Atomic Habits

नई आदतों को अपना कर पुरानी आदतों को छोड़ने का आसान तरीका।
एटोमिक हैबिट्स (Atomic Habits) में हम आदतों के बारे में जानेंगे कि आखिर किस तरह से हमारी आदतें बनती हैं, क्यों हम उन्हें अनजाने में बार बार दोहराते हैं और क्यों उन्हें छोड़ना इतना मुश्किल होता है। यह किताब हमें अच्छी आदतों को अपनाने और बुरी आदतों को छोड़ने के तरीके बताती है।
लेखक James Clear
जेम्स क्लीयर (James Clear) एक आन्त्रप्रीन्योर हैं जो आदतों और साइकोलाजी के बारे में लिखना पसंद करते हैं। वे एक फोटोग्राफर भी हैं।
वे जो अपनी बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को अपनाना चाहते हैं।
सुबह उठकर ब्रश करना, नहाना, हर रोज उसी रास्ते से काम पर जाना, लौटते वक्त हमेशा उस एक होटल में खाना खाना, हमेशा उस एक बगीचे में घूमने जाना, अपना मोबाइल इस्तेमाल करना और ना जाने कितने ऐसे काम हैं जो हम अपनी जिन्दगी में बिना सोचे समझे करते हैं। हमारा दिमाग हमेशा आराम खोजता है जिससे वो आदतें बना लेता है ताकि उसे हर बार सोचना ना पड़े। लेकिन इन आदतों के नतीजे बहुत अच्छे या बहुत खराब हो सकते हैं।
यह किताब हमें उन वजहों के बारे में बताती है जिससे हम किसी भी आदत को अपनाते हैं। यह हमें बताती है कि क्यों किसी आदत को छोड़ना बहुत मुश्किल होता है और क्यों किसी अच्छी आदत को अपनाना मुश्किल होता है। साथ ही यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से हम खराब आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को आसानी से अपना सकते हैं।
-छोटे काम छोटे क्यों नहीं होते।
-आदतें किस तरह से बनती हैं।
-किसी उबाऊ काम को मजेदार किस तरह से बनाया जा सकता है।
छोटे छोटे कामों का नतीजा बहुत बड़ा हो सकता है।
जब आप हर रोज कसरत करते हैं, तो एक दिन में आप कभी सेहतमंद नहीं बनते, लेकिन एक दिन जरूर आपकी सेहत ठीक हो जाती है। वैसे ही जब आप हर रोज बाहर का खाना खाते हैं, तो आपको पता नहीं लगता कि आप मोटे हो रहे हैं, लेकिन कुछ साल के बाद जब आप अपनी पुरानी फोटो देखते हैं तो आपको पता लगता है कि हर रोज के उस खाने ने आपकी सेहत पर क्या असर डाला है।
हम हर रोज ऐसे ना जाने कितने काम करते हैं जो या तो अच्छे होते हैं या बुरे। हमें लगता है कि उस छोटे से काम का नतीजा कुछ खास नहीं होगा, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि उस छोटे काम को लगातार करते रहने से हम ना जाने कितने पीछे या आगे जा सकते हैं। एक्ज़ाम्पल के लिए अगर एक व्यक्ति इंटरनेट पर हमेशा जानकारी की चीज़ों को सर्च करे और एक व्यक्ति हमेशा मनोरंजन सर्च करे हालांकि देखने में तो लगता है कि वे दोनों इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन 10 साल के बाद उनके बीच का अंतर बहुत ज्यादा होता है।
इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आप लम्बे समय तक कामयाब और सेहतमंद रहें, तो अपने उन हर रोज़ की आदतों को पहचानने की कोशिश कीजिए। यह देखने की कोशिश कीजिए कि वो काम आपको आगे लेकर जा रहा है या पीछे। यह देखिए कि वो काम अच्छा है या बुरा। इसके बाद फैसला कीजिए कि आपको वो काम हर रोज करना चाहिए या नहीं।
