Creative Confidence

उस क्रीएटिव ताकत को बाहर निकालिए जो हम सभी के अंदर है।
क्रीएटिव कान्फिडेंस (Creative Confidence) में हम देखेंगे कि किस तरह, से हम खुद को ज्यादा क्रीएटिव बना सकते हैं। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से हर व्यक्ति के अंदर क्रीएटिविटी होती है और किस तरह से वो उसे बाहर ला सकता है और अपने काम में उसका इस्तेमाल कर के कामयाब हो सकता है।
लेखक
डेविड केली (David Kelley) अमेरिका के एक बिजनेसमैन, आन्त्रप्रीन्योर, डिजाइनर, इंजीनियर और टीचर हैं। वे स्टैंफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं और आइडियो नाम के एक डिजाइन फर्म के फाउंडर हैं। उन्हें डिजाइन के लिए बहुत से ईनाम मिल चुके हैं।
टाम केली (Tom Kelley) डेविड केली के भाई हैं और आइडियो की मार्केटिंग संभालने का काम करते हैं। उन्होंने अपने सबसे पहले प्रोजेक्ट के तौर पर स्टीव जाब्स के लिए पहला माउस बनाया था।
आप अपनी क्रीएटिविटि को किस तरह से निखार सकते हैं।
बहुत से लोगों को लगता है क्रीएटिविटी सिर्फ कुछ लोगों के पास होती है और उसका इस्तेमाल हर काम में नहीं किया जा सकता। उन्हें लगता है कि वे चाहे कितनी भी कोशिश क्यों ना कर लें, वे ज्यादा क्रीएटिव नहीं बन सकते क्योंकि यह एक पैदाइशी हुनर है। अगर आपको भी ऐसा लगता है तो आपको यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए।
यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से हम सभी के अंदर क्रीएटिविटी होती है और हम किस तरह, से उस छिपी हुई क्रीएटिविटी को बाहर निकाल सकते हैं। यह किताब हमें दुनिया को एक नई नजर से देखना सिखाती है जिससे हम अपने काम को ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकें और अपनी जिन्दगी को पहले से ज्यादा मजेदार बना सकें।
कुछ नया सोचकर कुछ नया बना पाना ही क्रीएटिविटी है।
बहुत से लोगों को लगता है कि क्रीएटिविटी सिर्फ पेंटिंग, मूर्ति या फिर आर्ट में ही उभर कर सामने आ सकती है। यह बात अधूरी है, क्योंकि क्रीएटिविटी सिर्फ इन चीजों तक सीमित नहीं है। जब भी आप कुछ नया बना कर दिखाते हैं, आप क्रीएटिविटी का इस्तेमाल करते हैं। अब चाहे वो एक साफ्टवेयर इंजीनियर हो जो एक एप्लिकेशन का बेहतर इंटरफेस बना दे, कोई शेफ हो जो एक नया खाना बना दे या फिर कोई बिजनेसमैन हो जो बिजनेस करने का एक नया तरीका बना देता। यह सभी लोग क्रीएटिव कहे जाएंगे।
हम सभी के अंदर यह क्रीएटिविटी मौजूद है। जब हम छोटे थे तो हम सभी अलग अलग तरह की बातों की कल्पना करते थे, हम अपने हाथ से पेंटिंग करते थे और लकड़ी को तलवार समझ कर खेलते थे। हमारा सामना जिस भी समस्या से होता था, हम उसका समाधान खोजने की कोशिश करते थे।
लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं, समाज हमारे दिमाग में यह बात डालने लगता है कि कल्पना की जिन्दगी में जीना अच्छी बात नहीं है, कि गलतियां बेवकूफ लोग करते हैं। यह सब बातें सुनकर हम नए काम करना छोड़ देते हैं और जो सब लोग कर रहे होते हैं, उसे ही करने लगते हैं जिससे हम कुछ सोचते नहीं हैं और अपनी क्रीएटिविटी का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
