The ONE Thing

कामयाबी पाने के लिए आप सिर्फ एक चीज़ पर अपना ध्यान लगाएँ।
द वन थिंग (The One Thing) में बताया गया है कि कैसे हम अपनी मंजिल की तरफ छोटे छोटे कदम बढ़ा कर एक दिन बड़ा बन सकते हैं। यह किताब हमें अपनी मंजिल पर अपना पूरा ध्यान और पूरी मेहनत, अपने समय, एनर्जी और इच्छा शक्ति को सही तरह से इस्तेमाल करना सिखाती है। इसके साथ ही यह हमें बताती है कि कैसे हम अपनी मंजिल तक के रास्ते को आसानी से तय कर सकते हैं और इस रास्ते में हमें किन बातों का ध्यान रखना है।
• वे जो अपनी जिन्दगी में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं।
• वे जो जानना चाहते हैं कि कामयाबी तक का सफर कैसे तय करना है।
• वे जो ना कहने की ताकत के बारे में जानना चाहते हैं।
लेखक Gary Keller and Jay Papasan
गैरी केलर (Gary Keller) एक अमेरिकन इंटरप्रीन्युअर और बेस्ट सेलिंग लेखक हैं। वे केलर विलियम्स रिएल्टी इंटरनेशनल (Keller Williams Realty International) के फाउन्डर हैं जो पूरी दुनिया की सबसे बड़ी रीयल एस्टेट कंपनी है। वे इस समय उस कंपनी के बोर्ड के चेयरमैन हैं।
जे पपासन (Jay Papasan) एक अमेरिकन लेखक और बिजनेसमैन हैं। उन्होंने गैरी केलर के साथ मिलकर बहुत सी फेमस किताबें लिखी हैं। 2014 में स्वेनपोएल पावर ने उन्हें रीयल एस्टेट की दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बताया।
आप सबसे जरूरी काम को सबसे पहले कीजिए।(The ONE Thing)
आप अपने साथ हमेशा एक टु-डू लिस्ट रखिए जिसमें आप अपने दिन भर के काम को लिखिए। इससे आप अपने रोज के कामों पर एक नजर रख पाएंगे। लेकिन अपना कौन सा काम पहले और कौन सा काम बाद में करना चाहिए? आइए देखते हैं।
आप अपने काम को उनसे मिलने वाले नतीजों के आधार पर कीजिए। जैसे अगर कोई काम बड़ा है लेकिन उससे मिलने वाले नतीजे छोटे हैं तो आप उस काम को अंत में कीजिए। अगर कोई काम छोटा है और उससे मिलने वाले नतीजे बड़े हैं तो आप उसे सबसे पहले कीजिए। आप हमेशा नतीजों पर ध्यान दीजिए और उसी के हिसाब से अपने काम को कीजिए।
विल्फ्रीडो पैरेटो (Vilfredo Pareto) ने 19वीं शताब्दी में 80/20 का नीयम दिया जिसमें उन्होंने बताया कि इस दुनिया की 80% संपत्ति सिर्फ 20% लोगों के पास है। यह छोटा सा नीयम बहुत जगहों पर लागू होता है। आपकी 20% मेहनत ही आपको 80% की सफलता दिलाएगी और आप अपनी 20% कमियों को दूर कर के अपने आप को 80% सुधार सकते हैं।
जोसेफ एम जुरान (Joseph M. Juran) जब जनरल मोटर्स के लिए काम कर रहे थे तो उन्होंने देखा कि उनकी गाड़ियों में आगे वाली खराबियाँ कुछ छोटे छोटे मैनुफैक्चरिंग डिफेक्टस की वजह से आती थी।
जूरान ने देखा कि उनकी गाड़ियों में आने वाली 80% खराबियाँ सिर्फ 20% मैनुफैक्चरिंग डिफेक्टस की वजह से आती थीं। उन्होंने अपनी इस खोज को पैरेटो प्रिंसिपल कहा। इन कमियों को दूर करना ही जूरान का सबसे जरूरी काम हो गया।
इन बातों से एक बात तो साफ है कि आपके सारे काम जरूरी नहीं हैं। उनमें से कुछ काम के नतीजे बहुत बड़े होंगे जो आपको आगे लेकर जाएंगे। आप इन कामों को सबसे पहले कीजिए।
अपने बड़े से काम को छोटे छोटे कामों में बाँट दीजिए और उन छोटे कामों को कर के बड़ा बनिए।