एक्ज़ापल के लिए अगर आप आज कोई नया काम कर रहे हैं तो खुद से सवाल कीजिए कि अगर आप इस काम को अगले 10 साल तक लगातार करते रहें तो आपके ऊपर इसका क्या असर होगा। इस तरह से आप यह पता कर सकते हैं कि वो काम आपको करना चाहिए या नहीं। अगर आप अपनी इनकम का ज्यादातर हिस्सा अच्छे अच्छे गैजेट या सुख सुविधा खरीदने में बिताते हैं तो जाहिर सी बात है आप खुद को आराम दे रहे हैं और 10 साल के बाद भी आप उतना ही पैसा कमाएंगे जितना आज कमा रहे हैं।
लेकिन अगर आप अपनी इनकम का ज्यादातर हिस्सा खुद को पहले से ज्यादा समझदार बनाने में या फिर कहीं इंवेस्ट करने में खर्च करते हैं, तो जाहिर सी बात है कि अब से 10 साल बाद शायद आप बहुत कम काम कर के बहुत ज्यादा पैसे कमा रहे होंगे।
हम उन कामों को बार बार करते हैं जिनसे हमें कुछ इनाम मिलता है।
आप जरा सोचिए कि आप कौन से काम हर रोज करते हैं। अब यह सोचिए कि आप वो काम क्यों करते हैं और अगर आप वो काम ना करें तो आपको किस तरह से परेशानी होगी। हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है सुबह उठकर ब्रश करना। अगर आप दो दिन ब्रश ना करें तो आपको मुँह से बदबू आने लगेगी और वो आपको अच्छा नहीं लगेगा। दूसरे शब्दों में, ब्रश करने से आपको एक इनाम मिलता है, जिसे पाने के लिए आप हर दिन उस काम को दोहराते हैं।
इसे साबित करने के लिए कुछ साइकोलाजिस्ट ने एक बंदर पर एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने उस बंदर को एक पिंजरे में बंद किया और उसके सामने एक लीवर और एक कंप्यूटर रखा। उस कंप्यूटर पर जब लाल रंग की लाइनें दिखाई जाएं और उसके बाद लीवर को खींचा जाए तो बंदर को खाने के लिए फल मिलते थे। बंदर इस बात को समय के साथ समझ गया और फिर वो ध्यान लगाकर स्क्रीन की तरफ देखने लगा। जैसे ही लाल रंग की लाइनें उसे दिखती, वो लीवर खींच देता और उसे खाने के लिए फल मिल जाते। इस तरह से एक इनाम पाने के लिए वो बार बार उस काम को करने लगा।
किसी भी काम को करने के लिए हमें एक (why)क्यों की जरूरत होती है जो हमें यह बताती है कि उस काम को करने का वक्त आ गया है। एक्ज़ाम्पल के लिए कुछ लोग अपने तनाव से छुटकारा पाने के लिए शराब का सहारा लेते हैं। जब भी वे तनाव में आते हैं, तो यही उनका (why)क्यों होता है जो उन्हें बताता है कि शराब पीने का वक्त आ गया है। इसके बाद हर काम को करने के लिए हमें एक इनाम मिलता है जिसे पाने के लिए हम बार बार उस काम को करते रहते हैं। जब उस व्यक्ति को शराब पीने के बाद राहत मिल जाती है तो वो व्यक्ति फिर से तनाव में जाने के बाद शराब को याद करता है।
इस तरह से लगभग हर एक आदत इसी पैटर्न को अपनाती है। कुछ खराब आदतें भी हैं जिन्हें अपनाने से हमें कुछ वक्त के लिए आराम या मजा मिलता है, लेकिन लम्बे समय में वे हमारे लिए नुकसानदायक हैं। लेकिन फिर भी हम उन कामों से मिलने वाले इनाम को पाने के लिए उन कामों को करते रहते हैं। हम खुद को ऐसा करने से रोक नहीं पाते। आने वाले सबक में हम इसके हल के बारे में जानेंगे।
नई आदतों को बनाने के लिए आपको अपने माहौल को बदलना होगा।
