Awakening Your Ikigai
आनंद और Purpose से भरी जिंदगी जीने का तरीका
क्या आपको भी ये नहीं लगता कि आप बस एक रोबोट या मशीन की तरह जिंदगी जी रहे हैं? आप सुबह उठते हैं अपने काम पर निकलते हैं, थककर घर आते हैं और फिर सो जाते हैं। ज्यादा हुआ तो छुट्टी वाले दिन थोड़ी शॉपिंग कर ली, बाहर खाना खा लिया या कहीं घूमकर आ गए। कुदरत की supreme species कहे जाने वाले इंसानों की जिंदगी का purpose क्या बस इतना ही है? आपकी जिंदगी का purpose क्या है और इसे कैसे ढूंढा जाए इसका जवाब देती है साल 2018 में आई ये किताब Awakening Your Ikigai.
लेखक
Ken Mogi, Sony Computer Science Laboratories में साइंटिस्ट और सीनियर रिसर्चर के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने साइकोलॉजी, linguistics, फिलॉस्फी, आर्ट जैसे ढेरों सब्जेक्ट्स पर 50 से ज्यादा किताबें लिखी हैं। इनमें The Way of Nagomi का नाम खास तौर पर लिया जा सकता है।
Ikigai से जिंदगी के हर अंधेरे को उजाले में बदला जा सकता है।
90 साल की उम्र के जाने माने शेफ Jiro Ono, 23 grand slam अपने नाम लिख चुकी टेनिस खिलाड़ी Serena Williams और दुनिया भर में धूम मचाने वाले हॉरर नॉवेल लिखने वाले Stephen King इन तीन लोगों में क्या कॉमन हो सकता है? ये और इनके जैसे बहुत से लोगों को अपना ikigai मिल चुका है। Ikigai जापानी भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है लाइफ का पर्पस। जापान के लोगों का मानना है कि जब आपको ये purpose मिल जाता है तब आप एक सफल और बहुत ज्यादा satisfying जिंदगी जी सकते हैं। अब अगले सवाल पर आते हैं। बताइए कि आपके और ऊपर बताए गए तीन लोगों में क्या कॉमन है? जवाब है कि इनकी तरह आपके पास भी अपना ikigai है। हममें से हर एक इंसान के पास उसका ikigai है। आपको बस इतना ही करना है कि कहीं सोए या दबे पड़े अपने ikigai को जगाया जाए और इसे बाहर लाकर अपनी जिंदगी के हर पल को purposeful बना दिया जाए। आपके मन में अब ढेरों सवाल आ रहे होंगे। तो चलिए आपके हर सवाल का जवाब शुरू करते हैं।
2014 में बराक ओबामा, टोक्यो में बैठकर प्राइम मिनिस्टर के साथ डिनर कर रहे थे। ये कोई सेवन स्टार होटल नहीं था, कोई बहुत महंगी जगह भी नहीं थी। ये Sukiyabashi Jiro नाम का एक सुशी बार था जहां मुश्किल से दस लोग बैठ सकते थे। इसके मालिक थे सुशी मास्टर Jiro Ono. Ono अपना ikigai पहचान चुके थे। इस वजह से उनके छोटे से रेस्टोरेंट में बराक ओबामा जैसे लोग आते थे। Ono को तीन Michelin stars मिल चुके थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये अवॉर्ड, होटल इंडस्ट्री में किसी ऑस्कर की जगह रखता है। लेकिन Ono का सफर अभी भी जारी रहा। आज वो लगभग 100 साल के हो रहे हैं पर अब भी वो रेस्टोरेंट संभालते हैं। उनको इतनी पहचान और सम्मान मिले या ना मिले वो अपना काम जारी रखते है क्योंकि उनके पास ikigai है। पर ये ikigai असल में है क्या? ये दो शब्दों से मिलकर बना है जहां iki का मतलब है to live और gai का मतलब है reason. यानि ikigai का मतलब है आपकी जिंदगी का purpose. वो