कामयाबी की तरफ बढ़ने के लिए आपको सबसे पहले अपने आप से सवाल करना होगा जिससे आपको वहाँ तक का रास्ता मिल सके। आप सबसे पहले अपने आप से सवाल कीजिए कि वह कौन सा काम है जिसे अगर मैं पूरा कर दूँ तो बाकी के काम आसान हो जाएंगे।
इस तरह के सवालों से आप अपने काम की लिस्ट आसानी से बना सकते हैं और फिर उन कामों में से सबसे जरूरी काम को सबसे पहले कर के अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकते हैं। आइए देखें कि आपको अपने आप से किस तरह से ये सवाल पूछने चाहिए जिससे आपको आसानी से जवाब मिल सके।
सबसे पहले आप अपनी मंजिल के बारे में सोचिए। आप सोचिए कि आपको कहाँ जाना है। इससे आपको अपने रास्तों के बारे में पता चलेगा। इस सवाल से आपको यह पता लगेगा कि आपको किस तरफ अपने कदम बढ़ाने हैं।
अब आप अपनी मंजिल तक जाने वाले रास्ते के बारे में सोचिए। आप सोचिए कि आप इस समय ऐसा क्या कर सकते हैं जिससे आप अपनी मंजिल के करीब पहुंच जाएं। आप सोचिए कि वो कौन सा छोटा सा काम है जिसे कर के आप एक कदम आगे बढ़ सकते हैं।
आप इन सवालों को अपने आप से हर रोज पूछिए। इससे
आपकी आँखों के सामने आपकी मंजिल हमेशा रहेगी और आप हमेशा उसकी तरफ बढ़ने की कोशिश करते रहेंगे।
कामयाबी के लिए अनुशासन और अनुशासन के लिए आदतें बनाना बहुत जरूरी है।
जे एफ कैनेडी (J.F. Kennedy) ने एक बार अपनी सपीच में कहा था- आप अपनी आदतों से ही बनते हैं। अमीर आदतें आपको अमीर इंसान बनाएंगी और गरीब आदतें आपको गरीब इंसान बनाएंगी।
इसलिए अगर आपको कामयाबी हासिल करनी है तो आपको अच्छी आदतें बनानी होंगी।
आप अपने अनुशासन का इस्तेमाल कर के अच्छी आदतें बना सकते हैं। आदतें बनाना इतना भी मुश्किल काम नहीं है जितना आप सोचते हैं। बस आप किसी काम को रोज़ कीजिए और देखते ही देखते वो आपकी आदत बन जाएगी। यही आदत आपको एक दिन सफलता की ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
माइकल फेल्प्स (Michael Phelps) ने जब ओलम्पिक में 8 गोल्ड मेडल्स जीते तो एक रिपोर्टर ने उनसे कहा – क्या आप ये बात मानते हैं कि आज का दिन आपकी जिन्दगी का सबसे भाग्यशाली दिन है? इस पर माइकल ने कहा- आप 10 साल तक रोज एक दिन में 10 घंटे तैरने की प्रैक्टिस कीजिए, आप भी 8 मेडल्स जीत सकते हैं। इसमें भाग्य का कोई काम नहीं है।
इसी तरह एक अच्छी आदत आपको भी उन ऊँचाइयों तक ले जा सकती है जहाँ तक लोगों की नज़रें भी नहीं पहुँचती।
आदते बनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप शुरुआत करें। उन्हें बनाए रखना इतना मुश्किल नहीं होता जिनता उन्हें बनाना। एक बार आपने किसी आदत को बनाना शुरू कर दिया तो आगे चलकर वो काम आपके लिए आसान हो जाएगा और फिर आप अपना फोकस किसी दूसरी आदत को बनाने में लगाइए।
अपने अनुशासन का इस्तेमाल कर आप अच्छी आदतें बना सकते हैं जो आपको कामयाबी की तरफ ले जाएगी।

एक साथ दो काम करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।
दो नाव पर पैर रख कर एक साथ चलने से आप किसी नाव पर नहीं रह पाएंगे और पानी में डूब जाएंगे। ठीक ऐसा ही होता है जब आप किसी दो काम को एक साथ करने की कोशिश करते हैं।
बहुत लोगों का मानना है कि दो काम एक साथ करने से वो अपना समय अच्छे से इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपका ध्यान किसी काम में पहले से लगा हुआ है और आप उस काम को छोड़कर किसी दूसरे काम पर ध्यान लगाएंगे तो आपको इसकी कीमत चुकानी होगी और ये कीमत है आपकी जिन्दगी की करेंसी आपका समय।