अब जब आप जान गए हैं कि हमारी आदतें किस तरह से बनती हैं तो आइए उसका इस्तेमाल कर के यह जानने की कोशिश करें कि किस तरह से आप नई आदतों को आसानी से अपना सकते हैं। कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो हमें एक खास काम करने के लिए उकसाती हैं। एक्साम्पल के लिए अगर आप कभी एक रेस्टोरेंट के सामने से गुजरते हैं और वहाँ से खाने की खुशबू आती है तो आप वहां पर खाने के लिए चले जाते हैं। उस खुशबू ने आपको ऐसा करने के लिए उकसाया।
इसका मतलब यह कि अगर आप किसी नए काम को अपनी आदत बनाना चाहते हैं तो उन चीज़ों को हमेशा अपने पास रखिए जो आपको वो काम करने के लिए उकसाएँ। अगर आप हर रोज सुबह कसरत करने की आदत डालना चाहते हैं तो अपने कमरे में सेहत से संबंधित फोटो लगा दीजिए ताकि हर रोज सुबह उठते ही आप अपनी सेहत बनाने के लिए कसरत करें।
अगर आप चाहते हैं कि आप अच्छा और सेहतमंद खाना खाएँ तो अपने फ्रिज में हमेशा सेहतमंद खाना रखिए। हो सके तो सेहतमंद लोगों के साथ रहना शुरू कीजिए ताकि उनकी सेहत देखकर आपका मन करे कि आप भी उनकी तरह सेहत बनाएँ और इस तरह से आप हमेशा अच्छा खाना खाएंगे।
इसके अलावा एक तरीका यह है कि आप उस नए काम को अपनाने की अच्छी प्लानिंग करें। एक्ज़ाम्पल के लिए आप खुद से सिर्फ यह मत कहिए कि आप अब से अपनी सेहत का खयाल रखेंगे। बल्कि आप ऐसा करने के लिए एक अच्छा प्लान बनाइए। आप यह तय कीजिए कि आप रोज सुबह उठ कर क्या करेंगे, कौन सा खाना खाएंगे, अगर कभी आपको पिज्जा खाने का मन करे तो आप खुद को कैसे रोकेंगे, किस तरह के लोगों के साथ रहेंगे, अपने फ्रिज में कौन कौन से खाने को रखेंगे। इस तरह से आप पूरे तैयार हैं और अब इस बात की संभावना बढ़ गई है कि आप वाकई उस काम को करेंगे।
एक नई आदत को अपनाने के लिए खुद को एक इनाम दीजिए।
जैसा कि हम ने पहले ही कहा कि हर काम को करने से आपको एक इनाम मिलता है। इसका इस्तेमाल कर के आप अपने अंदर बहुत सी आदतों को बना सकते हैं। लेकिन अगर आपको सेहत बनानी है तो आपको सेहतमंद खाना खाना होगा, लेकिन सेहतमंद खाना खाने से आपको मजा नहीं आता। तो किस तरह से आप इस आदत को अपना सकते हैं?
इसका आसान सा तरीका यह है कि उस काम को किसी ऐसे काम से जोड़ दीजिए जिसे करने में आपको मजा आता हो। एक्ज़ाम्पल के लिए अगर आपको कहानियों का शौक है तो खुद से कहिए कि अगर इस हफ्ते आप हर दिन सेहतमंद खाना खाएंगे, तो आप संडे के दिन एक कहानी पढ़ सकते हैं। ठीक वैसे ही, अगर आपको अपना काम समय के अंदर पूरा करना है तो आप खुद से कहिए कि अगर आप ने ऐसा कर लिया, तो आप संडे को मूवी देख सकते हैं।
जब हम किसी काम से मिलने वाले इनाम के बारे में सोचते हैं तो हमारे दिमाग में डोपामीन नाम का एक हार्मोन निकलता है जिससे हमें अच्छा लगता है। इसलिए कुछ लोगों को दिन में ख्वाब देखने की आदत पड़ जाती है क्योंकि वे खुली आखों से सपने देखकर खुद को मर्सीडीस में घूमाते रहते हैं और इससे ही उन्हें मजा आता है। यह खूबी हम सभी में होती है और इसलिए अपनी अगली ट्रीट के बारे में सोचने से ही आपको अच्छा लगने लगेगा। लेकिन वो ट्रीट आपको तभी मिलेगी जब आप अपना काम पूरा करेंगे। इसलिए उसे पाने के लिए आपका उस काम में इंट्रेस्ट बढ़ जाएगा।
