
पहले से बेहतर बनने के तरीके।
द प्रोडक्टिवी प्रोजेक्ट (The Productivity Project) में हम देखेंगे कि किस तरह से हम अपने समय और अपनी एनर्जी का इस्तेमाल अच्छे से कर सकते हैं। यह किताब हमें बताती है कि ज्यादा काम करना क्यों गलत है और किस तरह से काम कर के हम ज्यादा से ज्यादा नतीजों को पा सकते हैं।
लेखक
क्रिस बेली (Chris Bailey) कैनेडा के एक लेखक हैं जो लोगों को बेहतर तरीके से काम कर पाने के तरीके बताते हैं। वे अपनी किताब हाइपरफोकस और द प्रोडक्टिवी प्रोजेक्ट के लिए जाने जाते हैं।
ज्यादा काम करना क्यों गलत है।
बहुत से लोगों के साथ यह होता है कि वे ज्यादा से ज्यादा काम करते हैं लेकिन फिर भी उन्हें कुछ खास नतीजे नहीं मिलते। कुछ लोग प्लानिंग तो करते हैं, लेकिन उस प्लान के हिसाब से काम नहीं कर पाते। जब वे अपने मनचाहे नतीजों को नहीं हासिल कर पाते तो वे और ज्यादा काम करने लगते हैं। लेकिन इससे वे समय के साथ तनाव में आ जाते हैं और फिर से अपने काम को अच्छे नहीं कर पाते।
अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं, तो यह किताब आपके लिए है। यह किताब हमें बताती है कि हम किस तरह से अपने समय और अपनी एनर्जी का इस्तेमाल अच्छे से कर सकते हैं। यह किताब हमें अपने काम को अच्छे से मैनेज करना बताती है और साथ ही काम से संबंधित कुछ वहम भी दूर करती है।
ज्यादा काम कर पाने के लिए अपनी एनर्जी और अपने समय को अच्छे से मैनेज करना सीखिए।
ज्यादा काम करने का मतलब यह नहीं है कि एक दिन में 100 अलग अलग तरह के काम करना। ज्यादा काम करने का मतलब है एक ही काम को ज्यादा से ज्यादा करना। हाँ, आप एक दिन में 100 काम तो कर सकते हैं, लेकिन इस तरह से काम कर के आप कहीं भी नहीं पहुंचेंगे।
अच्छे से काम कर पाने के लिए आपको एक साधु और एक स्टाक ट्रेडर के बीच में रहकर काम करना होगा। एक स्टाक ट्रेडर दिन भर इतना ज्यादा काम करता है कि वो खुद को एक बार के लिए रुक कर अपनी जिंदगी की दिशा पर ध्यान देने का मौका ही नहीं देता। दूसरी तरफ, एक साधु हर रोज ध्यान कर के अपनी जिन्दगी की दिशा पर इतना ज्यादा ध्यान देता है कि वो कुछ कर ही नहीं पाता। अगर आपको कामयाब बनना है, तो आपको दोनों के बीच में रहकर काम करना होगा।
अच्छे से काम करने का मतलब यह है कि यह देखना कि आप जो काम कर रहे हैं उसे कितने अच्छे से कर रहे हैं और साथ ही इस बात पर भी ध्यान देना कि वो काम आपको कहाँ पर ले जा रहा है। इसके लिए आपको अपने समय और एनर्जी पर ध्यान देना होगा।
आपके पास भले ही बहुत ज्यादा समय हो, लेकिन अगर आपके पास काम करने भर की ताकत नहीं होगी, तो आप कहीं नहीं जाएंगे। ठीक उसी तरह, भले ही आपके पास दुनिया भर की ताकत हो, अगर आप अपने समय को अच्छे से मैनेज नहीं कर पाएंगे, या अगर आपके पास समय ही नहीं रहेगा, तो भी आप कुछ नहीं कर पाएंगे।
इसके साथ ही आपको अपने काम पर ध्यान लगाना भी सीखना होगा, क्योंकि अगर आपक ध्यान हर 15 मिनट में भटक जाता है तो आप कभी अपना काम अच्छे से नहीं कर पाएंगे।
अपने काम को लेकर प्रेरित रहने के लिए आपको अपनी जिन्दगी का मकसद खोजना होगा।