वजह जिसके लिए आप सुबह उठते हैं। ये वो आनंद भी है जो आप अपनी जिंदगी में ढूंढ पाएंगे। Ikigai के बहुत variations हैं। यानि आप इसे रोजाना की छोटी से छोटी चीजों से लेकर बड़े से बड़े गोल में ढूंढ सकते हैं। सच तो ये है कि ikigai छोटे छोटे पलों में ही है। जैसे सुबह की ताजी हवा, सुकून से पी जाने वाली कॉफी, सूरज की किरण और खाना बनाना। इन पलों का महत्व समझना ikigai को समझने के लिए पहले कदम की तरह है। खास तौर पर उस दुनिया में जहां आपकी कीमत सफलता और रुतबे से नापी जाए।

अमेरिकन लेखक Dan Buettner ने TED talk पर ikigai को longevity से जोड़कर देखा था। उन्होंने दुनियाभर के ऐसे “blue zones” पता लगाया जहां लोग बहुत लंबी जिंदगी जीते हैं। जापान का Okinawa आइलैंड इसमें सबसे ऊपर रहा। यहां रहने वाले लोग ikigai की बुनियाद पर की जाने वाली छोटी छोटी चीजों को इसकी वजह बताते हैं। यहां 102 साल की उम्र वाले कराटे मास्टर, मार्शल आर्ट की प्रेक्टिस को अपना ikigai कहते हैं। इतनी ही उम्र का एक मछली पकड़ने वाला अपने परिवार के लिए मछली पकड़ने को अपनी ikigai कहता है और इतनी ही बुजुर्ग महिला अपनी चौथी पीढ़ी को गोद में खिलाने को ikigai मानती है। जब जिंदगी ikigai से रोशन होकर चलती है तो अच्छी और माइंडफुल आदतें खुद ब खुद आपसे जुड़ने लगती हैं। Okinawa के लोग खूब पढ़ते हैं, अच्छी तरह खाना खाते हैं, अपने शरीर और दिमाग की सेहत पर ध्यान देते हैं और अपने सोशल रिलेशन भी बनाकर रखते हैं। Tohoku University में की हुई Ōsaki स्टडी से पता चला है कि ikigai के बहुत से हेल्थ बेनेफिट हैं। ये स्टडी बड़े पैमाने पर की गई जिसमें पचास हजार से ज्यादा लोग शामिल थे। इसमें पता चला कि जिन लोगों को अपने ikigai के बारे में पता था उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ दूसरों से अच्छी थी। यानि ikigai का कितना गहरा असर हो सकता है ये साबित हो गया था। Ikigai एक ऐसा मोटिवेशन है जिसे बाहरी तौर से ज्यादा अंदरूनी तौर पर समझा जा सकता है। ये आपकी जिंदगी को पूरा करता है। ये लोगों को इस बात की हिम्मत देता है कि वो अभी इस पल में fulfillment और meaning ढूंढ पाएं। ये मानना कि परफेक्शन ही सब कुछ नहीं है और हमें बस बेहतर बनने के लिए अपना सफर जारी रखना है यही असल ikigai है।
अपने ikigai का पता लगाने के लिए छोटे कदम से शुरुआत करें
आप अपने ikigai का कैसे पता लगा सकते हैं? इसके लिए किसी ऐसी चीज का पता लगाइए जिसके ख्याल से सुबह उठते ही आपका दिन और मूड खुशनुमा हो जाए। जरूरी नहीं कि ये कोई बहुत बड़ी चीज हो। आपको रोज छोटी छोटी चीजों में pleasure और fulfillment मिल सकता है। सुबह खिड़की से उगते हुए सूरज को देखना, जागने के बाद कुछ देर स्ट्रेचिंग करना, सुकून से कॉफी का एक कप पीना ऐसी बातें भी आपके लिए ikigai की गिनती में आ सकती हैं। ये सब आपके दिन की एक अच्छी शुरूआत तो बन ही सकते हैं पर ये आपके दिमाग को पूरे दिन के लिए charge भी कर देते हैं। सुबह खुद को अपनी मनपसंद चीज का reward देने से ब्रेन में dopamine रिलीज होता है और आपका मूड भी