साइकोलाजिस्ट्स ने डोपामीन के महत्व को समझने के लिए चूहों पर एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने उनके दिमाग में इलेक्ट्रिक राड डाल कर उनके डोपामीन का निकलना बंद कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन चूहों ने खाना, पीना तक छोड़ दिया। उन्हें भूख तो लगती थी, लेकिन खाना खाने के बाद जो आराम मिलता है, वो नहीं मिलता था। अब क्योंकि उन्हें उस काम को करने में मजा नहीं मिल रहा है, उन्होंने वो काम करना छोड़ दिया। कुछ दिनों में प्यास के मारे उनकी मौत हो गई।
इसलिए अगर आप बोरिंग से बोरिंग काम को पूरा करने पर खुद को एक ऐसा इनाम देने का वादा करें जिसके बारे में सोचने से ही आपको अच्छा लगता हो, तो आप उस काम को आराम से पूरा कर लेगे।

हम उन चीज़ों को अपना लेते हैं जो आसान होते हैं।
हमारे दिमाग को आराम पसंद है। इसलिए वो हमेशा उन कामों को करना पसंद करता है जो आसान होते हैं। तो अगर आपको एक नई आदत बनानी है तो आपको उसे इतना आसान बनाना होगा कि आप उसे आसानी से अपना लें। ठीक इसी तरह अगर आपको एक बुरी आदत को छोड़ना है तो आपको उसे इतना मुश्किल बनाना होगा कि आप उसे छोड़ दें।
सबसे पहले बात करते हैं बुरी आदतों को छोड़ने की। इसके लिए आपको कुछ ऐसा करना होगा जिससे वो काम आपके लिए मुश्किल हो जाए। एक्ज़ाम्पल के लिए अगर आप चाहते हैं कि आप फेसबुक कम चलाएँ तो आप उसके ऐप को अपने फोन से डिलीट कर दीजिए और साथ ही जब भी आप ब्राउसर से फेसबुक इस्तेमाल करें, तो हर बार उसे साइन आउट कर दिया कीजिए। इस तरह से आपको फेसबुक चलाने के लिए बार बार गूगल पर उसे सर्च कर के बार बार लाग इन करना होगा जिससे यह काम मुश्किल हो गया। अब आप आसानी से इसे छोड़ देंगे।
ठीक इसी तरह से अगर आप सुबह उठकर जागिंग करने के लिए सोच रहे हैं तो अपने जूतों को हमेशा अपने बेड के नीचे रखिए, अपनी जागिंग ड्रेस को अपने सामने कहीं रख कर सोइए, ताकि सुबह उठकर आपको सिर्फ भागने जाना हो।
दूसरा तरीका यह है कि आप किसी आदत को अपनाने के लिए दो मिनट के नियम को अपनाइए। हमारा दिमाग छोटे कामों को करना पसंद करता है क्योंकि वो जल्दी खत्म हो जाते हैं। इसलिए आप खुद से यह मत कहिए कि आप हर हफ्ते एक किताब पढ़ेंगे, बल्कि यह कहिए कि आप सिर्फ दो मिनट तक या सिर्फ दो पेज पढ़ेंगे। इस तरह से हर रोज आप यह छोटे छोटे काम करते रहेंगे और एक समय आएगा कि आपको इसकी आदत पड़ जाएगी। इन सबके लिए सबसे पहले आपको शुरुआत करनी होगी। बिना उसके आप कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे।
अपनी अच्छी आदतों को एक बार दोहराने पर खुद को कुछ इनाम दीजिए।
पहले वक्त के लोगों को सिर्फ, खाने की, रहने की और खुद को सुरक्षित रखने की चिंता रहती थी। वे जंगलों में खाने के लिए घूमते थे और जब उन्हें खाना मिल जाता तो वे आराम से बैठ जाते थे। लेकिन आज के वक्त में हम भविष्य के बारे में सोचते हुए काम करते हैं। हालात बदल गए हैं, लेकिन हमारी मानसिकता वही है। हम लम्बे समय को देखते हुए काम ना तो चाहते हैं, लेकिन उसे कर नहीं पाते।
