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Sexual Detox

 

A Guide For Guy’s Who Are Sick Of Porn

साल 2010 में रिलीज़ हुई बुक “sexual detox” वैसे तो सभी के लिए है.. लेकिन ये बुक यंग जनरेशन के लिए रियलिटी चेक है. इस बुक में “sexual detox” के टॉपिक को बड़ी बारीकी से कवर किया गया है. इस किताब की मदद से लेखक ने porn और सेक्स जैसा टॉपिक जो कि टैबू बन चुका है. उसके ऊपर लोगों के नज़रिए को बदलने की काबिले तारीफ़ कोशिश की है. आपको बता दें कि ये पूरी किताब ही मिथ ऑफ़ pornography और “sexual detox” के ऊपर है. इस किताब में पोर्नोग्राफी और सेक्स से जुड़े सभी मिथ को बड़ी बेबाकी के साथ तोड़ा गया है. अगर आप या आपका कोई जानने वाला पोर्नोग्राफी या सेक्सुअल फैंटेसी की दुनिया में उलझ के रह गया है. तो इस बुकसमरी की मदद से आप अपनी लाइफ को 360 डिग्री बदल सकते हैं.

लेखक  Tim Challies
आपको बता दें कि इस किताब का लेखन “tim challies” ने किया है. ये एक ब्लॉगर, सफल लेखक और जाने-माने book reviewer हैं. इन्होने अपने सालों के एक्सपीरियंस को इस किताब में शब्दों की मदद से पेश किया है.

एक ऐसी रियलिटी जिसके बारे में चर्चा करना बहुत ज़रूरी है

इस बुक की जर्नी की शुरुआत में ही लेखक शुक्रिया अदा करते हुए कहते हैं कि “हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि हम लोगों का जन्म इंटरनेट के फैलाव के समय से पहले हुए था. जब हम बच्चे थे.. तो वाकई पड़ोस का मतलब परिवार जैसा हुआ करता था.”

जब मैं आज के समय को देखता हूँ.. तो कई बार मुझे ऐसा लगता है कि जैसे मैंने तो किसी और काल में जन्म लिया था. जहाँ बच्चे मैदान में खेलने जाया करते थे. पड़ोसियों से डांट भी खा लिया करते थे और ज़िन्दगी किसी लव लेटर की तरह सुकून से चला करती थी. तब के समय अपने बच्चों को जल्दी से बड़ा कर देने की होड़ नहीं लगी हुई थी और ना ही माता-पिता अपने बच्चों को फिल्म स्टार या फिर इन्स्टा सेलेब्रिटी बनाना चाहते थे. वहीं जब मैं आज के समय को देखता हूँ तो मुझे लगता है कि आज की दुनिया तो पूरी तरह से बदल चुकी है. आज की जनरेशन की रफ्तार बहुत ज्यादा तेज हो गई है. कहीं ना कहीं इस रफ्तार को बढ़ाने में हम जैसे पैरेंट्स का ही योगदान है. आज हम अपने बच्चों के हाथों में कार्ड बोर्ड के लूडो देने की बजाए मोबाइल फोन दे देते हैं. जिसका परिणाम बहुत जल्द इस पूरी दुनिया को देखने को मिलेगा.

हालाँकि, एक लेखक ही नहीं बल्कि एक इंसान होने के नाते, मेरा ये मानना है कि दुनिया को वेब यानि इंटरनेट की ज़रूरत है. लेकिन सवाल यही है कि क्या पुरानी दुनिया और इंटरनेट का मेल नहीं हो सकता है? अगर हो भी सकता है तो ऐसा नहीं हो रहा है. बल्कि आज तो एक पूरी नई दुनिया को क्रिएट कर दिया गया है. और इस डिजिटल रियलिटी ने हर चीज़ को पूरी तरह से बदल दिया है. भले ही वो सेक्स ही क्यों ना हो? जी हाँ, आज की डिजिटल दुनिया में प्राइवेट मोमेंट्स भी पूरी तरह से बदल चुके हैं.

अगर हम 90 के दौर के टीनेजर्स को याद करें, तो याद आता है कि तब भी बच्चों को बहुत कुछ चाहिए होता था? लेकिन उस चीज़ को पाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती थी. तब हमें कोई भी चीज़ बड़ी आसानी से नहीं मिल जाती थी. लेकिन आज का समय पूरी तरह से बदल चुका है. अगर आज के दौर में किसी को पॉर्न देखनी हो, तो बस कुछ क्लिक के बाद उसे पूरी पॉर्न की दुनिया का एक्सेस मिल जाता है.

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज के समय में सच से ज्यादा झूठ फैलता है. इसलिए आज के दौर में फैक्ट चेक की बहुत ज्यादा ज़रूरत है. लोग उस झूठ को सच इसलिए मान लेते हैं क्योंकि झूठ सच के कपड़े पहनकर घूम रहा है. इसलिए बहुत ज़रूरी हो जाता है कि हम बेबाकी के साथ सच की बात करने की कोशिश करें.

अब बात पहले झूठ की करते हैं, ऐसे बहुत से लोग हैं जो pornography को एडल्ट इंटरटेनमेंट समझते हैं.

अगर हम भारत की बात करें तो इस देश में पोर्न फिल्में बनाने में रोक है, लेकिन यह धंधा इंटरनेट के दौर में बहुत तेजी से पनप रहा है. आलम यह है कि महज 20-25 लाख रुपये खर्च करके कोई प्रोड्यूसर बड़े आराम से करोड़ों की कमाई कर सकता है.

लोग सेक्स या पोर्न को ही एंटरटेनमेंट समझते हैं, इस बात का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि आज से 15 साल पहले एक प्रोड्यूसर ने कहा था कि “यहां सिर्फ सेक्स और एडल्ट कंटेंट ही बिकता है..”

लोगों को झुकाव एडल्ट कंटेंट की तरफ बढ़ रहा है, इसे आप इस बात से समझ सकते हैं कि साल 2020 में लॉक डाउन के बाद से पोर्न कंटेंट काफी ज्यादा देखे गए हैं. “लेट्स ओटीटी” की एक रिपोर्ट के अनुसार एमएक्स प्लेयर पर जुलाई 2020 में ‘मस्तराम’ को अकेले 3 जुलाई 2020 को 1.10 करोड़ बार देखा गया. इसी के साथ अगर हम गूगल ट्रेंड की रिपोर्ट पर भी नज़र घुमाए तो दुनिया के टॉप-10 शहरों में 6 शहर भारत के हैं, जहां सबसे ज्यादा पोर्न शब्द सर्च किया जाता है.

इसका मतलब साफ़ है कि लोग जो pornography को एडल्ट इंटरटेनमेंट समझने लगे हैं.

अब ये बात सच है या झूठ? इसे बारीकी से समझने के लिए हमें 100 साल पहले चलना होगा. दरअसल, इस कांसेप्ट को बताने के लिए लेखक एक कहानी शेयर करते हैं. वो कहानी कुछ इस तरह है कि-

आज से करीब-करीब 100 साल पहले की बात है, तब इंग्लैंड में अगर कोई जेंटलमैन क्लब जाने की बात करता था. तो लोग समझते थे कि वो प्राइवेट अपर क्लास में जा रहा है. जहाँ वो बोर्ड गेम्स खेलेगा, मूवी देखेगा और खुद को रिलैक्स करेगा. लेकिन आज के समय में अगर कोई कहता है कि वो जेंटलमैन क्लब में जा रहा है. तो लोग इसका मतलब अय्याशी से समझ लेते हैं.

इसी तरह आज से 50 साल पहले, अगर कोई एडल्ट लाइब्रेरी की बात करता था. लोग उसका मतलब नॉवेल्स से समझते थे. लेकिन आज के समय में ये नज़रिया पूरी तरह से बदल चुका है. आज के समय में अगर कोई एडल्ट लाइब्रेरी की बात करे, तो लोग उसका मतलब porn ही समझेंगे.

आज के समय में बहुत सारे लोग pornography को एडल्ट एंटरटेनमेंट के तौर पर देखते हैं. वो समझते हैं कि ये “mature” audiences की चीज़ है. हालाँकि, वो लोग ऐसा मानते हैं कि पोर्न बच्चों को नहीं देखनी चाहिए.

लेकिन सच्चाई ये है कि पोर्न बड़ों को भी नहीं देखनी चाहिए. सच्चाई थोड़ी कड़वी है लेकिन यही है कि “pornography isn’t suitable for adults either” अब आप खुद सोचिए कि नशीले ड्रग्स बच्चों के लिए सही नहीं हैं. तो क्या वो एडल्ट्स के लिए सही चीज़ है? बिल्कुल नहीं..

लेकिन इस दुनिया में porn advocates भी बहुत हैं, जो कि खुद तो इसकी लत में फंस चुके हैं. साथ ही साथ लोगों को भी इसके लिए उकसाने का काम करते हैं. वो कहते हैं कि “पोर्न में एडल्ट सेक्स करते हैं, और उसे एडल्ट्स के लिए ही फिल्माया जाता है.”

तो उनसे सवाल पूछना चाहिए कि यहाँ एडल्ट्स का असली मतलब क्या है? क्या इसके लिए 18 साल की उम्र को बेस लाइन समझा जाता है?

लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि 18 साल की उम्र का लड़का या फिर लड़की को आप एडल्ट कहने ज़रूर लगते हैं. लेकिन वो लोग अभी “mature” नहीं हुए होते हैं. इसका मतलब साफ़ है कि इस कंटेंट को बहुत बड़ी तादाद में ऐसे लोग देख रहे हैं. जिनके लिए ये बनाया ही नहीं गया है.

सबसे पहले आज से ही हमें इस बात को समझ लेना चाहिए कि कोई भी पोर्न फिल्म एडल्ट एंटरटेनमेंट नहीं है. जो लोग इसे एडल्ट एंटरटेनमेंट बोलते हैं, उन्हें यही नहीं मालुम है कि एंटरटेनमेंट का असली मतलब क्या होता है?

अब हम पोर्न फिल्म्स से जुड़े दूसरे झूठ से रूबरू होने वाले हैं. बहुत बड़ी तादाद में लोग मानते हैं कि पोर्न फिल्म्स केवल आदमी ही देखते हैं. लेकिन ये एक सबसे बड़ा झूठ है. इस किताब में एक टर्म का यूज किया गया है कि “porn empowers women” जिसका सीधा सा मतलब यही है कि पोर्न की मदद से कई औरतें सेल्फ लव या फिर सेक्सुअल फ्रीडम को महसूस करती हैं. मतलब साफ़ है कि लड़कियों की भी बहुत बड़ी तादाद है जो रोज़ अपने कंटेंट में पोर्न फिल्म्स देखती हैं.