मान लीजिए आप अपनी कंपनी के मैनेजर हैं और आप पूरे महीने का हिसाब अपने कंप्यूटर में टाइप कर रहे हैं। इसी बीच आपको याद आया कि आपको बाजार से कुछ जरूरी सामान लाना है। अब अगर आप बाजार जा कर सामान लाएंगे और फिर से अपने काम पर बैठेंगे तो आप भूल जाएंगे कि आप कहाँ थे और आपका कुछ समय वापस ध्यान लगाने में चला जाएगा।
एक स्टडी में ये पाया गया कि आम तौर पर एक कर्मचारी का ध्यान उसके काम से एक दिन में सिर्फ 11 मिनट के लिए हटाया जाता है जिसकी वजह से वो अपने दिन का एक तीहाई समय वापस ध्यान लगाने में बिता देता है।
एक साथ दो काम करना सिर्फ समय की बरबादी है। अपने समय को बचाने के लिए कुछ कामों को एक साथ कर सकते हैं। जैसे कि बस में सफर करते वक्त आप अपने दिन भर के काम की लिस्ट बना सकते हैं। आप काम से वापस घर आते वक्त अपने आगे के काम के बारे में सोच सकते हैं।
आप सबसे पहले अपने सबसे जरूरी काम को ढूंढिए और फिर उस काम को अपना पूरा ध्यान दीजिए।
अपनी इच्छा शक्ति को अच्छे से इस्तेमाल करना सीखिए।
क्या आपको लगता है कि कभी कभी आप अपना काम बहुत अच्छे से कर पाते हैं और कभी कभी आप अपने काम पर ध्यान ही नहीं दे पाते? क्या आप किसी गलत आदत को छोड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन कुछ दिन बाद आप फिर से वही काम करने लगते हैं?
इसकी वजह ये है कि आपकी इच्छा शक्ति भी कभी कभी थक जाती है जिसकी वजह से आप अपने आप को अपने काम के रास्ते में नहीं रख पाते और भटकने लगते हैं। जब आपकी इच्छा शक्ति कमज़ोर पड़ने लगती है तब आप अपनी अच्छी आदतों को बनाए रखने में परेशानी महसूस करेंगे। कमजोर इच्छा शक्ति आपको भी अंदर से कमजोर बना देती है।
दिन के किसी एक खास समय पर हमारी इच्छा शक्ति मजबूत होती है जबकि बाकी समय ये थकी हुई रहती है। ज्यादातर लोग सुबह के समय ज्यादा अच्छे से काम कर पाते हैं। अक्सर बच्चे सुबह सुबह उठकर पढ़ना पसंद करते हैं। वे शाम को अपने काम पर अच्छे से ध्यान नहीं लगा पाते।
तो इससे बचने का रास्ता क्या है? हम क्या करें जिससे हमारी इच्छा शक्ति हमेशा मजबूत रख सकें?
इसका सीधा सा जवाब है कि आप अपने जरूरी कामों को उस वक्त कीजिए जब आपकी इच्छा शक्ति मजबूत हो। आप अपनी इच्छा शक्ति को पूरी तरह से अपने जरूरी काम के लिए समर्पित कर दीजिए जिससे आपके जरूरी काम आसानी से हो सकें।
अपनी इच्छा शक्ति को उस समय के लिए बचा कर रखिए जब आपको अपनी जिन्दगी के अहम फैसले लेने हो या कोई जरूरी काम करना हो। इस तरह से आप अपने आप को कम इच्छा शक्ति से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं और अपने काम करने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
अगर आपको आगे बढ़ना है तो आपको ना कहना सीखना होगा।
आपके साथ ऐसा कभी न कभी जरूर हुआ होगा जब आप कोई जरूरी काम कर रहे हो और उसी बीच किसी ने आप से मदद मांगी हो। अक्सर लोग ऐसा हालात में ना नहीं कह पाते और ये वही लोग होते हैं जो कभी जिन्दगी में आगे नहीं बढ़ पाते। आइए देखें ऐसा क्यों होता है।