आप अपनी क्रीएटिविटी को जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, आप उतने ज्यादा क्रीएटिव होते जाएंगे। अगर आप ने काफी समय से इसका इस्तेमाल नहीं किया है, तो कुछ कोशिश करने के बाद आप फिर से इस ताकत को पहले से मजबूत बना सकते हैं।
क्रीएटिविटी का इस्तेमाल हर तरह के काम में किया जा सकता है।
बहुत से लोगों को लगता है कि क्रीएटिविटी सिर्फ पेंटिंग तक या फिर गानों तक ही सीमित है। उन्हें लगता है कि अगर वे एक वकील हैं या फिर एक आम काम करने वाले व्यक्ति हैं तो उनके काम में क्रीएटिविटी की कोई जरूरत नहीं है और इसका इस्तेमाल करने की कोशिश करने से उनका काम बिगड़ भी सकता है।
यह बात गलत है। पिछले कई सालों तक आर्टिस्ट, डिजाइनर्स, म्यूजिशीयन्स और पेंटर्स को बच्चों की तरह देखा जाता था जो कि सारा दिन अपने कमरे में बंद होकर अपने खिलौने के साथ खेलते रहते थे जबकि जो समाज के जिम्मेदार लोग थे वे बिजनेस देखते थे। यहाँ तक कि स्कूलों में भी उन बच्चों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता जो आर्ट में अच्छे होते हैं। सिर्फ उन्हें अहमियत दी जाती है जो पढ़ने में तेज होते हैं।
बहुत से लोग हैं जिनसे कहा गया था कि वे अपने सपनों को छोड़कर कुछ और काम करें, लेकिन उन लोगों ने अपने अंदर की आवाज सुनी। एक्साम्पल के लिए महेन्द्र सिंह धोनी को ले लीजिए जिनसे उनके परिवार वालों ने कहा था कि वे रेलवे में नौकरी कर लें। जरा सोचिए अगर उस समय उन्होंने उनकी बात मान ली होती तो आज वे कहाँ होते।
लेकिन अब कंपनियों में यह मानसिकता बदल रही है। वे अब अपने कर्मचारियों को पहले से ज्यादा क्रीएटिव बनाने के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं ताकि वे अलग अलग समस्याओं के बेहतर समाधान खो सकें। दुनिया भर के सीईओ मानते हैं कि उन्हें अपनी कंपनी को और आगे तक लेकर जाने के लिए इस तरह के कर्मचारियों की जरूरत होगी जो अच्छे और सस्ते समाधान खोज सकें। लेकिन इससे पहले आप अपने कर्मचारियों के अंदर क्रीएटिविटी पैदा करें, आपको खुद क्रीएटिव होना होगा।
क्रीएटिव बनने के लिए सबसे पहले अपने डर का सामना कीजिए।
बहुत से लोगों को लगता है कि वे क्रीएटिव नहीं बन सकते और यही उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है। बहुत से लोगों को लगता है कि अगर वे कुछ नया करने जाएंगे, तो वे गलती कर देंगे और इसलिए वे अपने डर को खुद को रोकने देते हैं और वो कभी नहीं करते जो वे करना चाहते हैं।
इसलिए अगर आपको क्रीएटिव बनना है तो आपको सबसे पहले यह सोचना छोड़ना होगा कि आप क्रीएटिव नहीं बन सकते। आप खुद को जितना काबिल समझते हैं, उससे ज्यादा काबिल हैं और अगर आप प्रैक्टिस करेंगे तो आप अपनी क्रीएटिविटी को निखार सकते हैं। इस तरह से सोच कर आप अपनी मानसिकता को बदल सकते हैं और खुद को और दुनिया को एक अलग नजर से देखना सीख सकते हैं।
क्रीएटिव बनने के लिए आप एक रोडमैप बना कर उसपर उन सभी कामों को लिख सकते हैं या फिर उन सभी तरीकों को लिख सकते हैं जिन्हें एक के बाद एक करने से आप क्रीएटिव बनेंगे। इस रोडमैप को कुछ इस तरह से बनाइए जिससे आप इसपर चल सकें।