1970 के दशक में betty dodson नाम की फेमस सेक्सोलॉजिस्ट हुआ करती थीं. उनकी सोच उनके समय से काफी आगे की थी. वो एक तरह का वर्क शॉप ओर्गेनाइज़ किया करती थीं. जिसमें वो औरतों से मास्टरबेट के बारे में बातें किया करती. साथ ही साथ लड़कियों को बताया करती थीं कि मास्टरबेट कैसे किया जाता है? उन्होंने “liberating masturbation: a meditation on self-love” नाम की क्लासिक नॉवेल भी लिखी थी. जिसमें उन्होंने सेल्फ लव के importance के बारे में बात किया था. इस किताब को आज भी feminist classic के तौर पर याद किया जाता है.

जैसा कि आपको पता चल चुका है कि betty dodson मास्टरबेशन के बारे में खुलकर बातें करती थीं. तो आपको लग रहा होगा कि पोर्न को लेकर भी उनके कुछ विचार रहे होंगे. जी हाँ, पोर्न को लेकर भी उनकी एक थॉट प्रोसेस थी. वो नहीं चाहती थीं कि बच्चे पोर्न फिल्म्स की तरफ ज्यादा झुकाव रखें. उन्हें ऐसा लगता था कि पोर्न फिल्म्स से किसी भी तरह की सेक्स एजुकेशन नहीं मिल सकती है.

उनके हिसाब से लोगों को बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना चाहिए, उनसे सेक्स को लेकर और मास्टरबेशन को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए. लेकिन इसके लिए किसी को भी पोर्न फिल्म्स का सहारा नहीं लेना चाहिए. लेकिन इसी के साथ उनका एक विचार ये भी था कि साल भर में एक बार पोर्न देखकर मास्टरबेट करने में कोई बुराई नहीं है.

इसके पीछे betty dodson एक रीज़न भी बताती हैं. वो कहती हैं कि हम औरतें एक ऐसे कल्चर में रहते हैं. जहाँ ऐसा माना जाता है कि कमिटेड रिलेशनशिप के बाहर सेक्सुअल प्लेज़र बुरी चीज़ है. कहीं-कहीं तो इसे पाप भी कहा जाता है. उस कल्चर में हमारे लिए पोर्न की मदद से मास्टरबेट करना आसान हो सकता है. उन जगहों में पोर्न की मदद से लड़कियाँ सेल्फ लव प्लेज़र को अचीव कर सकती हैं. लेकिन उन्हें बस इसकी फ्रिक्वेंसी का ख्याल रखना चाहिए.

इसलिए ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि पोर्न केवल आदमी ही नहीं देखते हैं. बल्कि इसका खुलकर समर्थन लड़कियां या औरतें भी कर रही हैं.

यहाँ आपको लेखक बताना चाहते हैं कि वो ना ही पोर्न के खिलाफ हैं और ना ही उसके पक्ष में हैं. पोर्न देखना या ना देखना, ये किसी का भी निज़ी फैसला है. लेखक इस किताब की मदद से पोर्न से जुड़ी झूठी अफवाहों को लोगों के सामने लेकर आ रहे हैं. साथ ही साथ अपनी तरफ से सलाह दे रहे हैं कि पोर्न की लत से दूरी बनाने की कोशिश करिए. क्योंकि लत या नशा किसी भी चीज़ का अच्छा नहीं हो सकता है.

इस एपिसोड की शुरुआत में हम लोगों ने betty dodson के विचार सुनें, उसी के साथ एक टर्म भी सुना कि “porn empowers women”.. इसी टर्म को लेकर लेखक कहते हैं कि “जो लोग इस टर्म का यूज़ करते हैं. उनसे सीधा सवाल किया जाना चाहिए कि जिन लाखों महिलाओं के पति पोर्न की लत में हैं? क्या वो महिलायें भी porn की वजह से empower हुई हैं? बिल्कुल नहीं.. इसलिए हमें केवल मास्टरबेशन के बारे में सोचकर पोर्न की केवल एक तस्वीर नहीं देखनी चाहिए. इसकी दूसरी तस्वीर काफी ज्यादा डराने वाली है.

आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हैं कि पोर्न की लत की वजह से ना जाने कितनी शादियाँ टूट रही हैं? dr. jill manning, marriage and family therapist, बताते हैं कि अमेरिका में बड़ी तादाद में लड़कियाँ डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं. उसके पीछे की वजह यही है कि वो अपने पार्टनर को सेक्सुअली प्लेज़र नहीं दे पा रही हैं. हालाँकि, इसमें उन लड़कियों की कोई दिक्कत नहीं हैं. उनकी सेक्सुअल हेल्थ बिल्कुल सही है, असली दिक्कत पोर्न की वजह से पैदा होने वाली एक्स्पेक्टेशन में है.

पति मोबाइल स्क्रीन में पोर्न देखते हैं और फिर सोचते हैं कि उनकी पत्नियाँ पोर्न स्टार की तरह बिहेव करने लगें. लेकिन ऐसा हो ही नहीं सकता है. हमें समझना चाहिए कि pornography और रियल्टी में कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं है.

किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद mutual respect, honesty, shared power, और romantic love में टिकी हुई होती है. लेकिन pornography में डिस रिस्पेक्ट, पेन और डिटैचमेंट दिखाया जाता है. जो कि किसी भी रोमांटिक रिश्ते के लिए बिल्कुल सही नहीं है.

pornography को ही देखकर आज कल के युवा लड़के अपनी शादी को बर्बाद करते जा रहे हैं. वो रियल लाइफ में भी ज़रूरत से ज्यादा पेन फुल सेक्स करना चाहते हैं. लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि वैसा पेन केवल पोर्न फिल्म्स में ही दिखाया जा सकता है. आपको समझना चाहिए कि pornography से केवल मर्दों की सेक्स ड्राइव ही नहीं खराब हो रही है. बल्कि उनके अंदर की इंसानियत भी खत्म होती जा रही है. इसी वजह से कई लोग तो प्यार को केवल सेक्स के रूप में ही देखने की शुरुआत कर चुके हैं.

इसलिए लेखक कहते हैं कि “सेक्स को अच्छे से समझने के लिए, सबसे पहले औरत को प्योर ह्यूमन की तरह देखने की शुरुआत करिए. जब आप ऐसा करने लगेंगे तो धीरे- धीरे आप रियल सेक्स को भी समझने लगेंगे. सेक्स का मतलब अपने आपको किसी के ऊपर फ़ोर्स करना कत्तई नहीं होता है.”

इसलिए आज से ही रियल सेक्स को समझने की कोशिश करिए, pornography में दिखाया गया सेक्स रियल नहीं हो सकता है.

हम सेक्स की originality की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज के समय के युवाओं ख़ासकर लड़कों को प्यार और वासना के बीच का अंतर ही नहीं मालुम है. कई लोग ऐसा कहते ज़रूर हैं कि “प्यार का नाम सुनते ही दिल में गुदगुदी होने लगती है. प्रेम में पड़े हुए हैं तो दुनिया मुट्ठी में लगती है.” लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता है कि वो प्यार में हैं या फिर उनके अंदर वासना भरी हुई है.

लेकिन क्या आप सचमुच किसी के प्यार में पड़ चुके हैं या सिर्फ आपकी वासना है? ये भी बड़ा पेचीदा सवाल है. आखिर प्यार और वासना में क्या अंतर हैं और इसकी पहचान कैसे की जाए?

इस बारे में चर्चा करते हुए लेखक कहते हैं कि “रोमांटिक प्यार के तीन पहलू होते हैं. अक्सर वासना सबसे पहले आता है लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है. कुछ लोग जिनमें यौन इच्छा नहीं होती उनके प्रेम में वासना नहीं भी हो सकती है. लेकिन वासना का अनुभव एस्ट्रोजेन और टेस्टास्टरोन जैसे हारमोन का खेल है.”

ये किसी के सेक्स करने की क्षमता और इच्छा को प्रभावित करते हैं. यह पूरी तरह जिस्मानी मामला है. लेकिन ये यौन संबंध बनाने की इच्छा है. किसी व्यक्ति में यह उनके पिता या मां के डीएनए से आ सकता है. आप ये कह सकते हैं कि वासना न होती तो धरती पर मानव जाति का अस्तित्व ही खत्म हो जाता.

रोमांटिक प्यार के दूसरे हिस्से का नाम अटरैकशन है. ऐसा दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर की वजह से होता है, जिसे डोपामाइन कहते हैं. यह हमारे दिमाग में रिलीज होने वाला केमिकल हॉर्मोन है, जो हमें किसी फायदे को हासिल करने के लिए उकसाता है. डोपामाइन हमें बार-बार एक ही काम करने के उकसाता रहता है.

लेकिन आपको पता होना चाहिए कि जिस तरह किसी नशे की लत लगती है. ठीक उसी तरह बेइंतहा attraction जैसा अहसास किसी के प्रति एक लत की तरह है.

कुछ लोग इस लूप में फंस जाते हैं और हमेशा डोपामाइन से प्रेरित किसी नए रिश्ते के रोमांच की तलाश में रहते हैं. इसका मतलब आपको प्यार की लत लग गई है. यहाँ डोपामाइन का ज़िक्र बार-बार इसलिए हो रहा है कि क्योंकि इसी की वजह से आदमी को porn जैसी बुरी लत भी लगती है.

इसी के साथ हमें ये भी पता होना चाहिए कि वासना में दो अन्य हॉर्मोन्स भी काम करते हैं. जिनका नाम ऑक्सिटोसिन और वेसोप्रेसिन है.

दोस्तों, अभी तक हम लोगों ने प्यार और वासना के बारे में थोड़ी बारीकी से चर्चा कर ली है. इन टॉपिक्स को हम आगे भी समझने की कोशिश करेंगे. लेकिन उससे पहले हम फिर से थोड़ा 90 के दशक में चलते हैं.

इस की शुरुआत में हम लोगों ने टीनेजर्स की बात की थी. आपको बता दें कि नाइनटीज़ के टीनेजर्स और आज के समय के टीन्स में बहुत ज्यादा फर्क आ चुका है. ऐसा नहीं है कि उस समय के युवा पोर्न नहीं देखना चाहते थे. हर किसी की लाइफ में एक ऐसा समय आता है. जब उसकी बॉडी के अंदर कई तरह के केमिकल रिलीज़ होने लगते हैं. वो एक ऐसा समय होता है जब वो युवा सेक्स की तरफ कुछ ज्यादा ही attract होने लगता है.