जरूरी नहीं है कि जिस काम को कर के सभी लोग कामयाबी पा रहे हैं, उसे अगर आप भी करेंगे तो आप भी कामयाब हो जाएंगे। इसके लिए सबसे पहले आपको यह देखना होगा कि आप अपनी जिन्दगी से चाहते क्या हैं और उसे पाने के लिए आपको किस तरह की आदतें बनानी होंगी।
सबसे पहले आपको यह देखना होगा कि आपकी जिन्दगी का मकसद क्या है। यह मकसद आपको हमेशा सही रास्ते पर रखेगा और उन आदतों से छुटकारा पाने में आपकी मदद करेगा जो कि आपकी कामयाबी के लिए नुकसानदायक हैं। साथ ही, यह आपको रास्ते से भटकने से बचाएगा। जब तक आपको नहीं पता लगेगा कि आप जाना कहाँ चाहते हैं, तब तक आप हर तरह की किताबें पढ़कर उनके बताए गए तरीके अपनाते रहेंगे और फिर भी कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे।
अगर आपको अपनी जिन्दगी का मकसद खोजना है, या फिर यह पता करना है कि वो कौन सी चीज़ है जिसके लिए आप जीते हैं, तो खुद से यह सवाल पूछिए अगर आपको हर दिन 2 घंटे ज्यादा दे दिए जाएं, तो आप उस 2 घंटे में कौन सा काम करेंगे? इस सवाल का जवाब आपको बताएगा आपके लिए क्या करना असल में पसंद है।
अगर आपको जवाब मिलता है कि आप अपने परिवार के साथ समय बिताएंगे, तो इसका मतलब यह है कि वो आदतें या वो काम आपके लिए बिल्कुल ठीक नहीं हैं जो आपको आपके परिवार से दूर रखती हैं। इस तरह के काम कर कर आप कभी खुश नहीं रह सकेंगे।
जब आपको पता लग जाएगा कि आपके लिए क्या जरूरी है, आपको अपने आप यह पता लगने लगेगा कि आपको किस तरह के काम पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इसके बाद आप उस काम को अपनी आदत बना सकेंगे जो कि आपको कामयाबी की तरफ लेकर जाएगी।
रूल आफ 3 को अपना कर अपने समय और काम को अच्छे से मैनेज करना सीखें।
बहुत बार ऐसा होता है कि हम सुबह सुबह अपने दिन भर के काम को अपने दिमाग में लेकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं, लेकिन शाम तक हमारा ध्यान भटक जाता है और हम उस में से एक भी पूरा नहीं कर पाते। लेकिन रूल आफ 3 का इस्तेमाल कर कर आप अपने समय और अपने काम को अच्छे से मैनेज करना सीख सकते हैं।
इस नियम की खोज माइक्रोसाफ्ट एक्सेक्यूटिव जेडी मीयर ने की थी। उन्होंने अपनी किताब गेटिंग रिसल्ट द एजाइल वे में इसका जिक्र किया है। यह बहुत ही आसान तरीका है।
इसके लिए सबसे पहले आप अपने एक हफ्ते के 3 गोल तय कीजिए और यह देखिए कि उसे पाने के लिए आपको इस हफ्ते क्या काम करना है। फिर उसे हासिल करने के लिए आप हर दिन के 3 काम लिखिए जो कि आपको सोने से पहले करने हैं।
एक्ज़ाम्पल के लिए आपके इस हफ्ते के गोल हो सकते हैं
- अपने अकाउंट मैनेज करना।
- अपने प्रोजेक्ट का पहला हिस्सा पूरा करना।
- अपने परिवार के साथ हर दिन कुछ समय बिताना।
इसके बाद आप अपने अकाउंट मैनेज करने के काम को सात स्टेप्स में बाँट दीजिए और फिर एक एक स्टेप को हर दिन करते जाइए। साथ ही अपने प्रोजेक्ट के पहले हिस्से को भी 7 हिस्सों में बाँट दीजिए और फिर हर एक दिन एक एक को पूरा करते जाइए। इस तरह से हर दिन अगर आप सोने से पहले अपने उन तीन कामों को पूरा कर सकते हैं, तो आप अपने इस हफ्ते के गोल को भी पूरा कर सकते हैं। और अगर आप इस हफ्ते का गोल पूरा कर सकते हैं, तो आप अगले हफ्ते का गोल भी पूरा कर सकते हैं। इस तरह से आप अपनी सारी मंजिलों को हासिल कर सकते हैं।