अच्छा बना रहता है। दिन की इतनी माइंडफुल शुरुआत होती है तो आप purposeful work भी कर पाते हैं। सुबह का वक्त ब्रेन की productivity और creativity के लिए सबसे अच्छा होता है क्योंकि इस वक्त रात की नींद के बाद दिमाग तरोताजा हो जाता है। यानि इस तरह की शुरुआत आपके दिमाग को वो किक देती है जिसकी उसे जरूरत रहती है। सुबह के रूटीन की वो बातें जो आपको अच्छी ना लगती हों उनमें भी enjoyment ढूंढा जा सकता है। अगर आप कभी जापान जाएं तो मेट्रो में सफर करके देखिएगा। आपको लोगों की भीड़ ही भीड़ नजर आएगी। लेकिन आप मेट्रो के अंदर बड़ा दिलचस्प नजारा देखेंगे। कुछ लोग मिलकर shogi (जापान में खेली जाने वाली चेस) खेलते मिल जाएंगे। यानि लोगों ने लंबे सफर के दौरान बोर होने या अकेलेपन की जगह मिलजुलकर अपने सफर को सुहावना बनाने का तरीका ढूंढ निकाला है। यानि आप भी अपने असपास की हर चीज को joyful बनाकर अपना sense of ikigai जगा सकते हैं।
खुद को बेहतर बनाते रहिए
यहां Ikigai से जुड़ा जापानी भाषा का दूसरा शब्द आता है kodawari जिसे अंग्रेजी में ट्रांसलेट करना थोड़ा मुश्किल है पर समझने के लिए इसे “commitment” या “insistence” कहा जा सकता है। हालांकि इससे पूरा मतलब तो फिर भी नहीं निकाला जा सकता। इसे आप किसी के personal standard भी कह सकते हैं जिसे कोई पूरे दिल से फॉलो करता है ताकि वो खुद को और अपने काम को बेहतर बनाए रख सके। ये हमारे अंदर गहराई से बैठा हमारा attitude है और ikigai की बुनियाद। छोटी छोटी डीटेल पर ध्यान देना, अपने काम को वेल्यू देना, खुद को excel करते रहना ये सब kodawari हैं। ये बड़ी छलांग लगाने की जगह छोटे कदम लेने को सपोर्ट करता है। जापान के कल्चर में ये kodawari कितना गहरा समाया है इसका पता लगाने के लिए आपको बस Sembikiya नाम की एक फलों की दुकान तक जाना होगा। ये टोक्यो की जानी मानी दुकान है जहां फल उगाने वालों ने अपनी पूरी जिंदगी परफेक्शन के नाम लिख दी है। यहां की खासियत है muskmelon जिनका स्वाद आपको सारी जिंदगी याद रहेगा। इनको इस तरह उगाया जाता है कि एक पौधे पर एक ही फल हो ताकि फल की क्वालिटी बेहतरीन रहे। इनकी कीमत तो काफी ज्यादा होती है पर ये muskmelon किसी को तोहफे में दिए जाएं तो ये बहुत respect की बात मानी जाती है।
आपको kodawari का एक और उदाहरण जापान के ramen noodles में मिल जाएगा। ये नूडल चीन से जापान तक आए और जापान ने इसे परफेक्शन की मिसाल बना दिया। नूडल का मसाला, इसे बनाने का तरीका, इसका सूप जैसी हर चीज में इतनी वेरायटी बना दी कि आप खाते खाते थक जाएंगे। जापान के लोग दिन भर इस पर बात कर सकते हैं कि किसे इस नूडल की कौन सी वेरायटी पसंद है। इस पर Tampopo नाम की एक कॉमेडी फिल्म भी बनी है जिसमें डायरेक्टर