लेकिन नव्वद के दशक के बच्चों के लिए पोर्न देखना इतना आसान नहीं हुआ करता था. तब अश्लील मैग्जीन का दौर था और उसके लिए भी दो दोस्त लगा करते थे. एक दोस्त का काम दुकानदार का ध्यान भटकाना होता था और दूसरे दोस्त का काम रैक से मैग्जीन गायब कर देना.

एक अश्लील मैगजीन के लिए इतनी मेहनत एक दो बार करके लड़के ऊब जाया करते थे. और उस समय गलती की भी कोई गुंज़ाइश नहीं होती थी. ग़लती करने पर बात परिवार वालों को पता चल जाती थी. तब अधिकत्तर जॉइंट फैमिली का जमाना होता था तो गुनाह करने वाले का क्या हश्र होता होगा? इसका अंदाज़ा तो आप लगा ही सकते हैं.

लेकिन आज के डिजिटल युग के टीनेजर्स एक क्लिक में pornography की दहलीज़ में पहुँच जाते हैं. हज़ारों की संख्या में पोर्न वेब साईट अवलेबल हैं. जहाँ भर भर कर पोर्न फिल्म्स दिखाई जा रही हैं. आज एक ऐसा दौर आ चुका है जब pornography की तलाश करना मुश्किल नहीं है. बल्कि इस जंजाल से बचकर रहना मुश्किल होता जा रहा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक ही उम्र के लोग पोर्न देखते हैं. हर उम्र के लोग अलग अलग मीडियम की मदद से पोर्न देखते हैं. उदाहरण के तौर पर एक्सविडियोज जो कि दुनिया की सबसे बड़ी पॉर्न साइट है उस पर 4 अरब का पेज व्यू आता है. यूजर्स को कुछ पॉर्न साइट्स पर साइन इन होने के लिए पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन लोग इससे भी परहेज नहीं करते हैं. वो अपनी मेहनत की कमाई को ख़ुशी-खुशी पोर्न साईट को दान में दे देते हैं.

अगर हम जापान जैसे विकसित देश की बात करें तो वहां 83 फीसदी पुरूष ऑनलाइन पोर्न देखते हैं.

अमेरिका में हुए एक ऑनलाइन सर्वे में महिलाओं ने खुलकर सेक्स के ऊपर अपने विचार रखे थे. उनमें से ज्यादातर फीमेल्स ने कहा था कि “जब भी वो अपने पार्टनर्स के साथ इंटीमेट होती हैं. तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनके पार्टनर्स को उनके अंदर कोई दिलचस्पी ही नहीं है. बल्कि वो उन्हें बस पोर्न स्टार की तरह देख रहे हैं. उनके पार्टनर चाहते हैं कि जैसा पोर्न में दिखाया जाता है. हम वैसा ही बिस्तर में बिहेव करें, लेकिन ये बिल्कुल पॉसिबल नहीं हो सकता है..”

आगे अमेरिकन्स औरतें बोलती हैं कि पिछले 1 दशक में ये देखने को मिल रहा है कि मर्दों के अंदर पोर्न रिलेटेड fantasies काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं.

इस बारे में बात करते हुए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि “दुनिया भर में सबसे ज्यादा पंसद किए जाने वाले सर्च इंजन गूगल ने एक बार फिर युवाओं को भटकाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. गूगल के प्ले स्टोर में इन दिनों पोर्न का बाजार सजा हुआ नज़र आता है. यही वो जगह है जहाँ से लोगों को आसानी से पोर्न या फिर कहें कि सॉफ्ट पोर्न मिल जाती हैं. इस बात में भी कोई शक नहीं है कि गूगल के प्ले स्टोर में छात्रों से लेकर बिजनेसमैन, महिलाओं के लिए कई अच्छे एप्लीकेशन भी मौजूद हैं लेकिन इन सबके बीच अश्लील वीडियो, एसएमएस, एमएमएस, कहानियां, वीडियो गेम्स की मौजूदगी चिंता का कारण है. ”

इसलिए लेखक कहते हैं कि अब समय आ गया है कि हमें “sexual detox” के लिए तैयार होना होगा. ये बात भी सच है कि आज के समय में किसी लड़के के सामने हज़ारों मुश्किलें आती रहती हैं. इसलिए इन मुश्किलों के बीच में अपने दिमाग को सही जगह लगा पाना भी एक कठिन काम है.

लेकिन अगर आप लाइफ में कुछ भी अच्छा करना चाहते हैं तो आपको अपने दिमाग के ऊपर कंट्रोल तो करना ही होगा. बिना दिमाग के ऊपर सही कंट्रोल किए हुए आप “sexual detox” प्रोसेस का पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगे.

इसलिए लेखक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि आज के समय में लड़का होना तो बिल्कुल भी आसान नहीं है. और ख़ासकर टीनेजर की उम्र के लड़कों के सामने तो हॉर्मोन्स का पहाड़ खड़ा रहता है. इसलिए बहुत ज़रूरी हो जाता है कि हम अपने दिमाग को DETOX के लिए तैयार करने की शुरुआत भी कर दें. सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि सेक्स की तरफ कम ध्यान देकर, आप हर मायने में दूसरों से बेहतर बन सकते हैं. टीनेजर्स होने के नाते आपको ध्यान रखना चाहिए कि उम्र का तकाज़ा आपको पीछे की ओर खींच रहा है. इसलिए आगे की तरफ बढ़ने के लिए किसी भी तरह इस पोर्न और सेक्स की लत से बाहर निकलना ही होगा.

अगर आपको इस बुक समरी में बार-बार लड़के शब्द के आने से दिक्कत हो रही हो तो बता दें कि लेखक ने इस बुक को यंग लड़कों को टारगेट करके ही लिखा है. लेकिन इस बुक से किसी भी उम्र का इंसान सीख सकता है.

Sexual Detox

पॉर्न….. शादी और सुहागरात के बारे में बात होना भी ज़रूरी है

दोस्तों, अगर आपसे कहा जाए कि सेक्स की वजह से अध्यात्म की तरफ इंटरेस्ट डेवलप होता है? तो ये सुनकर आपको कैसा लगेगा? कई लोगों को अजीब लग रहा होगा. लेकिन सेक्स को लेकर एक रिसर्च में कुछ ऐसा ही दावा किया गया है.

इस रिसर्च के ऊपर बात करते हुए लेखक कहते हैं कि “साइंटिस्टस की पूरी टीम ने सेक्स, जी हाँ सेक्स, “पॉर्न नहीं” वही सेक्स जिसे दार्शनिक और गुरु ओशो ने ज़िन्दगी में प्रेम का प्रतीक बताया था. उसी सेक्स के ऊपर हुई रिसर्च ये भी बताती है कि सेक्स के दौरान जो हॉर्मोन रिलीज होता है, उससे अध्यात्म को बढ़ावा मिलता है और इंसान की अध्यात्म की तरफ आस्था भी मज़बूत होती है.”

इसी बात को अगर मेडिकल टर्म की मदद से समझने की कोशिश करें तो सेक्स के समय ऑक्सिटॉसिन नाम का हॉर्मोन निकलता है. ये हॉर्मोन न सिर्फ सामाजिक बंधन को मजबूत करता है बल्कि धर्म के प्रति लगाव को भी बढ़ाता है.

आपको बता दें कि इस रिसर्च को अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी ने किया था. इस रिसर्च का सैम्पल साइज़ भी बहुत ज्यादा बड़ा था. इसलिए इसके रिजल्ट पर गौर करना बहुत ज़रूरी है. यही वजह है कि आचार्य रजनीश चंद्र मोहन ‘ओशो’ ने भी फ्री सेक्स को लेकर काफी फिलॉसफ़ी दी है. हालाँकि उनकी कई बातों पर बहस होती रहती है. लेकिन उन्होंने भी बताया है कि सेक्स और porn दो अलग-अलग चीजें हैं. उन्होंने कहा भी है कि पॉर्न से दूरी बनाइए और अपने पार्नर के नज़दीक जाने की कोशिश करिए.

लेखक भी कहते हैं कि जिस दिन आप असली सेक्स को समझ लेंगे, उस दिन आप पोर्न से दूरी भी बना लेंगे क्योंकि प्रेम का मुख्य रास्ता सेक्स ही है और जो लोग सेक्स को बुरी नज़रिए से देखते हैं. विश्वास करिए, उन्होंने आज तक प्रेम को समझा ही नहीं है. लोग प्यार और pornography को भी एक समझने की गलती कर देते हैं. लेकिन ये भी एक बड़ा मिथ है. वैसे तो pornography के बारे में बहुत सी बातें कही जाती हैं. लेकिन एक और मिथ है जिसे काफी ज्यादा सच मान लिया गया है. आपने भी अधिकत्तर लोगों को कहते सुना होगा कि पोर्न का विरोध केवल अध्यात्मिक यानि religious लोग ही करते हैं.

क्या ये बात सच है?

आपको बता दें कि इस बात में आधी सच्चाई है. और आधा सच सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. ये बात तो सच है कि अधिकत्तर अध्यात्मिक लोग पोर्न को पसंद नहीं करते हैं. लेकिन ये बात सच नहीं है कि केवल अध्यात्मिक लोग ही पोर्न को पसंद नहीं करते हैं.

आगे इसी एपिसोड में हम इस कांसेप्ट के बारे में बारीकी से चर्चा करेंगे. लेकिन पहले जान लेते हैं कि अध्यात्मिक लोग क्यों पोर्न जैसी चीज़ों से दूर रहना पसंद करते हैं?

religious खुद को pornography जैसी चीज़ों से दूर रखना पसंद करते हैं. क्योंकि लाइफ को लेकर उनका नज़रिया ही अलग हो जाता है. या तो यूं कहें कि जो लोग सच्चे अध्यात्मिक होते हैं. उन्हें पोर्न जैसी दुनिया से कोई फर्क ही नहीं पड़ता है. ये सब चीजें उनके लिए मायने नहीं रखती हैं. वो अपनी लाइफ को किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगा देते हैं.

लक्ष्य को लेकर किसी ने बहुत खूब कहा है कि “हमेशा अपने आपको कठिन से कठिन चुनौती देते रहना चाहिए. इंसान के लक्ष्य जितने बड़े रहेंगे. वो दुनियादारी की चीज़ों से उतना ही अलग रहेगा..”

इसलिए अध्यात्मिक लोगों से हम सीख सकते हैं कि कैसे खुद को बड़े गोल्स की तरफ लेकर जाया जाता है.

