसाइटी इनके योगदान का सम्मान करती है। इसलिए सर्जन की समाज में काफी ज्यादा इज्जत होती है।

कभी भी इतनी देर नहीं हुई होती है कि आप कुछ शुरू ही ना कर पाएं। इसलिए आज से ही नई खूबियों को सीखने की शुरुआत कर दीजिये। कुछ ज्यादा नहीं कर सकते हैं तो किताब पढ़ने की ही आदत डाल लीजिए। किताब से बेहतर साथी कोई नहीं होता है।

चलिए वहां लौटते हैं जहाँ से हमने शुरू किया था। आपके इस दुनिया से जाने के बाद, आपके चाहने वाले ज़रूर रोयेंगे। क्योंकि उनको पता रहेगा कि आपने अपनी जिंदगी सही मूल्यों पर जी है। आप खुद का बेस्ट वर्जन थे, आप सबके लिए जीते थे। इसलिए आज से ही कोशिश करिए खुद का बेस्ट वर्जन बनने का, जब आप स्वयं के अंदर होंगे तभी आप खुश होंगे।

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अपने आप से सवाल करिए कि आपके जाने के बाद आपके लिए कौन रोयेगा। अगर आपको लगता है कि बस कुछ लोग हैं जो आपको मिस करेंगे। तो समझ जाइए कि अब बदलाव का समय आ गया है। खुद के अंदर ऐसा बदलाव लाइए कि लोग आपके जाने के बाद आपको याद करें, ऐसी जिंदगी जीकर जाइए कि लोग आपको याद करें।

अपने जिंदगी के सफर को नोट करते जाइए कि आप हर दिन क्या नया सीख रहे हैं। क्योंकि जो आपका मेन गोल है। वहां तक पहुँचने का एक रास्ता है सेल्फ इम्प्रूवमेंट। इसलिए खुद से एक सवाल रोज़ पूछिए कि आज कितने घंटे मैंने सेल्फ इम्प्रूवमेंट में खर्च किए? आपको अपनी ताकत और कमजोरी का पता होना चाहिए। ताकत को खुद और दूसरों को खुश करने में यूज करिए और कमजोरी को समाप्त करने की कोशिश करिए।

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