Juzo Itami ने ramen के परफेक्शन को लेकर दीवानगी को बड़े मजेदार ढंग से दिखाया है। इसमें आप kodawari की गहराई देख सकते हैं। Kodawari आपकी लगातार कुछ बेहतर करने की चाहत है इसलिए यहां “good enough” जैसा कुछ नहीं होता। जबकि इसका दूसरा पहलू ये है कि जब आप kodawari वाले एटीट्यूड के साथ चलेंगे तो आपके ऊपर तारीफ या बुराई किसी बात का कोई असर नहीं होगा। यानि Kodawari पर बाहरी बातों या हालात का कोई फर्क नहीं पड़ता। इसे आप automatic और autocratic मान सकते हैं। साइकोलॉजिस्ट Mihaly Csikszentmihalyi ने इसे फ्लो की तरह बताते हुए कहा है कि किसी काम या एक्टिविटी में इतना मगन हो जाना कि आपके लिए उससे मिलने वाले rewards या recognition का भी कोई मतलब ना रहे। जब आप इस फ्लो में पहुंच जाते हैं तब आप अपनी क्रिएटिविटी, इनोवेशन और परफार्मेंस के पीक पर होते हैं। आपको ये काम अंदरूनी खुशी देता है। आपका काम ही आपका reward बन जाता है।

Ikigai हार और जीत के परे है
एनिमेशन फिल्मों के दीवानों के लिए Hayao Miyazaki एक बहुत जाना पहचाना नाम है। उनका बनाया हुआ एनिमेशन स्टूडियो है जिसे Studio Ghibli कहा जाता है। इस स्टूडियो और उनकी फिल्मों जैसे My Neighbor Totoro और Spirited Away ने दुनियाभर में धूम मचा रखी है। उनके पास भी ikigai है। वो अपनी फिल्मों की बारीक से बारीक डीटेल पर ध्यान देते हैं। उन्होंने ना जाने कितनी बार खुद को रिटायर करने का सोचा पर अब भी उनका काम पहले की तरह जारी है। लेकिन इस स्टूडियो में ikigai वाले वो अकेले इंसान नहीं हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि
Ghibli के हर एनिमेटर के पास उसका ikigai है। जापान की एनिमेशन फिल्मों को सारी दुनिया पसंद करती है। फिर भी जापान का हर इंसान ये जानता है कि किसी एनिमेशन स्टूडियो में काम करना बहुत मेहनत मांगता है। दूसरी किसी भी जॉब से ज्यादा काम और कम सैलरी। इसके बावजूद Ghibli और इसके जैसे बाकी एनिमेशन स्टूडियो में नौकरी के लिए लोगों की लाइन तैयार रहती है। क्योंकि इन लोगों को पैसे की परवाह नहीं है। ये अपने आर्ट के लिए जीना चाहते हैं। यानि जब आप अपने ikigai को जगाकर उसे फॉलो करने लगते हैं तो आप अपनी जिंदगी को नए मायने दे देते हैं। आपको सफलता मिले या ना मिले ikigai को बने रहने के लिए अब ऐसे किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती।
किसी बैले कंपनी में ढेरों लोग काम करते हैं पर सारा नाम और शोहरत उनके मेन डांसर को ही मिलता है। जबकि हर डांसर उतनी ही मेहनत करता है। इनके बिना कोई शो ना तो पूरा हो सकता है और ना सफल। पर इसके बदले उनको कुछ खास नहीं मिल पाता। दस साल तक Vienna State Ballet में artistic director के तौर पर काम करने वाले Manuel Legris के हिसाब से ये उनका ikigai है। कोई उनको पहचाने या ना पहचाने उनके लिए बस अपना काम ही सब कुछ होता है और बस इस ikigai की वजह से वो हमेशा purposeful और fulfillment में बने रहते हैं। उनको काम करने की ताकत भी मिलती रहती है। यानि आप सफलता के शिखर पर ना भी हों पर ikigai की वजह से आप जीने की वजह भी बनाए रख सकते हैं और खुशी भी। Ikigai सिर्फ जीतने वालों के लिए नहीं है। ये सिर्फ टॉप पर पहुंचे लोगों के लिए हो ऐसा भी नहीं है। इसे हर पोजीशन और स्टेटस का इंसान पा सकता है। ये आपके हर पल में है। ये हर माहौल में ढल सकता है और आम सोच के उलट जीत और हार से परे है। क्योंकि इससे आपको जीने का मकसद मिलता है।