गोल्स के महत्व को बताने के लिए लेखक अपने दोस्त की कहानी बताते हैं. वो कहते हैं कि “उनका एक बहुत ख़ास दोस्त है, जिसका नाम जिम है. वैसे तो जिम काफी फिट हुआ करता था. लेकिन उसकी लाइफ में एक डिप्रेसिंग दौर आया. जब उसकी प्रेमिका ने उसे ये कहते हुए छोड़ दिया था कि बेडरूम में वो सेक्स प्लेज़र में अच्छा नहीं है. हालाँकि, बाद में ये पता चला था कि जिम तो बेडरूम में नार्मल इंसान की ही तरह था. लेकिन उसकी गर्ल फ्रेंड बुरी तरह से पोर्न की लत में फंसी हुई थी. उसे बेडरूम में वही सब चाहिए होता था जो कि पोर्न में दिखाया जाता था.

जिम अपनी गर्ल फ्रेंड की इसी एक्सपेक्टेशन को पूरी नहीं कर पा रहा था. इस बात से उसे काफी शॉक लगा था और वो बुरी तरह से डिप्रेशन में चला गया था. जिसकी वजह से एक ऐसा दौर भी आया जब उसका वजन काफी ज्यादा बढ़ गया. उसका कॉंफिडेंट पूरी तरह से खत्म हो चुका था.

फिर लेखक ने उसके साथ काफी समय बिताया और उसे एक डॉक्टर के पास भी लेकर गए. काफी सेशन के बाद डॉक्टर ने उसे राइटिंग वर्क चालु करने की सलाह दी, साथ ही साथ उन्हें वजन कम करने के लिए भी कह दिया था.

लेकिन रियलिटी ये थी कि जिम का वजन इतना ज्यादा हो गया था कि अब कोई भी काम करना मुश्किल हो रहा था. इसलिए जिम का पहला टारगेट उसका वजन कम करना था. उस समय जिम के डॉक्टर ने भी कह दिया था कि अगर वो अच्छी खासी मेहनत वजन कम करने के ऊपर नहीं करेंगे तो उन्हें एडमिट भी होना पड़ेगा.

ये काफी डरावना था लेकिन इसी के साथ जिम के लिए एक अच्छी खबर भी आ गई थी. वो ये कि उन्हें एक राइटिंग प्रोजेक्ट मिल गया, जिसे 10 महीनें के अंदर सबमिट करना था. इस प्रोजेक्ट में जिम को 10 महीनों के अंदर एक किताब लिखनी थी.

अब जिम के सामने बड़ा सवाल ये था कि ये दोनों चीजें एक साथ कैसे होंगी? फिर लेखक ने जिम को सलाह दी कि उन्हें वो दोनों गोल्स को साथ में लेकर आगे बढ़ना चाहिए. और इस फैसले में देरी भी नहीं करनी चाहिए. क्योंकि एक से उनकी हेल्थ अच्छी होगी और दूसरे से उनकी प्रोफेशनल लाइफ बेहतर होगी.

इसके बाद जिम की मेहनत देखने लायक थी. जिम ने स्ट्रेटजी अपनाई कि अपने वजन कम करने वाले टास्क को छोटे-छोटे टुकड़े में बाँट लिया. वो खुद के लिए हर रोज़ टारगेट सेट किया करते थे, जिसे अचीव करने की भी पूरी कोशिश करते थे.

लेखक कहते हैं कि जिम ने ऐसी डेडीकेशन दिखाई थी कि उसकी हेल्थ, मेंटल हेल्थ और प्रोफेशनल लाइफ.. तीनों ही 10 महीनें के अंदर सुधर भी चुकीं थीं. और जिम पहले से काफी ज्यादा खुश भी रहने लगा था.

जिम की गोल सेटिंग से आप सीख सकते हैं कि गोल की तरफ आपका पहला स्टेप यही होना चाहिए कि आप उसे छोटे-छोटे भागों में बाँट लें. ऐसा करने से आपके अंदर थकान नाम की चीज़ नहीं आएगी. जब आप फ्रेश रहेंगे तो ज्यादा मेहनत और उर्जा के साथ अपने लक्ष्य का पीछा कर पाएंगे.

गोल को टास्क में बदलिए और से हर रोज़ अचीव करने की कोशिश करिए. इसके लिए आप गोल प्लानर की भी मदद ले सकते हैं. उसकी मदद से आप हर रोज़ के टारगेट को अचीव कर पाएंगे. रात को सोने से पहले 10 मिनट ये लिखने में लगाइयेगा कि क्या आज का टारगेट आपने अचीव किया है? या नहीं किया?

जिस दिन आप टारगेट को अचीव ना करें, उस दिन को लाल पेन से मार्क कर दीजिएगा. जो आपको बतायेगा कि आज आप फेल हो गए हैं. अगर आपका कोई दोस्त है या पार्टनर है. जिसे आप ट्रस्ट करते हैं. तो अपने गोल को उनके साथ शेयर करिए. उन्हें भी ऐसा करने के लिए मोटिवेट करिए. दोनों ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक दूसरे की मदद कर सकते हैं.

ऐसे लोगों की बात को मत सुनियेगा जो कहें कि आप इस टारगेट को अचीव नहीं कर सकते हैं. आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे जो आपको पीछे खींचने की कोशिश करेंगे. आपको उनकी बातों में नहीं आना है. हो सके तो वहां से भी कुछ मोटिवेट होने का मसाला उठा लीजिएगा.

लेखक कहते हैं कि जिम की कहानी हमें ये भी बताती है कि पोर्न की लत किस कदर तक खराब हो सकती है? इसलिए अध्यात्मिक लोग कहते हैं कि पोर्न की वजह से कोई भी रिश्ता खराब हो सकता है. आज की दुनिया में ना जाने कितने जिम या जैरी के रिश्ते सिर्फ और सिर्फ पोर्न की लत की वजह से खराब हो रहे हैं?

इसलिए अभी भी वक्त है, जब हमें pornography की रियलिटी के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए.

पोर्न को छोड़ने के लिए आपका रीलिजियस होना ज़रूरी नहीं है. इसे हम ‘नो फैप’ कम्युनिटी से भी समझ सकते हैं. ऑनलाइन की दुनिया में ये कम्यूनिटी काफी ज्यादा फेमस हो चुकी है. इस कम्युनिटी की शुरुआत religious motivations से नहीं हुई थी. बल्कि इसलिए हुई थी क्योंकि इसके मेम्बर्स जानना चाहते थे कि pornography छोड़ने के बाद उनकी लाइफ में क्या- क्या बदलाव आएंगे?

अब आपके साथ कुछ factual data शेयर कर रहे हैं, आपको जिन्हें देखकर काफी हैरानी भी हो सकती है. जिन लोगों ने nofappers की शुरुआत की थी, उनमें से 65 परसेंट लोगों को पोर्न की बुरी लत लग चुकी थी. उस ग्रुप में ज्यादातर जवान लोग ही शामिल थे, जिनमें से 19 percent लड़कों को शीघ्रपतन यानि premature ejaculation की दिक्कत आने लगी थी. 25 percent लड़कों की सेक्स से इंटरेस्ट खत्म हो चुका था. 31 percent लड़कियों को orgasm की फीलिंग नहीं आती थी. और 34 percent युवाओं को तो erectile dysfunction की प्रॉब्लम शुरू हो गई थी.

लेकिन pornography को छोड़ने के बाद इनके रिज़ल्ट भी चौकाने वाले थे. 60 percent लोगों को ऐसा महसूस हुआ कि पोर्न की लत से पीछे हटने के बाद उनकी sexual health बेहतर हुई है. ये एक्सपेरिमेंट साफ़ तौर पर ईशारा करता है कि pornography.. इंसान के दिमाग पर असर करती है. pornography की वजह से इंसान की मेंटल हेल्थ से लेकर biological हेल्थ तक खराब हो सकती है.

इसलिए बहुत ज़रूरी है कि सही समय पर हम अपनी इस लत को diagnose कर लें. हमें समझना चाहिए कि हमारी लत की पहचान हमें ही करनी होगी. कोई और हमें ये बताने नहीं आएगा कि हमें पोर्न की लत लग चुकी है. अगर आपको अपनी लत के बारे में पता करना है तो खुद से ईमानदारी के साथ सवाल करिए कि हफ्ते में कितनी बार आप पोर्न वेब साईट को विजिट करते हैं?

आपकी विजिटिंग नम्बर्स बता देंगे कि आप लत के किस पायदान पर खड़े हुए हैं. क्योंकि आज के डिजिटल युग में पोर्न तक पहुंचना मुश्किल नहीं है. बल्कि खुद को पोर्न से बचा पाना बहुत मुश्किल है. इसलिए खुद को मुश्किल टास्क दीजिए और अपने आपको पोर्न से बचाने की पूरी कोशिश करिए, बिना पोर्न के आपकी लाइफ बहुत बेहतर हो सकती है. बस, देर है तो आपके कोशिश करने की…

आगे चर्चा करते हुए लेखक ‘tim challies’ कहते हैं कि “मैं, जब भी किसी यंग लड़के या हसबैंड से मिलता हूँ, तो मुझे यकीन रहता है कि ये लड़का अभी या तो पहले pornography के जंजाल में फंसा हुआ था.”

ऐसा इसलिए क्योंकि आज के समय में अगर आप pornography तक नहीं जा रहे हैं. तो किसी ना किसी माध्यम की मदद से pornography आपके पास आ जाती है. इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि आज के समय में पॉर्न की अवेलबिलिटी काफी ज्यादा आसान हो गई है. इसलिए ज्यादातर जवान लड़के पॉर्न की लत में फंसते जा रहे हैं.

इसका सीधा असर उनकी शादी शुदा लाइफ में भी पड़ रहा है. जब लोग दिन भर पॉर्न ही देखेंगे और उसकी ही बातें करेंगे, तो उनके दिमाग में भी तो सेक्स को लेकर वैसी ही तस्वीर बन जाएगी. इसलिए ये देखने को मिल रहा है कि जो लोग शादी कर रहे हैं. उनके मन में अपने पार्टनर से काफी ज्यादा एक्सपेक्टेशन रहती हैं.

आगे बताते हुए लेखक कहते हैं कि “यंग हसबैंड ऐसा सोचते हैं कि उनकी वाइफ भी स्क्रीन में नज़र आने वाली पॉर्न एक्ट्रेस की तरह सेक्स में एक्सपर्ट होगी. उनकी उम्मीदें अपनी पत्नियों से सेक्स स्टार वाली हो जाती है. और जब ये उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं. तो उनके अंदर एक फर्स्टटेशन का जन्म होता है. जिसकी वजह से यंग कपल्स के भी रिश्ते खराब होने लगे हैं.