इसके साथ ही अपना कैलेंडर चेक करते रहिए और अगर बीच में कुछ ऐसा काम आ जाए जिसे करना आपके इन तीन कामों से ज्यादा जरूरी हो, तो अपने प्लान में बदलाव करने से पीछे मत हटिए। साथ ही आप एक साथ बहुत ज्यादा करने की कोशिश मत कीजिए। कम समय में ज्यादा हासिल करने की कोशिश करने से आपके हाथ निराशा लगती है जो कि आगे बढ़ने का हौसला कम करती है। इसलिए छोटे छोटे कदमों से आगे बढ़िए।
अपने काम को मजेदार बनाइए ताकि आपका उसे करने में मन लगे।
बहुत से ऐसे काम होते हैं जो हम नहीं करना चाहते। वे जरूरी होते हैं, लेकिन साथ ही वे इतने ज्यादा उबाऊ होते हैं कि हम उन्हें हमेशा कल के लिए टालते रहते हैं। एक वक्त आता है जब उन्हें करने का प्रेशर हम पर बनने लगता है और फिर जल्दबाजी में उस काम को करने से वो काम बिगड़ जाता है या अच्छे से नहीं हो पाता।
इससे बचने के लिए सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि हम आज के काम को कल के लिए क्यों टालते हैं। टिमोथी पिचाइल, जो कि ओटावास कार्लेटन यूनिवर्सिटी में साइकोलाजी के प्रोफेसर हैं, बताते हैं कि अगर किसी काम में यह 6 चीजें हैं, तो हम उसे कल के टालेंगे
- उबाऊ होना
- तनाव भरा काम होना
- मुश्किल होना
- बेढंगा होना
- बिना मतलब का होना
- उसे करने के बाद किसी तरह का सुकून ना मिलना।
अगर हम किसी तरह से आपके उस काम में से इन 6 चीज़ों को निकाल दें, तो आप उस काम को कल के लिए नहीं टालेंगे। इसके लिए आप खुद को उस काम को पूरा करने के लिए कुछ ईनाम दे सकते हैं, या फिर उस काम को किसी ऐसी जगह पर बैठ कर कर सकते हैं जहां पर आपको अच्छा लगता हो।
एक्ज़ाम्पल के लिए अगर आपको एक स्प्रेडशीट फाइल पर काम करना है, तो आप अपने मनपसंद पार्क में जा कर, एक कप काफी के साथ, गाने सुनते हुए वो काम कर सकते हैं। साथ ही आप खुद के लिए एक ईनाम रख सकते हैं। जैसे कि अगर आप ने उस काम को दिए गए समय से पहले पूरा कर लिया, तो आपको वो खरीद सकते हैं जो आप खरीदना चाहते हैं।
ज्यादा काम करने से ज्यादा नतीजे मिलें यह जरूरी नहीं है।
हम सिर्फ एक हद तक ही काम कर सकते हैं। हमारा शरीर भी एक मशीन है और जब इस मशीन से हद से ज्यादा काम करता जाता है तो यह ज्यादा समय में कम काम करने लगती है। इसलिए यह जरूरी है कि आप इस बात को अच्छे से समझ लें कि ज्यादा काम करने का मतलब ज्यादा नतीजे हासिल करना कभी नहीं होता।
इस बात को साबित करने के लिए हम कुछ रीसर्च पर ध्यान देते हैं। 2012 में सारा रोबिनसन ने 150 साल के रीसर्च के डाटा को इकट्ठा कर के यह जानने की कोशिश की कि क्या वाकई ज्यादा काम करना अच्छा होता है। उन्होंने देखा कि जब हम एक हफ्ते में 60 घंटे से ज्यादा काम करने लगते हैं तो हमें एक दिए गए काम को करने में दोगुना समय लगता है। मतलब अगर एक व्यक्ति एक हफ्ते में 30 घंटे काम करता है और एक व्यक्ति 70 घंटे, तो 70 घंटे काम करने वाला अगर एक काम को 2 घंटे में पूरा कर रहा है, तो 30 घंटे काम करने वाला व्यक्ति उसे 1 घंटे में पूरा कर देगा