Ikigai पाने के लिए अपने joy को फॉलो कीजिए
आपने जापान के जाने माने लेखक Haruki Murakami का नाम सुना होगा। उनके नॉवेल 50 से ज्यादा भाषाओं में ट्रांसलेट किए गए हैं। उनके नॉवेल्स की लाखों कॉपीज बिकी हैं। एक लेखक के तौर पर वो बहुत डिसिप्लिन वाले इंसान हैं। वो सुबह चार बजे उठकर अपना काम शुरू कर देते हैं। वो jazz के भी माहिर हैं। एक समय वो jazz bar भी चलाया करते थे। जरूरी नहीं कि आप जो काम सबसे अच्छा करते हैं या जिसमें सबसे सफल हैं वही आपके लिए ikigai हो। ये आपकी जॉब के अलावा भी कोई एक्टिविटी हो सकती है जिससे आपको भरपूर खुशी मिलती हो। आप पर्सनल और प्रोफेशनल बातों को मिलाकर भी ikigai बना सकते हैं। जैसे Murakami, jazz से लगाव रखने वाले लेखक हैं। जापान में एक और शब्द है datsusara जिसे तब इस्तेमाल किया जाता है जब ऑफिसों में काम करने वाले लोग अपनी बनी बनाई सैलरी और लाइफस्टाइल को छोड़कर अपने पैशन की राह पकड़ लेते हैं। यहां datsu का मतलब है “to exit” और “salaryman” को छोटा करके sara बनाया गया है। इस शब्द का मतलब है ऑफिस की बंधी हुई जिंदगी से आजादी। आपको datsusara और ikigai के बीच काफी समानता मिलेगी। ये समानता ऐसी है कि आप अपने रूटीन से हटकर की जाने वाली चीजों से बाहर भी जीने की वजह तलाश सकते हैं। ये आपको सूमो फाइटिंग में भी मिलेगी, karaoke और मछली पकड़ने में भी मिलेगी जहां आप करियर से अलग हटकर भी जिंदगी में कुछ कर सकते हैं। भले ही जापान में work ethic बहुत मजबूत हों पर यहां अपनी हॉबी और पैशन को भी बहुत महत्व दिया जाता है। चाहे आपका प्रोफेशन जो भी हो अपनी हॉबी को फॉलो करना अपने joy को फॉलो करना है। किसी चीज को शुरुआत से अंत तक पूरा करना, इन दोनों कदमों पर आपको खुशी मिलना और नतीजे में भरपूर accomplishment का एहसास बहुत बड़ा होता है
मजे की बात ये है कि रिसर्च और स्टडीज भी आम सोच में खुशी की मिसाल बनी बातों को सवालों के घेरे में लाकर रख देती है। पैसे इकट्ठा करना, शादी, समाज में रुतबा होना, पढ़ाई में अव्वल होना ये सब खुशी की गारंटी नहीं है। लोग इन ऊपरी बातों या materialistic चीजों को खुशी मानने की गलतफहमी में रहते हैं। रिसर्च के हिसाब से self-acceptance ही खुशी की चाबी है। यानि बने बनाए स्टैंडर्ड को छोड़कर और अपनी individuality पर ध्यान देकर लोग खुशी और
contentment पा सकते हैं। दो फूल कभी एक से नहीं होते। इसी बात पर जापान में कहा जाता है junin toiro यानि दस लोगों के दस रंग होते हैं। ये बात लोगों की personality, sensitivity और values में मिलने वाले बड़े variations को बताती है। अपने ikigai को फॉलो करने से आप खुद की तरफ सच्चे और authentic बने रहते हैं और अपनी uniqueness भी बनाए रख सकते हैं। आपको बस वो चीज पहचाननी है जो आपको joy से भर दे। ये काम के बाद घर लौटकर गाने सुनना भी हो सकता है, pottery भी और बागवानी भी। इसका मतलब ये भी हो सकता है कि आप नौकरी छोड़कर म्यूजिक सिखाने लगें। ऐसा करके आप अपनी जिंदगी में ikigai लाने का रास्ता खोल सकते हैं।