जब हम पॉर्न के बारे में चर्चा कर रहे हैं. तो आपके लिए इस तस्वीर को साफ़ कर दें कि पॉर्न फ़िल्में किसी का सेक्स को लेकर नज़रिया बदल सकती हैं. पॉर्न फिल्में देखने वाले के दिल में एक बीज बोने का काम करती हैं. जिस बीज का असर भले ही देर में देखने को मिले, लेकिन ये ज़हर की तरह बीज अपना असर ज़रूर दिखाता है. इसी की असर की वजह से ना जाने कितने रोमांटिक रिश्तों ने दम तोड़ा है.

इसलिए अभी भी समय है, लोग pornography vs. marriage के कांसेप्ट को बारीकी से समझ लें, इस कांसेप्ट की मदद से कई लोगों के रिश्ते बच सकते हैं.

आपको बता दें कि pornography के अंदर किसी भी शादी को खत्म करने की शक्ति होती है. क्योंकि pornography में सेल्फ के बारे में बात की जाती है. उसमें केवल और केवल खुद के सुख को ही दिखाया जाता है. लेकिन शादी अपने पार्टनर के बारे में सोचने वाली चीज़ हैं. शादी की गाड़ी कभी भी एक पहिया के दम पर बहुत दूर तक नहीं चल सकती है.

शादी एक ऐसा रिश्ता है, जिसकी बुनियाद काफी मज़बूत होनी चाहिए. और इसकी बुनियाद को मज़बूत रखने के लिए कुछ बुनियादी बातों को जानना बहुत ज़रूरी है.

उन्हीं बुनियादी बातों को जानने के लिए हमें इमोशनल स्टेट के बारे में पता होना चाहिए. अगर हमें किसी रिश्ते को बेहतर रखना है. तो उस रिश्ते से जुड़े इमोशन्स को बचाकर रखना होगा.

इसे और बारीकी से समझने की कोशिश करते हैं. आपके पार्टनर के साथ आपकी पिछली फाइट कब हुई थी? क्या आपको वो लड़ाई याद है? क्या आपको ये याद है कि उस लड़ाई के पीछे की वजह क्या थी?

आप पिछली बार कब नाराज़ हुए थे उन्हें याद करना आसान है. लेकिन उसके पीछे इमोशन क्या थे? उन्हें बता पाना उतना ही मुश्किल है. हम सभी जानते हैं कि रिलेशनशिप कंफ्लिक्ट में इमोशन का योगदान काफी ज्यादा रहता है. इसमें कुछ गलत भी नहीं है. परेशानी तब आती है जब आपको अपनी कही हुई बात का रिग्रेट होता है. आप खुद को ऐसी स्थति में पाते हैं. जहाँ से आपको कुछ भी नहीं मिल रहा होता है.

इसके पीछे का रीज़न यही है कि इमोशन का महत्त्व बहुत ज्यादा होता है. लेकिन, हमारे पास उनको सही से समझने की समझ नहीं होती है. जिसकी वजह से काफी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं. सभी के पास एक बेस इमोशनल स्टेट होती हैं. जहाँ से वो चीज़ों को समझने की कोशिश करता है.

आप रिलेशनशिप में भी हाई इमोशन की वजह से क्लियर कम्यूनिकेट नहीं कर पाते हैं. इसी के साथ आप नेगेटिव फीलिंग की वजह से जैसे ही बेस लाइन को क्रॉस करते हैं. वैसे ही इमोशनल और मानसिक तौर पर आप और ज्यादा टूटने लगते हैं. धीरे-धीरे आप जजमेंटल हो जाते हैं.

मान लीजिए कि आप अपने पार्टनर के साथ शाम को समय बिताना चाहते हैं. लेकिन वो देर से आता है. अब अगर आप बेसलाइन पार कर चुके हैं. तो आप उससे क्लियर नहीं पूछेंगे बल्कि आप उसके ऊपर गंदा कमेन्ट कर देंगे. जिसकी वजह से वो भी हाई इमोशनल लेवल पर चला जाएगा. इसके बाद की कहानी आपको मालुम ही होगी.

इन पूरी बातों का सिम्पल सा मतलब यही है कि रिश्ते को बेहतर करने के लिए कपल्स को अपने इमोशन्स को कंट्रोल करके रखना चाहिए. लेकिन ये अनकंट्रोलेबल तब हो जाता है, जब पत्नी को पता चलता है कि उसका पति उससे बिस्तर में केवल सेक्सुअल एक्ट ही चाहता है?

ऐसी चीज़ के बारे में पता चलने के बाद कोई भी इंसान अपने इमोशन्स को कंट्रोल में नहीं रख सकता है.

तो अब सबसे बड़ा सवाल young married men या फिर सिंगल लड़कों के लिए ये है कि क्या वो अपनी पत्नी को सेक्स टॉय समझना चाहते हैं? क्या उनके लिए शादी का मतलब केवल सेक्सुअल एक्ट करना है? अगर ऐसा नहीं है. तो उन्हें तुरंत “sexual detox” की मदद से अपनी लाइफ को बदलने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए.

लेखक ‘tim challies’ कहते हैं कि पॉर्न की लत का सामना कर रहे है ज्यादातर यंग ब्लड ऐसा मानते हैं कि शादी करने के बाद इस आदत से छुटकारा मिल जाएगा. इसके पीछे उनके पास रीज़न भी रहता है. वो कहते हैं कि शादी के बाद खूब सेक्स करने को मिलेगा. जिसकी वजह से उन्हें पॉर्न के पास नहीं जाना पड़ेगा.”

इस बारे में लेखक आगे कहते हैं कि “अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि “मैरिज ईज नॉट सॉल्यूशन फॉर पॉर्ननोग्राफी एंड मास्टरबेशन..” अगर आपको पॉर्न और मास्टरबेशन की लत लग चुकी है. तो इसका ईलाज शादी नहीं है. अगर आप इस लत को छुड़ाने के लिए शादी करने वाले हैं. तो आप बिल्कुल शादी ना करिए, क्योंकि ऐसा करने से आप अपनी लाइफ के साथ-साथ एक लड़की की लाइफ के साथ भी खिलवाड़ करेंगे.”

इसके लिए आप उन हज़ारों लड़कों की कहानी से सीख सकते हैं, जिन्होंने इसी लत से पीछा छुड़ाने के लिए शादी का सहारा लिया था. लेकिन बाद में क्या हुआ? उनकी लत तो नहीं छूटी बल्कि उनकी शादी ज़रूर टूट गई.

इसलिए अभी भी समय है, दूसरों की गलतियों से सीखने की कोशिश करिए, क्योंकि खुद की गलती से सीखने में बहुत ज्यादा नुकसान हो जाएगा.

इस नुकसान से बचने से पहले हमें ये भी जान लेना चाहिए कि पॉर्न देखने की लत में भारतीय पुरुष भी पीछे नहीं हैं. विश्व की सबसे बड़ी पोर्न वेबसाइट पोर्नहब के यूजर्स में हम भारतीय तीसरे नंबर पर आते हैं. ऐसा केवल हम अपने मन से नहीं कह रहे हैं, बल्कि पॉर्न वेबसाइट का डेटा खुद हमारी इस लत की गवाही दे रहा है.

‘साल 2020 में, पोर्नहब ने भारत में 6597 पेटाबाइट डेटा ट्रांसफर किया, जो लगभग 18,073 टेराबाइट प्रति दिन और 209 गीगाबाइट प्रति सेकंड था!’ भारत में 31 वर्ष तक के हर 10 में से 7 पुरुष पोर्न फिल्मों को देखना पसंद करते हैं.

और ये नम्बर्स लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इसका मतलब साफ़ है कि संकट हमारे सामने खड़ा हुआ है.

क्या हम इसका सामना कर पाएंगे?

इस सवाल का जवाब तो केवल “sexual detox” के पास ही मिलेगा. लेकिन लत के बारे में बात करते हुए लेखक कहते हैं कि “pornography देखना या फिर उसका शौक रखना किसी की पर्सनल च्वाइस हो सकती है. इस बात में कोई दो राय भी नहीं होनी चाहिए लेकिन ज़रूरी बात ये है कि, दूसरों को सेक्स करते देखकर अगर आपकी मेंटल हेल्थ पर नेगेटिव असर पड़ने लगे तो ये खतरनाक हो सकता है, बल्कि ये बहुत अधिक खतरनाक हो सकता है. ये केवल आपके लिए ही खतरनाक नहीं है बल्कि आपकी शादी, परिवार और इस दुनिया के लिए भी खतरनाक है.

सबसे पहले आपको ये पता होना चाहिए कि pornography एडिक्शन एक व्यक्ति को porn पर emotional रूप से इस हद तक depend करता है कि ये आदत उसकी रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी, रिश्तों, सेक्स करने की क्षमता को भी बुरी तरह से बिगाड़ कर रख देती है. इसलिए इस बात को समझ लीजिए कि ये लत बिल्कुल भी आम सी बात नहीं है.

यहाँ तक कि कुछ डॉक्टर porn एडिक्शन को हाइपरसेक्शुअल डिसऑर्डर भी मानते हैं. इस के रेंज में बहुत ज्यादा pornography देखना और मास्टरबेट करने जैसी आदतों को शामिल किया जाता है. हालाँकि, इस तरह के टॉपिक्स आज तक कई देशों में टैबू की तरह लिए जाते हैं. इन टॉपिक्स पर लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते हैं.

अगर आपको या फिर आपके जान पहचान में किसी को भी pornography एडिक्शन है. तो उसे सावधान होने को कह दीजिए. साथ ही साथ उसे ये भी बता दीजिए कि उसे जल्द से जल्द “sexual detox” को अपना लेना चाहिए.

इस पहलू में “sexual detox” को समझने के लिए, सबसे पहले आपको खुद को बताना होगा कि pornography में जो दिखाया जाता है. वो रियल सेक्स बिल्कुल नहीं है. सेक्स और pornography में ज़मीन-आसमान से भी बड़ा अंतर है. इसलिए आज से ही अपनी पत्नी से pornstar वाली उम्मीदें करना बंद कर दीजिए.

सेक्स को लेकर लेखक सलाह देते हैं कि “आज से ही खुद को समझा दीजिए कि सेक्स स्पीरिचुअल थिंग है. और pornography एक स्क्रिप्टेड फॉर्मेट की फिल्म है. जिसे सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाने के लिए बनाया जाता है. इस फिल्म का रियल्टी से कोई मतलब नहीं है.”