जब आप अपने जरूरी काम के बीच किसी दूसरे की मदद करने लगते हैं तब आप अपना ध्यान अपने खुद के काम से हटा देते हैं। दूसरे का काम करने में आप अपनी एनर्जी लगा देते हैं फिर आप अपने काम पर ध्यान नहीं दे पाते।
आप दूसरों की मदद करने के दूसरे तरीके भी निकाल सकते हैं। जैसे आप उन्हें छोटे में बता सकते हैं कि कैसे वे खुद उस काम को पूरा कर सकते हैं। या फिर आप उन्हें किसी ऐसे दूसरे व्यक्ति के पास भेज सकते हैं जो उसकी मदद कर सके।
आप दूसरों की मदद के लिए कुछ ऐसे भी काम पहले से कर सकते हैं जिससे उन्हें आपके पास आने की जरूरत ही ना पड़े। जैसे अगर आप कंपनी के मैनेजर हैं और कोई कर्मचारी आप से कंपनी के बारे में कुछ पूछने आता है तो आप उसे कंपनी की वेबसाइट पर जाने को कह सकते हैं जहाँ उसे सारी बातें पता चल जाएँ।
आपकी जिन्दगी में आपकी सबसे जरूरी करेंसी है आपका समय और अगर आप इसे सही जगह पर खर्च नहीं करेंगे तो आप हमेशा गरीब रहेंगे। समय के साथ ही आपकी एनर्जी भी सीमित है। इसका इस्तेमाल आप सही जगह पर कीजिए।
उस काम को ना कहने में बिल्कुल भी मत हिचकिचाइए जो आपके जरूरी काम के बीच आए। हालाँकि दूसरों की मदद करने से कभी कभी आपका भी फायदा हो सकता है लेकिन अपना काम छोड़कर दूसरों की मदद करना बिल्कुल भी सही नहीं है।
अगर आपको कहीं पहुंचना है तो सबसे पहले आपको उस ‘कहीं’ के बारे में पता होना चाहिए।
लोग अक्सर पूछते हैं – मैं ऐसा क्या करूँ जिससे मुझे मेरी मंजिल मिल जाए? इसका सीधा सा जवाब है सबसे पहले ये तय कीजिए की आपकी मंजिल क्या है। तभी आप उसे पाने के लिए अपने रास्ते बना पाएंगे।
अगर आपको पता नहीं होगा कि आपको कहाँ जाना है तो जाहिर सी बात है आप रास्ते में यूँ ही भटकते रहेंगे। आपके दिमाग में ये सवाल जरूर आएगा कि आखिर आप चल ही क्यों रहे हैं। हर रोज सुबह उठने पर आप शायद अपने आप से ये सवाल सारा दिन पूछते रहें कि आज आपको क्या करना है लेकिन आपको कोई जवाब नहीं मिलेगा। आप बस साँसें लेंगे लेकिन आपकी जिन्दगी का कोई मकसद नहीं होगा।
मार्क ट्वेन ने कहा था- ” हमारी जिन्दगी में दो दिन बहुत ही जरूरी होते हैं। एक जिस दिन हम पैदा हुए थे और दूसरा जब हमें पता चलता है कि क्यों पैदा हुए थे।” जब तक आपकी जिन्दगी में वो दूसरा दिन नहीं आता तब तक आपकी जिन्दगी का कोई मतलब नहीं है।
जब पता होगा कि आपको कहाँ जाना है तब आप वहाँ तक पहुंचने के लिए रास्ते अपने आप ही बनाने लगेंगे। आप वहाँ तक जाने के लिए मेहनत करेंगे। सिर्फ जिन्दगी में एक मंजिल को हासिल करने की ख्वाहिश आपकी जिन्दगी को पूरी तरह से बदल कर रख सकती है।
जब आपको पता होगा कि आपको कहाँ जाना है तो आपको ये भी धीरे धीरे पता लग ही जाएगा कि एक कदम के बाद दूसरा कदम कहाँ और कब रखना है। इसलिए आप सबसे पहले ये तय कीजिए कि आपको कहाँ जाना है।
अपने काम को कभी अपने पर्सनल जिन्दगी के बीच मत आने दीजिए।
आपका परिवार ही बुरे वक्त में आपका साथ देता है। आप सारा दिन कहीं भी काम कर लें, घूम टहल लें लेकिन शाम होने पर या थक जाने पर आप वापस अपने परिवार के पास ही आएंगे क्योंकि आपको पता है कि वहीं पहुंच कर आपको थोड़ा सुकून मिलेगा।
लेकिन अक्सर हम अपने काम के लिए अपने परिवार को भूल जाते हैं। क्या इससे आप खुश रह पाएंगे। भले ही आप एक दिन दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन जाएं, लेकिन अगर आप के पास खुशी बाँटने के लिए कोई नहीं होगा तो आप के लिए वो कामयाबी कोई मायने नहीं रखेगी।