इसके अलावा आप डिजाइन थिकिंग को अपना कर भी क्रीएटिव बन सकते हैं। डिजाइन थिकिंग का मतलब आप अपने आस पास के लोगों की समस्या को समझने की कोशिश करते हैं और फिर उसके हिसाब से एक प्रोडक्ट डिजाइन कर के उस समस्या को सुलझाने की कोशिश करते हैं।
एक्साम्पल के लिए अगर आप एक साफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो आप अपने यूसर्स से बात कर के उनसे यह पूछ सकते हैं कि उन्हें इस समय आपके साफ्टवेयर में क्या समस्या आ रही है। इस तरह से आप उनकी जरूरत और उनकी परेशानी को समझ कर नए समाधान निकाल सकते हैं और अपनी क्रीएटिविटी को निखार सकते हैं।
जीत और हार दो अलग रास्ते नहीं हैं बल्कि एक ही रास्ते के दो पड़ाव हैं।
जो लोग कामयाब होते हैं, वे नाकाम लोगों के मुकाबले ज्यादा बार नाकाम हुए होते हैं। क्या आपने कभी किसी नाकाम व्यक्ति को 10,000 बार कोशिश कर के हारते हुए देखा है? शायद नहीं। लेकिन थामस अल्वा एडिशन, जो कि कामयाब लोगों में गिने जाते हैं, बल्ब बनाने से पहले इतनी बार नाकाम हो चुके थे।
एक कामयाब व्यक्ति वो नाकाम व्यक्ति होता है जिसने एक बार और कोशिश करने की हिम्मत दिखाई थी। वे दूसरों के मुकाबले ज्यादा तेज नहीं होता, लेकिन वो अपने सपने को लेकर दूसरों के मुकाबले बहुत ज्यादा जिद्दी होता है।
इसलिए अगर आपको कामयाब बनना है तो आपको अपने दिमाग से यह बात निकाल देनी होगी कि हार और जीत के रास्ते अलग अलग हैं।
अगर हम थामस अल्वा एडिशन के शब्दों में कहें, तो एक हार तभी एक हार होती है जब आपको उससे कुछ सीखने को ना मिला हो। इसके अलावा कामयाब होने के लिए हारना बहुत जरूरी होता है क्योंकि इससे आप खुद को बेहतर बना पाते हैं।
मान लीजिए कि आपको एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन बनना है। लेकिन अगर हम आपको अभी गूगल का सीईओ बना दें तो आप शायद उस कंपनी को चला नहीं पाएंगे। जब आप बार बार नाकाम होते हैं, तो आपको पता लगता है कि आप ने गलती क्या की है। इसकी मदद से आप खुद को और बेहतर बनाते हैं और जब कामयाबी आपके हाथों में आती है तो आप उसे फिसलने से रोक पाते हैं।
नाकाम होना दिखाता है कि आप जिस चीज़ को पाना चाहते हैं, अभी उसके लायक नहीं हुए हैं और अगर आपको वो चीज़ मिल भी जाती है तो आप उसे ज्यादा समय तक अपने पास नहीं रख पाएंगे। इसलिए हारने पर हार मत मानिए, बल्कि खुद को सुधार कर फिर से कोशिश कीजिए।

क्रीएटिव बनने के लिए आपको बाहर जाकर नए अनुभव लेने होंगे।
आइडिया आपके पास नहीं आता बल्कि आप आइडिया के पास जाते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि अपने कमरे में बैठकर हर रोज वही एक काम करने से आप क्रीएटिव हो जाएंगे, तो आप गलत सोच रहे हैं। ज्यादा क्रीएटिव बनने के लिए आपको ज्यादा अनुभव लेने की जरूरत होगी और उसके लिए आपको बाहर निकलना होगा।