सेक्स डिटॉक्स का मतलब है कि सेक्सुअल वीडियोज़ या आर्टिकल से पूरी तरह से दूरी बना लें, इससे आपकी सेक्स को लेकर समझ बढ़ेगी और आप बेहतर ऑर्गेज़्म, बेहतर सेक्स का आनंद उठा पाएंगे. लेकिन याद रखिएगा कि वो बेहतर सेक्स आपको अपनी पत्नी या पार्टनर के साथ ही करना है.

इन सभी बातों के साथ आपको ये भी समझना होगा कि आज के समय में porn से खुद को दूर रख पाना ही एक बैटल की तरह है. इस बैटल से लड़ने के लिए आपको एक योद्धा जैसा एटीट्यूड लेकर आना पड़ेगा. इसी के साथ बता दें कि ये एक ऐसी लड़ाई है. जो कि कभी खत्म नहीं होने वाली है. इसलिए खुद को कंट्रोल करने की पॉवर को पैदा करिए और पेशंस के साथ लाइफ को एन्जॉय करने की कोशिश करिए.

लेकिन इन सबके बीच “sexual detox” पूरी तरह से रियल चीज़ है. लेकिन ये कोई आसान काम नहीं है. इसके लिए भी काफी समय और मेहनत लगती है. और ये एक ऐसी चीज़ है, जिसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. ये कोई मैजिक बुलेट नहीं है बल्कि एक तपस्या की तरह है. जिसे आपको अपनी लाइफ बदलने के लिए करना होगा.

जैसे-जैसे आप “sexual detox” की प्रोसेस में आगे बढ़ते जाएंगे, वैसे- वैसे ही आपकी बॉडी में ट्रांसफॉर्ममेशन होने की भी शुरुआत हो जाएगी. आप खुद पॉजिटिव एनर्जी को फील करने लगेंगे. लेकिन detox एक पूरी प्रोसेस है. आपको इस प्रोसेस पर विश्वास करना होगा.

सेक्स डिटॉक्स के जरिए सेक्स को लेकर प्रेशर में कमी आती है, जैसे कि हो सकता है कि किसी रिलेशनशिप में सेक्स एक के लिए प्रेशर हो और एक लिए प्लेजर. इस तरह के रोमांटिक रिश्ते ज्यादा समय के लिए नहीं टिक सकते हैं.

हो सकता है कि आप दोनों में से कोई एक पार्टनर सेक्सुअल प्रॉब्लम से गुजर रहा हो. विशेषज्ञों की मानें तो सेक्स डिटॉक्स के जरिए आप दोनों एक दूसरे की सेक्सुअल प्रॉब्लम से अच्छे से वाकिफ होकर, उस प्रॉब्लम को जड़ से खत्म करने की कोशिश कर सकते हैं. एक साथ ट्राय करने से इंसान किसी भी प्रॉब्लम को खत्म कर सकता है. इसलिए अपने रिश्ते को बचाने के लिए जो कुछ भी हो सके वो करने की कोशिश करिए. और अगर आप porn की लत में हैं तो जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी “sexual detox” की प्रोसेस शुरू करिए.

अब बात एक टैबू की होगी.. जिसका नाम ‘masturbation’ है

क्या नौजवान और क्या बूढ़े, यहाँ सब बराबर हैं.. पॉर्न के दरबार में सभी फंसते जा रहे हैं. अब एक सच्चाई आने वाली है, जो कि काफी बुरी और घिनौनी है. लेकिन सच है. वो ये है कि पॉर्न के दरबार में यानि इंडस्ट्री में जिस्म की क़ीमत आँकी जाती है. उस कीमत के हिसाब से पोर्न स्टार्स को पैसे दिए जाते हैं. और इस कीमत को आंकने में pornography को कन्ज्यूम करने वालों का बहुत बड़ा योगदान होता है.

मतलब साफ़ है कि pornography एक तरह से जिस्मफरोशी ही है. और वो सभी जो इसे कंटेंट के तौर पर कन्ज्यूम कर रहे हैं. कहीं ना कहीं इसमें अपना योगदान भी दे रहे हैं.

इसलिए लेखक कहते हैं कि अब समय porn industry को करीब से जानने का आ गया है. पोर्न इंडस्ट्री के बचाव में कई लोग कहते हैं कि इस इंडस्ट्री में काम करने वाली औरतें अपनी चॉइस से आती हैं.

आपको बता दें कि इन्हीं सब बातों से दुनिया में ये झूठ भी फैल गया है कि औरतें पोर्न इंडस्ट्री को अपनी पसंद से ज्वाइन करती हैं.

लेकिन कई ये बात पूरी तरह से सच है?

इस बारे में बात करते हुए जानी मानी legal scholar catharine a. mackinnon कहती हैं कि “इसको आप prostitution यानि जिस्म फ़रोशी के धंधे से समझ सकते हैं. ज़िस्म फरोशी एक ऐसा काम है, जिसमें इंसान को अपनी आत्मा को बेचना पड़ता है. इस काम के लिए औरतों को घर चलाने के लिए किसी के भी साथ बेड रूम साझा करना पड़ता है.

इस काम को करने वाली औरतों के मन की इच्छा को कोई देखना नहीं चाहता है. जिस तरह औरतें prostitution की दुनिया में आती हैं. मसलन इस फील्ड में वो अपनी चॉइस से नहीं आती हैं बल्कि चॉइस की कमी की वजह से आती हैं. ठीक इसी तरह अधिकत्तर औरतें पोर्न इंडस्ट्री में भी अपनी चॉइस की वजह से नहीं आती हैं. बल्कि उनके पास लाइफ को चलाने के लिए सही चॉइस नहीं बचती है. इसलिए वो लोग इस फील्ड में आती हैं.

इसलिए पोर्न इंडस्ट्री को women empowerment से जोड़ना बिल्कुल गलत है. हाँ, ये बात भी सच है कि अगर आप वक्त को पीछे करके देखेंगे तो कुछ पोर्न स्टार के इंटरव्यू मिल जाएंगे. जिन्होंने अपनी इस जर्नी को चॉइस से जोड़ा था. लेकिन नम्बर्स बहुत ही ज्यादा कम हैं. केवल कुछ ही लोग इस फील्ड में अपनी मर्जी से आए होंगे.

mackinnon आगे बात करते हुए कहती हैं कि pornography में काम करने वाली अधिकत्तर लड़कियों का बैक ग्राउंड काफी ग़रीबी वाला होता है. इसी के साथ जो लोग भी pornography के बचाव को फ्री चॉइस से जोड़ देते हैं.

उन्हें इस फैक्ट को समझने की कोशिश करनी चाहिए कि कोई भी बिना कपड़े के अपनी टांगों को कैमरे के सामने खोलना नहीं चाहता है. वो ऐसा कर रहा है या कर रही है तो उसके पीछे उसकी मज़बूरी ही है. “कई कैमरों के सामने टांगों को खोल देना कभी भी फ्री चॉइस नहीं हो सकती हैं..”

जैसे-जैसे हम pornography को करीब से समझते जाएंगे, तो हमें पता चलेगा कि इसमें सेक्स स्लेवरी को प्रमोट किया जाता है. इस सेक्स स्लेवरी को आदमियों के द्वारा कंट्रोल किया जा रहा है. जहाँ औरतों की बॉडी को पनिश करते हुए सेक्स किया जाता है. इस सेक्स को केवल प्रॉफिट जनरेट करने के लिए किया जाता है. मतलब सिम्पल सी बात ये है कि pornography में लड़कियों की बॉडी को पैसा कमाने के लिए यूज किया जाता है.

लेखक ने एक बार फेमस पोर्न स्टार के साथ इंटरव्यू किया था. उन्होंने ऑफ़ द रिकॉर्ड लेखक से बताया था कि “पोर्न फिल्म की शूटिंग के बाद उनके गले से खून निकलने लगता था. उनके पूरे शरीर में चोट के निशान बन जाया करते थे. प्राइवेट पार्ट्स से भी खून आने लगता था. वो पूरी शूटिंग किसी टॉर्चर से कम नहीं होती थी..”

दूसरी पोर्न स्टार ने लेखक से कहा था कि “कई बार तो मैं इतना थक जाती थी कि मुझे कुछ समझ में ही नहीं आता था. ऐसा कई बार हुआ है जब मैं मेल पोर्न स्टार से भीख मांगती थी कि प्लीज़ टॉर्चर करना बंद कर दो.. आप विश्वास नहीं करेंगे लेकिन पोर्न फिल्मों की शूटिंग हमारे लिए किसी रेप की तरह होती है. हमें हर शूटिंग में टॉर्चर से होकर गुज़रना पड़ता है.”

अब आप खुद सोचिए कि आप इसी pornography को सेक्स की रियलटी समझ लेते हैं. इसलिए आपको बार-बार बताने की कोशिश की जा रही है कि पोर्न और रियल सेक्स का आपस में कोई मेल जोल नहीं है.

इसलिए आपको आज से ही समझ लेना चाहिए कि pornography एक ऐसी इंडस्ट्री है. जो कि औरतों की कमज़ोरी का अपनी प्रॉफिट के लिए फायदा उठाती है. इसलिए किसी को भी इस इंडस्ट्री के लत में नहीं फंसना चाहिए.

लेकिन एक सवाल कई लोगों के मन में आता है कि क्या pornography में जो लड़कियां एक्ट करती हैं, क्या वो एन्जॉय भी करती हैं?

इसको समझने के लिए आपको ‘lainie speiser’s की लिखी किताब “confessions of the hundred hottest porn stars..” से होकर गुज़रना होगा. उस किताब में porn industry में काम करने वाली लड़कियों की ऑफ स्क्रीन लाइफ को भी कवर किया गया है.

लेखक इस किताब की कुछ बातें आपको बताना चाहते हैं. किताब “confessions of the hundred hottest porn stars..” में ज़िक्र किया गया है कि sasha grey ने 18 साल की उम्र में पोर्न इंडस्ट्री में एंट्री ली थी. पोर्न इंडस्ट्री में उन्हें एक साल भी नहीं हआ था और वो काफी ज्यादा फेमस हो चुकी थी. उन्हें कई avn adult movie awards भी मिल चुके थे. दो साल के अंदर sasha grey को बेस्ट pornographic magazine genesis ने अपने कवर पेज में जगह भी दे दी थी.

sasha grey मैगजीन को दिए अपने इंटरव्यू में बताती हैं कि पोर्न इंडस्ट्री में आने के लिए उन्होंने टैलेंट एजेंट mark spiegler को एक काफी लंबा चौड़ा मेल किया था. उस मेल में उन्होंने बताया था कि वो पोर्न सीन के लिए किस- किस सी न्यू पोजीशन में सेक्स करेंगी?