2015 में बाब सुलिवन ने स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी को दिखाते हुए बताया कि जब हम एक हफ्ते में 55 घंटे से ज्यादा काम करने लगते हैं तो हम कुछ खास काम नहीं कर पाते। यानी कि अगर आप 70 घंटे काम कर रहे हैं, तो आप उस 15 घंटे में कुछ ज्यादा हासिल नहीं कर पाएंगे।
लेखक ने खुद पर यह एक्सपेरिमेंट कर के देखा। उन्होंने देखा कि जब वे एक हफ्ते में 90 घंटे काम करते थे, तो वे असल में कम काम कर पाते थे। लेकिन जब वे 20 घंटे काम करते थे, तो वे उसके मुकाबले ज्यादा काम कर पाते थे। कुछ मिलाकर, अगर हम 35 से 40 घंटे काम करें, तो हम ज्यादा से ज्यादा काम कर पाएंगे। इसलिए एक हफ्ते में 50 घंटे से ज्यादा काम करने की कोशिश मत कीजिए।
अपने दिमाग में आने वाले काम को एक जगह पर लिख लीजिए।
कभी कभी हम एक काम करते रहते हैं और उसी बीच हमें एक दूसरा काम याद आ जाता है। बहुत से लोग अपने काम को छोड़कर दूसरे काम को करने के लिए चले जाते हैं, जो कि किसी तरह से ठीक नहीं है। इससे आप अपना ध्यान एक काम से हटा लेते हैं और फिर से उस काम पर अपना ध्यान लगा पाने के लिए आपको मेहनत करनी होती है।
अगर आपके दिमाग में कोई काम आता है तो आप उसे लिख लीजिए। इस तरह से आप अपने दिमाग को एक चिंता से आजाद कर देते हैं। इससे वो काम बार बार आपके दिमाग में नहीं आता और आप अपना पूरा ध्यान किसी और काम पर लगा पाते हैं। इससे आपके दिमाग को उस काम को याद नहीं रखना होता, जिससे आप उसे भूलते नहीं हैं।
तो जब भी आप अपने दिन की शुरुआत करें, अपने साथ उन कामों को लिख कर रखिए जो आपको उस दिन करना है। साथ ही अगर आपको कुछ और काम याद आता है तो उसे भी लिख लीजिए। इससे आप अपने दिमाग को खाली कर के नए आइडिया पैदा कर पाते हैं।
इसके अलावा आप उन चीज़ों की भी लिस्ट बना सकते हैं जो आपको चाहिए। एक्ज़ाम्पल के लिए आप उन किताबों की लिस्ट बना सकते हैं जो कि आप पढ़ना चाहते हैं या फिर उन चीज़ों कि जो आपको आज शाम के लिए चाहिए।
आप उन छोटे और आसान काम को अभी पूरा कर सकते हैं जो कि छोटे हैं और सिर्फ कुछ मिनट में हो जाएंगे। अगर आपको इस हफ्ते के अंदर कोई चीज़ चाहिए तो आप उसे आर्डर कर दीजिए, जो कि सिर्फ 2 मिनट का काम है। इससे आपको उसे लिखना भी नहीं होगा और साथ ही आपका एक काम भी कम हो जाएगा।
अपने समय और अपनी एनर्जी को अच्छे से मैनेज कर के ही आप अपने काम को अच्छे से कर सकते हैं। अगर आज के काम को कल के लिए टालना आपकी आदत है, तो आप अपने काम को कुछ मजेदार बनाने की कोशिश कीजिए। खुद को अपने काम पूरा करने के लिए काम दीजिए। ज्यादा काम कर के आप अपने काम करने की क्षमता कम कर देते हैं जिससे समय के साथ आप कम काम कर पाते हैं और साथ ही तनाव में आ जाते हैं।
अपने ध्यान को भटकने से रोक कर आप ज्यादा काम कर सकते हैं।
जब आप अपने एक काम में अपना पूरा ध्यान लगा चुके होते हैं और तभी आपके पास एक मैसेज का नोटिफिकेशन आ जाता है, तो आपका ध्यान आपके काम से भटक जाता है।
उस ध्यान को फिर से वापस पाने में आपका कुछ समय बरबाद हो जाता है। इसलिए कोशिश कीजिए अपने फोन
को साइलेंट मोड में रख कर काम करने की। इससे भी अच्छा यह होगा कि काम करते वक्त आप अपने फोन को खुद से दूर रखें।