एक्साम्पल के लिए लेखक के दो स्टुडेंट्स ने यह पता लगाने की कोशिश की कि किस तरह से वे इंफैंट मार्टेलिटी रेट को कम कर सकते हैं। बहुत से बच्चे पैदा होने के एक साल के अंदर मर जाते हैं और इसे इंफैंट मार्टलिटी रेट कहा जाता है। इसे कम करने के तरीके जानने के लिए वे उन देशों में गए जहाँ पर यह समस्या सबसे ज्यादा थी।
वहाँ पर जाने के बाद उन्होंने एक बहुत सस्ता स्लीपिंग पाउस बनाया जिसके अंदर एक हीटिंग पैड था। इस पाउच में बच्चों को सुलाकर वे खराब मौसम में रहने वाले बच्चों को बचा पाए।
लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आप हर समस्या का समाधान खोजने के लिए दूसरे देश में जाएं। आपको अपने आस पास की चीज़ों को नई नजर से देखने की कोशिश करनी होगी। इसक लिए आपको खुद से वो सवाल पूछने होंगे जो क्यों से शुरू होते हैं। इस तरह से आप यह जान सकते हैं कि आपके आस पास जो कुछ भी हो रहा है वो क्यों हो रहा है। एक बार आपको उसके होने की वजह पता लग जाए, तो आप उसके लिए एक बेहतर प्रोडक्ट बना सकते हैं।
एक्साम्पल के लिए अगर आप अपने आस पास देखें कि लोग सोलर बैटरी के आने के बाद भी उसे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप खुद से सवाल पूछ सकते हैं कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। हो सकता है आपको इससे पता लगे कि उन लोगों को अभी सोलर सेल इस्तेमाल करने की आदत नहीं पड़ी है और इसलिए वे उसे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
अब आप कुछ उस तरह से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर सकते हैं जिससे लोग आपके प्रोडक्ट को देखें या फिर उनके पास आपका प्रोडक्ट खरीदने के अलावा कोई और रास्ता ना बचे ताकि उन्हें सोलर सेल इस्तेमाल करने की आदत पड़ जाए। एक बार आपको वजह पता लग जाए तो आप उसके समाधान निकाल सकते हैं।
खुद को ज्यादा क्रीएटिव बनाने के लिए दूसरे लोगों के साथ काम कीजिए।
बहुत से लोगों को लगता है कि जब वे एक कमरे में बंद होकर काम करेंगे तो वे कुछ ज्यादा क्रीएटिव बन पाएंगे। लेकिन पिछले सबक में ही हमने देखा कि किस तरह से नए आइडियाज़ को खोजने के लिए बाहर निकलना जरूरी होता है। यह सोचना गलत है कि अकेले काम करने वाले लोग ज्यादा क्रीएटिव होते हैं, बल्कि जब आप ग्रुप में काम करते हैं, तो आपके पास नए आइडियाज़ आते हैं।
इसकी एक वजह यह है कि जब हम किसी नए आइडिया पर काम करने की कोशिश करते हैं तो एक वक्त आता है जब हम बीच में आकर रुक जाते हैं और उसके आगे जाने का रास्ता हमें नहीं मिलता। एक्साम्पल के लिए अगर आप एक किताब लिख रहे हैं, तो आपके साथ यह हो सकता है कि आप आधी किताब लिखने के बाद नए आइडियाज़ ना खोज पाएं। अगर ऐसा होता है, तो समझ जाइए बाहर जाकर दूसरे लोगों से मिलने का वक्त आ गया है।
जब आप दूसरे लोगों के साथ काम कर रहे होते हैं तो वे लोग आपक तरह तरह के आइडियाज़ के बारे में बताते रहते हैं जिससे आप इस समस्या से बाहतर निकल पाते हैं।
इसके अलावा दूसरों के साथ काम करने का एक फायदा यह भी है कि आपको यह पता लगता है कि आपका आइडिया कितना अच्छा है। जब कुछ लोग साथ में काम कर रहे होते हैं तो उनके आइडियाज़ उनके दिमाग से निकल कर बाहर घूमते हैं और दूसरे लोगों तक पहुंचते हैं। इससे आप दूसरों को भी क्रीएटिव बना पाते हैं और साथ ही उनके आइडियाज़ को लेकर खुद भी क्रीएटिव बन पाते हैं।