कई साल इंडस्ट्री में बिताने के बाद sasha grey कहती हैं कि “मैं लोगों को वही दिखाना चाहती हूँ, जिससे मैं प्यार करती हूँ. मैं जो भी करती हूँ, मुझे उससे प्यार है. मुझे हार्ड कोर सेक्स बहुत ज्यादा पसंद है. इसलिए मैं इस इंडस्ट्री में आई हूँ.

इसी तरह पोर्न इंडस्ट्री में mia rose भी काम करती हैं. वो पोर्न इंडस्ट्री के बारे में बात करते हुए कहती हैं कि “मैं पोर्न इंडस्ट्री में आने से पहले ही 98 आदमियों के साथ सेक्स कर चुकी थी. इसलिए कैमरे के सामने सेक्स करना मेरे लिए कोई बड़ी डील नहीं थी. मैं अपने आपको sexaholic समझती हूँ. जिसका सीधा सा मतलब है कि मैं बिना ज्यादा सेक्स के जिन्दा ही नहीं रह सकती. इसलिए मैंने इस इंडस्ट्री को सेलेक्ट किया क्योंकि इतना ज्यादा सेक्स और पैसा मुझे कहीं और नहीं मिल सकता था.”

इन दोनों पोर्न स्टार के कन्फेशन से इतना तो क्लियर हो चुका है कि सभी लड़कियां पोर्न इंडस्ट्री में मज़बूरी में नहीं आती हैं. कई लड़कियां इसलिए भी आती हैं क्योंकि उन्हें सेक्स बहुत ज्यादा पसंद होता है. लेकिन इस तरह की लड़कियां इस प्रोफेशन में बहुत कम हैं.

dr. sharon mitchell जो कि adult industry medical healthcare foundation (aim) की को फाउंडर हैं. वो अपनी क्लीनिक में पोर्न एक्ट्रेसेस को रेगुलरली देखती रहती हैं. वो बताती हैं कि pornography की तरफ आने वाली तीन तरह की लड़कियां होती हैं.

पहली ऐसी जिन्हें सेक्स का एडिक्शन होता है, दूसरी ऐसी जिन्हें पैसों का एडिक्शन होता है, और तीसरी ऐसी जिन्हें फेम का एडिक्शन होता है. इसके बाद भी कुछ लड़कियां होती हैं, जो कि किसी परेशानी की वजह से आ जाती हैं.

ये तीनों ही रीज़न सुनकर आपको अजीब सा लग सकता है. लेकिन ये कारण किसी आम इंसान ने नहीं बताए हैं. बल्कि रोज़ पोर्न स्टार्स से मिलने वालीं डॉक्टर ने बताए हैं. इसलिए हमें इन रीज़न पर गौर करना चाहिए.

अगर आपके मन में सवाल आ रहा हो कि पोर्न इंडस्ट्री में कितना पैसा मिलता है? तो आपको बता दें कि एक सेक्स सीन के लिए लड़कियों को 700 से लेकर 1200 डॉलर तक पे किया जाता है. पोर्न स्टार diane sawyer ने साल 2003 में कहा भी था कि जब मैं पोर्न इंडस्ट्री में आ रही थी तो मेरे दिमाग में केवल और केवल पैसा ही था.

इसलिए जब हम पोर्न इंडस्ट्री को बारीकी से जानने का काम कर रहे हैं. तो हमें पता होना चाहिए कि इस इंडस्ट्री में लड़कियों के आने का सबसे बड़ा कारण पैसा भी है. क्योंकि यहाँ आने से पहले लड़कियों को ऐसा लगता है कि वो यहाँ पैसा बड़ी आसानी से कमा सकती हैं? लेकिन उन्हें पता भी नहीं होता है कि वो अपनी लाइफ को नर्क की तरह बनाने वाली हैं.

porn industry के बारे में आगे बात करते हुए लेखक कहते हैं कि पोर्न फिल्म के सेक्स को आप रियल सेक्स से कम्पेयर नहीं कर सकते हैं. क्योंकि पोर्न फिल्म्स पूरी तरह से स्क्रिप्टेड होती हैं. एक छोटी सी फिल्म को फिल्माने में काफी ज्यादा समय खर्च करना पड़ता है.

आपको बता दें कि फिल्म की शूटिंग भी घंटों चलती है जिसका पूरा सेट होता है, कैमरा होते हैं, टेक्नीशियन होते हैं, मेकअप के लोग होते हैं.

पोर्न इंडस्ट्री में काम करने वाले मेल एक्टर्स के लिए भी चुनौतियाँ कम नहीं होती हैं. शूटिंग के दौरान जब भी कोई रुकावट आती है जैसे कि सिनेमैटोग्राफर कैमरा सेट करने लगे या दूसरी टेक्नीकल चीजें हो रही हों. तब एक्टर उसी सेक्स पोजीशन में इंतजार करना पड़ता है. उस दौरान मेल एक्टर को इरेक्टेड ही रहना होता है.

सुनने में भले ही ये काम आसान लगता हो, लेकिन एक ही पोजीशन में रहना कभी भी आसान नहीं होता है. कई एडल्ट फिल्मों का हिस्सा रहे और फिर डायरेक्शन में हाथ अजमाने वाले सेमूर बट्स ने इस बारे में लेखक से कहा है कि “पोर्न इंडस्ट्री में केवल लड़कियों का ही फायदा नहीं उठाया जाता है. बल्कि मेल एक्टर्स को भी काफी परेशान किया जाता है. उन्हें एक मशीन की तरह यूज किया जाता है. मेल पॉर्न स्टार को लंबे समय तक इरेक्शन के लिए परेशान किया जाता है. इसके लिए उन्हें कई तरह के ड्रग भी दिए जाते हैं. जिसका बुरा असर उनकी सेक्स लाइफ में पड़ने लगता है.

इसी के साथ उन्हें प्राइवेट पार्ट्स के साइज़ के लिए भी काफी परेशान किया जाता है. ये सब बातें सुनने में अच्छी नहीं लगती होंगी लेकिन ये बातें पोर्न इंडस्ट्री की सच्चाई बयाँ करती हैं. फिल्म के प्रोड्यूसर्स मेल एक्टर्स पर दबाव डालते हैं कि वो पूरी शूटिंग के दौरान यानि 4-5 घंटे तक इरेक्शन को मेंटेन रखने की कोशिश करें. अब आप खुद सोचिए कि क्या ये किसी नार्मल इंसान के लिए मुमकिन है?..”

आगे बताते हुए पोर्न फिल्म डायरेक्टर सेमूर बट्स कहते हैं कि “फिमेल स्टार्स को भी सख्त चेतावनी दी जाती है कि उन्हें फिल्म की शूटिंग के 6 घंटे पहले से कुछ खाना नहीं है. भले ही इस शूटिंग में कितनी भी एनर्जी खत्म करनी पड़े?

इसी के साथ इन फिल्मों का कई घंटों का शूट चलता है और सेक्सुअल एक्ट भी कई तरह के होते हैं और उत्तेजना के दौरान शरीर की पूरी ऊर्जा शरीर के निचले हिस्से में जाती है. इसके अलावा डायरेक्टर कहते हैं कि आज के समय में तो एक्ट्रेसेस को ब्लो-जॉब के लिए भी प्रेशर में डाला जाता है. इसकी फ्रिक्वेंसी इतनी ज्यादा होती है कि एक्ट्रेसेस के गले से खून तक आने लगता है

लेखक कहते हैं कि आज के समय में दुःख तो तब होता है. जब आज कल के लड़के इस तरह के वीडियो से ब्लो जॉब को रियल मानने लगते हैं. इसकी वजह से वो अपने बेड रूम को भी पोर्न स्टूडियो बना देना चाहते हैं.

पोर्न वेबसाईट की वजह से लड़के चाहने लगे हैं कि उनकी प्रेमिका या पत्नी पोर्न स्टार की तरह बिहेव करें. इसी वजह से आज के समय में नई-नई शादियाँ भी टूटने लगी हैं. पोर्न की वजह से ये एक बहुत बड़ी दिक्कत सामने आई है.

लेकिन इस दिक्कत को खत्म करने के लिए ज़रूरी है कि हमें पोर्न इंडस्ट्री के बारे में पूरी बात पता हो.. इसी मोटिव के साथ इस किताब को लिखा गया है.

हमें समझने की कोशिश करनी चाहिए कि पोर्न इंडस्ट्री एक बिजनेस मॉडल है, इसमें लड़की और लड़कों का शोषण किया जाता है. जिस शोषण की वजह से व्यूज आते हैं और इंडस्ट्री में पैसा लगाने वाले लोग पैसा कमाते हैं. अगर आप पोर्न की लत में फंसे हुए हैं तो समझ जाइए कि वो लोग आपके दिमाग के साथ खेलकर पैसा कमा रहे हैं. क्या आप अभी भी उन्हें अपने दिमाग के साथ खेलने देना चाहते हैं? ये फैसला आपको ही करना होगा. अगर आपका फैसला पॉजिटिव दिशा में है तो इस किताब की समरी आपकी बहुत ज्यादा मदद करेगी.

अब “masturbation” की बात करते हैं.. ये एक ऐसा टर्म है जिसका काफी ज्यादा हाईप भी है और इसके बारे में लोग बात करने से कतराते भी हैं. लेखक एक बार फिर से 90 के दशक को याद करते हुए अपने टीनेज के दिनों को याद करते हैं. और कहते हैं कि “हम सभी ने बचपन का दौर देखा है और हमें बहुत कुछ याद भी है.. उन्हीं यादों को निहारने के बाद हमें याद आता है कि उन दिनों हम लोग न्यूज़पेपर और मैग्ज़ीनों में एक कॉलम अपने घरवालों से छुपकर ज़रूर पढ़ा करते थे.

‘निज़ी बातें’ या फिर कुछ और नाम रहता होगा.. इन कॉलम्स में घर, परिवार, रिश्तों और सेक्स से जुड़ी बातें की जाती थीं और उनकी problems के बारे में भी डिस्कशन होता था.

इन आर्टिकल्स में लोगों के सवालों के जवाब भी दिए जाते थे.. इनमें अक्सर एक खास टाइप का सवाल नज़र आता था जो अलग-अलग लोग किया करते थे. ये सवाल होते थे सेक्स या हस्तमैथुन (masturbation) से जुड़े हुए, मतलब साफ़ है कि लोगों को हमेशा से इस टॉपिक के बारे में जानना रहा है. लोग बारीकी से masturbation के बारे में जानकारी चाहते थे और इनसे होने वाले फायदों और नुकसानों के बारे में भी जानना चाहता थे.