एक्ज़ाम्पल के लिए हम शराब पीते हैं क्योंकि उससे हमें तुरंत राहत मिलती है। लेकिन वो बीस साल के बाद कैंसर का रूप ले लेगा। हमें यह पता है, लेकिन हम फिर भी उसे पीते हैं क्योंकि हमें उससे तुरंत राहत मिलती है और यही हमारी मानसिकता है। लेकिन कसरत करने का फायदा शायद हमें 2 साल के बाद देखने को मिले। उससे हमें तुरंत फायदा नहीं मिलता, इसलिए हम वो काम नहीं करते।
इसका मतलब यह है कि अगर हम किसी तरह से अच्छी आदतों को एक बार दोहराने से खुद को किसी तरह का इनाम दे सकें तो हम उसे जल्दी ही अपना लेंगे।
एक्ज़ाम्पल के लिए एक व्यक्ति को यूरोप घूमना था और साथ ही उसे बाहर खाना खाने की आदत थी। वो अपनी इस आदत से छुटकारा पाकर घर का सेहतमंद खाना खाना चाहता था। इसलिए उसने अपने घर में ही एक अकाउंट खोला जिसका नाम उसने ट्रीप टु यूरोप रखा। जब भी वो खुद को बाहर खाना खाने से रोक लेता, तो वो उन पैसों को अपने उस अकाउंट में डाल देता। इस तरह से उसे यह देख कर खुशी मिलती थी कि उसका सपना पूरा होने वाला है और इस खुशी को पाने के लिए वो बार बार वो काम करने लगा। कुछ वक्त के बाद उसकी बाहर खाना खाने की आदत छूट गई।
खुद को एक कान्ट्रैक्ट पर रखिए और अपनी अच्छी आदतों को ना दोहराने के लिए खुद को सजा दीजिए।
बेंजामिन फ्रैंक्लिन 20 साल की उम्र से अपने साथ एक नोटबुक रखते थे जिसमें वो उन 13 गुणों को लिखते थे जिन्हें उन्हें अपनाना है। अगर वे किसी दिन अपने सारे अच्छे कामों को दोहराते थे तो उस दिन वे उन सब पर टिक कर दिया करते थे, और जिस दिन वे अपनी कुछ आदतों को किसी वजह से नहीं दोहरा पाते थे तो वे उसे क्रास कर देते थे।
इस तरह से उन्हें समय के साथ यह पता लगने लगा कि वे किस हद तक अपनी अच्छी आदतों को अपना रहे हैं जिस दिन वे अपने सारे काम करते थे, उस दिन वे सारे कामों को टिक कर दिया करते थे जिससे उन्हें एक सुकून मिलता था। उस सुकून को पाने के लिए वे हर रोज अपनी उन अच्छी आदतों को दोहराते गए और उनकी कामयाबी के बारे में हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है।
ठीक इसी तरह से आप अपने पास एक ट्रैकर रखिए जिससे आपको यह पता लग सके कि आप कौन से काम कर रहे हैं और कौन से नहीं कर रहे हैं। जब आप भी अपने सारे कामों को पूरा होता हुआ देखेंगे तो आपको सुकून मिलेगा और इस तरह से आप यह पता लगा पाएंगे कि अब से 10 साल बाद आप कामयाब होंगे या नहीं।
इसके अलावा आप खुद को हैबिट कान्ट्रैक्ट पर रखिए। आप अपने कुछ खास लोगों के साथ मिल कर एक डील साइन कीजिए। अगर किसी रोज आप अपनी अच्छी आदतों को दोहराने में नाकाम होते हैं तो खुद को सजा दीजिए। ब्रायन हैरिस नाशविले के एक आन्त्रप्रीन्योर हैं जिन्होंने फैसला किया कि वे अपना वजन कम कर रहे हैं जिसके लिए उन्होंने लिखा कि उन्हें किस तरह का खाना खाना है और कैसे कसरत करनी है। अगर वे किसी दिन वो सब काम नहीं कर पाते तो वे अपने ट्रेनर को 100 डालर और अपनी पत्नी को 500 डालर देते थे। इस तरह से वे अपने काम को ईमानदारी से करने लगे।
जब हमें लगता है कि हम अपने प्यार करने वालों के सामने शर्मिंदा हो जाएंगे, तो हम उस काम को नहीं करते हैं। जब ब्रायन को लगा कि उन्हें अपनी पत्नी और अपने ट्रेनर के सामने अपना काम पूरा ना करने के लिए शर्मिंदा होना होगा तो वे अपना काम हर रोज करने लगे। इस तरह से आप भी खुद को एक कान्ट्रैक्ट पर रख कर अच्छी आदतों को अपना सकते हैं।