आइडियो एक कंपनी है जहां पर लेखक काम करते हैं। वहाँ पर उन्होंने हर जगह एक ब्लैकबोर्ड लगा कर रखा है जिसपर कंपनी का कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव दिख सकता है या फिर अपने आइडिया को बाँट सकता है।
अगर आपको लगता है कि आपको अपना काम पूरा करने के लिए किसी की जरूरत है तो मदद माँगने से पीछे मत हटिए।
अगर आपको लगता है कि आपको कुछ करना चाहिए तो उसके होने का इंतजार मत कीजिए।
बहुत बार हमारे साथ होता है कि हमें पता होता है कि हमें एक काम कर देना चाहिए, लेकिन हम उसे कल के लिए टालते रहते हैं या फिर यह सोचते हैं कि कोई और व्यक्ति उसे कर देगा। बहुत बार हमें पता होता है कि उस काम को अंत में जाकर हमें ही करना होगा, लेकिन फिर भी हम उसे टालते रहते हैं। कभी कभी हम डर की वजह से उस काम को नहीं करते। वजह चाहे जो भी हो, इसका नतीजा कभी अच्छा नहीं होता है।
एक्साम्पल के लिए ब्लाकबस्टर्स को ले लीजिए जो कि नेटफ्लिक्स से पहले फिल्मों को आम लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहा था।
ब्लाकबस्टर्स यह देख रहा था कि जमाना अब इंटरनेट की तरफ जा रहा है, लेकिन वे अब भी दुकान बना कर उसमें फिल्मों की सीडी बेच रहे थे, जबकि नेटफ्लिक्स ने सब कुछ आनलिइन कर के सारे ग्राहकों को अपनी तरफ खींच लिया।
इसलिए यह मत सोचिए कि हालात अपने आप ही ठीक हो जाएंगे बल्कि उसे बदलने के लिए जरूरी कदम उठाइए। भले ही आप से गलती हो जाए और आपका कुछ नुकसान हो जाए, आपको कदम उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए। इस तरह से आपको यह अफसोस नहीं होगा कि -काश आप ने कुछ कर दिया होता। साथ ही, अगर आप कुछ गलती कर बैठते हैं तो उससे आपको और ज्यादा अनुभव मिलेगा।
एक्साम्पल के लिए एक दिन लेखक का एक साथी कीफ अपनी माँ की शिकायत कर रहा था कि उसकी माँ बूढ़ी हो गई हैं और बस पर चढ़ने के बाद उन्हें पता नहीं लगता कि कहाँ पर उतरना है। वो हमेशा गलत स्टाप पर उतर जाती हैं और फिर ठंड में खड़ी रहती हैं। लेखक ने इसका समाधान निकाला।
उन्होंने ट्रॉसिट आथोरिटी की वेबसाइट में कुछ बदलाव किए जिससे लोगों को पता लग सके कि वे इस समय कौन से स्टाप पर हैं और उनका स्टाप कितनी दूर है। यह काम करने में उन्हें सिर्फ एक दिन का समय लगा, लेकिन यह कभी नहीं हुआ होता अगर वे किसी और का इंतजार कर रहे होते तो।

खुद को खुश रखने के लिए उस काम को खोजिए जिसमें आपको अच्छे पैसे भी मिलते हों और जो आपको अच्छा भी लगता हो।
इस किताब के लेखक टॉम केली आइडियो में काम करने से पहले जिस कंपनी के लिए काम करते थे, उन्होंने उसे छोड़कर अपने भाई डेविड के साथ आइडियो में काम करने के बारे में सोचा। अपनी कंपनी छोड़ने के कुछ समय बाद उन्हें कंपनी से फोन आया कि अगर वे वापस लौट आएंगे तो उन्हें ज्यादा पैसे दिए जाएंगे। अब उनके पास दो रास्ते थे। एक जहाँ पर उन्हें अच्छे पैसे मिल रहे थे, और एक जहाँ पर वे अपना मनपसंद काम कर सकते थे। अगर आप उनकी जगह पर होते तो क्या करते?