आथर जेम्स पैटरसन (Author James Patterson) के शब्दों में – “मान लीजिए आप पाँच गेंदों को हवा में उछाल कर खेल रहे हैं। ये पाँच गेंद हैं – काम, परिवार, दोस्त, सेहत और नैतिकता। एक दिन आपको पता चलता है कि काम की गेंद रबड़ की है जिसे अगर आप छोड़ दें तो फिर से पकड़ सकते हैं लेकिन बाकी गेंदें शीशे की हैं जिन्हें छोड़ने पर वे टूट जाएंगे।”
आप अगर अपने काम को छोड़ दें तो भी आप फिर से शुरूआत कर सकते हैं लेकिन अपने परिवार और दोस्तों को खोने के बाद आप कभी उन्हें वापस नहीं पा सकेंगे। इसलिए ये जरूरी है कि उन्हें आप ज्यादा अहमीयत दें।
आपको याद है जब आप अपने काम की लिस्ट बना रहे थे? उस लिस्ट में आपने सबसे जरूरी काम को सबसे ऊपर लिखा था और सबसे कम जरूरी काम को सबसे नीचे। आप अपने कम जरूरी काम को टाल कर अपने परिवार के लिए समय निकाल सकते हैं। आप उस काम को किसी और को करने के लिए दे सकते हैं या अगर वो फिलहाल के लिए जरूरी नहीं है तो आप उसे अपनी लिस्ट से निकाल भी सकते हैं। एक बार आपने अपना जरूरी काम पूरा कर लिया, तो आप बाकी कामों से समझौता कर के अपने परिवार के लिए समय निकाल सकते हैं।
मंजिल के रास्ते में आने वाली रुकावटों से लड़ना सीखिए।
जरूरी नहीं है कि जैसा आपने सोचा है हमेशा वैसा ही हो। जिन्दगी अक्सर हमारे लिए कुछ सर्प्राइज़ रखती है जो वो आपको कभी भी दे सकती है. कभी कभी ऐसा हो सकता है कि जब आप अपना कोई जरूरी काम कर रहे हों तब बाकी जगहों पर अव्यवस्था फैल जाए। तो आप इससे कैसे सुलझाएंगे?
सीधे शब्दों में – मत सुलझाइए। आप सबसे पहले अपने सबसे जरूरी काम पर ध्यान दीजिए। इस बीच अगर कहीं अव्यवस्था फैल रही है तो उसे फैलने दीजिए। उसके लिए और वक़्त आएगा अगर आप अपना जरूरी काम पहले करेंगे तो उसका नतीजा आपकी जिन्दगी में आने वाली अव्यवस्था को कम कर देगा। आप अपना ध्यान जरूरी काम में लगाएंगे तो आने वाले वक्त में आपकी जिन्दगी आसान हो जाएगी और आप बाकी की चीज़ों पर ध्यान दे पाएंगे।
आप अपने काम को एक निश्चित समय, अपना पूरा ध्यान और अपनी पूरी एनर्जी दीजिए। ऐसी जगह पर जाइए जहाँ पर आपका ध्यान भटकाने वाली चीजें कम हो जिससे आप आसानी से काम कर सकें।
सफलता हमेशा एक काम पर ध्यान लगाने से आती है।
आप अपना सबसे जरूरी काम ढूंढिए और फिर उसे अपना पूरा ध्यान दीजिए। इस बीच आप आने वाली समस्याओं से लड़ना सीखिए। आप अपने समय, अपनी एनर्जी और अपनी इच्छा शक्ति को सही जगह पर इस्तेमाल करना सीखिए और काम की भाग दौड़ में कभी अपने परिवार को मत भूलिए।
एक टु-डू लिस्ट बनाइए।
अपने सबसे जरूरी कामों को पहचान कर उन्हें सबसे पहले पूरा करने से आप कामयाबी तक के रास्ते को आसानी से तय कर सकते हैं।
अपने आप से हमेशा सवाल पूछिए।
मेरी मंजिल क्या है? उसकी तरफ बढ़ने के लिए मैं क्या करूँ ? अपनी मंजिल की तरफ एक और कदम बढ़ा सकूँ इसके लिए क्या करूँ ?
इस तरह के सवाल पूछने से आप हमेशा ही उस मंजिल के एक कदम नजदीक होते रहेंगे।
एक साथ दो काम करना बंद कर दीजिए।
जब हम अपना ध्यान एक काम से दूसरे काम लगाते हैं तो हमें उस काम में पूरा ध्यान लगाने के लिए कुछ समय लगता है। इसलिए एक साथ दो काम करना बंद कीजिए।