बहुत से लोगों को दोनों ही चीजें चाहिए होती हैं, लेकिन यह कभी कभी बहुत मुश्किल हो जाता है। अक्सर जिस काम में पैसे ज्यादा होते हैं, उस काम में काम भी ज्यादा होता है। क्या हो अगर काम की वजह से आपको अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका ही ना मिले? आप उन पैसों को कमा कर करेंगे भी क्या अगर आपको उसे सुकून से खर्च करने का मौका ना मिले तो?
दूसरी तरफ अगर आप उस काम को चुनते हैं जो आपको पसंद है लेकिन उसमें पैसे कम हैं, तो आप अपने बिल भरने के पैसे कहाँ से लेकर आएंगे? आप अपने परिवार का खयाल कैसे रखेंगे और अपने भविष्य की प्लानिंग कैसे करेंगे?
इसलिए यह जरूरी है कि आप पैसा और पैशन में से सिर्फ एक के पीछे ना भागें, बल्कि दोनों में बैलेंस खोजने की कोशिश करें। लेखक ने भी इस समस्या का हल इसी तरह से निकाला। ऐसा काम खोजने में आपको शायद कुछ समय लग जाए, लेकिन आपको अपनी क्रीएटिविटी का इस्तेमाल कर के कुछ ऐसे रास्ते खोजने होंगे जिससे आप पैसे और पैशन में बैलेंस खोज सकें।
खुद को खुश रखने के लिए अपनी क्रीएटिविटी का इस्तेमाल अच्छे काम के लिए कीजिए।
ताकत तो हम सभी के पास होती है, लेकिन हम उसका इस्तेमाल किस तरह से और किस हद तक करते हैं, यह तय करता है कि हम अपनी जिन्दगी में कहाँ पर जाएंगे। इसलिए अपनी क्रीएटिविटी की ताकत का इस्तेमाल अच्छे से कीजिए।
अगर आप एक कर्मचारी हैं, तो अपनी क्रीएटिविटी का इस्तेमाल अच्छे से कर के आप अपने बॉस को खुश कर सकते हैं। इससे आप अपने साथ साथ अपनी कंपनी को ऊँचाई पर ले जा सकते हैं। साथ ही जब आप इसमें कामयाब होने लगेंगे तो आप खुद को ज्यादा खुश पाएंगे।
अपनी क्रीएटिविटी को खोजकर और उसका इस्तेमाल अच्छे काम के लिए कर कर आप अपने कैरियर को कामयाब बना सकते हैं। यह लगभग हर किसी पर लागू होता है। आप जो भी काम करते हों, उसमें क्रीएटिविटी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा अपनी खुद की जिन्दगी में भी क्रीएटिविटी का इस्तेमाल कर के आप खुश रख सकते हैं। हर दिन उसी एक काम को करना या फिर एक ही लोगों के साथ रहना कुछ उबाऊ हो सकता है। लेकिन अगर आप अपने आस पास की दुनिया से अलग नजर से देखने की कोशिश करेंगे तो आप कभी नहीं ऊबेंगे। इसके लिए आप खुद से ‘क्यों’ से शुरु होने वाले सवाल पूछ सकते हैं।
हर दिन को एक मजेदार सफर की तरह देखने की कोशिश कीजिए। आप जब भी सुबह उठते हैं तो आपको पता नहीं होता कि आपके साथ आज क्या होने वाला है। यह सोचकर खुश हो जाइए कि शायद आपको आज कुछ नया मिलेगा।
इस तरह से आप अपने नजरिए को बदल सकते हैं और खुद को आगे ले जाकर कुछ नया करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
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