वैसे तो वो 90 का दशक था, आज के बच्चे कह सकते हैं कि तब पुरानी सोच के लोग हुआ करते थे. लेकिन मास्टरबेशन के बारे में बात करना अभी भी हमारे देश या तो कहें डेवलपिंग कंट्रीज में हव्वा ही है. आम विचारधारा में इसे गलत और गन्दा काम समझा जाता है. कोई इसे ‘बचपन की गलतियां’ कहता है तो कोई ‘खुद पर अत्याचार’ करना भी कहता है. कई लोग तो इसे सेक्स रोग से भी जोड़ देते हैं.

masturbation एक ऐसा टॉपिक है जिसके बारे में फैक्ट्स से ज्यादा अफवाहों का बाज़ार गर्म रहता है. लेखक कहते हैं कि ऐसी ही एक अफवाह का सामना उन्हें भी करना पड़ा था. बात कुछ ऐसी है कि-

“जब वो 11वीं क्लास में पहुंचे थे, तब अचानक से एक उनके बारे में एक अफवाह उड़ी थी. उस अफवाह की वजह से क्लास के लड़कियों के सामने भी उनका मज़ाक बन गया था. वो अफवाह कुछ ऐसी थी कि लेखक tim challies हफ्ते में कई बार “masturbate” करते हैं. हालाँकि, इस अफवाह में सच्चाई नहीं थी. लेकिन इस बात से उन्हें काफी परेशानी हुई थी.”

लेकिन बाद में उन्हें james dobson नाम के मेंटर ने बताया कि “इस दुनिया में 95 टू 98 परसेंट लड़के “masturbate” करते हैं. और जो लोग ये बोलते हैं कि वो “masturbate” नहीं करते, समझ लो कि वो झूठ बोलते हैं.”

james dobson की इस बात से तब लेखक को कुछ सुकून मिला था और उन्होंने इन अफवाहों पर ध्यान देना ही बंद कर दिया था.

लेकिन फिर भी हमें “masturbation” के बारे में कई मिथ से होकर गुज़रना ही पड़ता था. हैरानी की बात तो ये है कि आज के समय में भी इस तरह के मिथ चल रहे हैं. उनमें से कुछ इस तरह के हैं, आपको कई लोग कहते मिल जाएंगे कि “masturbation” की वजह आँखों की रोशनी चली जाती है? कई ऐसा भी कहते हैं कि “masturbation” की वजह से वजन कम हो जाता है? तो कई लोग “masturbation” को पागलपन की वजह भी बता देते हैं.

लेकिन आपको फैक्ट्स के बारे में पता होना चाहिए, “masturbation” के बारे में इस तरह की बातें पूरी तरह से गलत है. क्योंकि अगर ये सही होतीं तो दुनिया के 95 परसेंट जनता अंधी हो चुकी होती. क्योंकि इस बात पर डिबेट हो सकती है कि “masturbation” सही है या गलत? लेकिन इसे आमतौर पर सभी ने कभी ना कभी किया ज़रूर है. और यही सच्चाई है लेकिन हम इस सच्चाई को मानना नहीं चाहते हैं.

दोस्तों, “masturbation” जैसे टॉपिक के ऊपर फैली तरह-तरह की कहानियां बताती हैं कि हमारे देश में सेक्स को लेकर कितनी कम बातें होती हैं? ये कहना गलत नहीं होगा कि इस देश की बात छोड़िये, सेक्स तो अभी दुनिया की नज़रों में भी टैबू बना हुआ है. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि हमारे पास इसके बारे में सही और सटीक जानकारी होनी चाहिए.

कई लोग मानते हैं कि मास्टरबेशन से मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं, लेकिन ये बात पूरी तरह से गलत है. साइकोलॉजी में कई रिसर्च हुई हैं जो कहती हैं मास्टरबेशन के दौरान आपके दिमाग में हैप्पी हॉर्मोन निकलते हैं.

अगर हमारे पास सेक्स और “masturbation” जैसे टॉपिक्स पर सही जानकारी होगी, तो कम से कम हमारी आने वाली पीढ़ी के पास भी सही
जानकारी ट्रांसफर होगी. उन्हें ये सुनने को तो नहीं मिलेगा कि “बच्चे जादू से पैदा होते हैं… सबको पता होना चाहिए कि किसी का भी जन्म कैसे होता है?

लेखक कहते हैं कि अगर हम लोगों को “masturbation” की theology अच्छे से नहीं पता रहेगी. तो हम सेक्स को पूरी तरह से समझ ही नहीं पाएंगे. हमारे दिमाग में सेक्स का कांसेप्ट सही से समा सके, इसलिए हमें “masturbation” की theology के बारे में पता होना ज़रूरी है. इस टॉपिक को कवर करने का दूसरा रीज़न ये है कि इस दुनिया के हर मर्द का सामना अपनी लाइफ में “masturbation” से ज़रूर होता है.

ये बात पूरी तरह से सच है कि आज तक हमारे पास “masturbation” के बारे में सही जानकारी नहीं थी. इसलिए ये टॉपिक लोगों के लिए शेम और गिल्ट का सब्जेक्ट बनकर रह गया है. आपको पता होना चाहिए कि अगर आपने कभी “masturbate” कर भी लिया है. तो भी आपको गिल्ट में रहने की कोई ज़रूरत नहीं है. आपने खुद के साथ कोई जुर्म नहीं किया है. ना ही इसकी सज़ा आपकी बॉडी को मिलने वाली है.

इसी के साथ आपको ये भी पता होना चाहिए कि पूरी दुनिया में “masturbation” को सही या गलत ठहराने के लिए डिबेट होती रहती है. कई तो सोशल मीडिया में पेज भी बन गए हैं. जहाँ इसे सही या ग़लत बोला जाता है. लेकिन हमें समझना चाहिए कि कई बार सिचुएशन सही और ग़लत के बीच में भी छुपी हुई होती है. बस, हमें उसे देखने के लिए सही नज़रिए की ज़रूरत पड़ती है.

इसलिए हम इस डिबेट में नहीं पड़ेंगे कि “masturbation” सही है या ग़लत? हम बीच का रास्ता देखने की कोशिश करते हैं. इसके लिए हमें लेखक bill perkins के कोट्स को पढ़ना और समझना होगा. उन्होंने perkins test बताया था, जिसमें उन्होंने “masturbation” को तीन कंडीशन में गलत बताया था. perkins test में पहली कंडीशन के लिए कहा गया है कि “अगर आप मास्टरबेट inappropriate fantasies के साथ करते हैं तो वो ग़लत हो सकता है. अब सवाल ये उठता है कि सही फैंटेसीज़ क्या होती है? इसके बारे में bill perkins कहते हैं कि आदमियों को केवल अपनी पत्नी या पार्टनर के बारे में ही सोचकर मास्टरबेट करना चाहिए.”

perkins test में दूसरी कंडीशन के लिए कहा गया है कि “अगर “masturbation” नशा या लत बन जाता है तो वो गलत है. मतलब साफ़ है कि आपको मास्टरबेशन को कंट्रोल करना है. ना कि मास्टरबेशन आपको कंट्रोल करने लगे..”

perkins test में तीसरी कंडीशन के लिए कहा गया है कि “masturbation” तब भी ग़लत जब आप इसकी वजह से अपनी पार्टनर की सेक्सुअल नीड्स को पूरी नहीं कर पा रहे हैं. मतलब साफ़ है कि आप अपने पार्टनर के साथ सेक्स नहीं करते हैं. और अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए मास्टरबेशन का सहारा ले लेते हैं.”

आपको बता दें कि bill perkins के अलावा dr. dobson, जो कि जाने माने लेखक भी हैं. उन्होंने भी मास्टरबेशन को नॉर्मल ही कहा है. उनके हिसाब से जब लड़के जवानी की दहलीज में पहुँचते हैं. तो ये सब चीजें आम सी बात हो जाती हैं. ऐसा हो सकता है कि उन्होंने ऐसा इसलिए कहा हो क्योंकि करीब-करीब सभी लोग “masturbation” का सहारा लेते हैं. इसलिए जो चीज़ ज्यादा लोग करने लगते हैं. धीरे-धीरे वो चीज़ नॉर्मल बन जाती है.

इसलिए हमें ध्यान रखना चाहिए कि अच्छाई और बुराई के बीच में कई बार काफी बारीक सी लाइन होती है. इसलिए किसी भी चीज़ में इतना भी नहीं खो जाना चाहिए. कि वो चीज़ आपकी आदत बन जाए.. मतलब साफ़ है कि भले ही मास्टरबेशन आपके शरीर को नुकसान ना पहुंचा रहा हो, फिर भी इसकी आदत नहीं बनानी चाहिए. सिम्पल सा रूल अपना लीजिए, किसी भी चीज़ को बस अपनी ज़रूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करिए.

“ज़रूरत से ज्यादा किया गया कोई भी काम बुरा हो सकता है..’

इसलिए आगे से इस लाइन को याद रखने की कोशिश करिएगा. ये बात भी पूरी तरह से सच है कि लाइफ में ख़ुशी का एक पैमाना sexual gratification से भी होकर गुज़रता है. लेकिन हमें समझना चाहिए कि सही sexual gratification केवल और केवल शरीर का खेल नहीं है. इसका बहुत ज्यादा रिश्ता इंसानी दिमाग से भी है.

इसलिए पॉर्न की लत पालकर मास्टरबेशन के चक्कर में फंसने से बचिएगा. अगर आप पॉर्न के चक्कर में फंस जाएंगे तो आप कभी भी sexual gratification को हासिल नहीं कर पाएंगे. हमें समझना चाहिए कि पॉर्न की लत हमारे दिमाग के साथ खेलती है. पॉर्न की पूरी डिजिटल दुनिया को तैयार ही इसलिए किया गया है. कि जवान लोग दिमागी तौर पर इसके गुलाम बनते जाएँ, इसलिए बहुत ज़रूरी है कि हम अपने दिमाग की पॉवर को समझें और खुद को इस तरह की चीज़ों को दूर करने की कोशिश करें.

दुःख तो तब होता है जब ज्यादातर बच्चों को अपने दिमाग की पॉवर के बारे में पता ही नहीं होता है. उन्हें पता ही नहीं होता है कि कम्प्यूटर से भी तेज मशीन उनके शरीर के पास है. वो इस मशीन की मदद से लाइफ में कुछ भी हासिल कर सकते हैं. ज़रूरत है तो बस इस बात की, वो अपनी मशीन को पॉवर को समझने की कोशिश करें.

लेखक कहते हैं कि “इंसानी brain एक दुनिया की तरह है, इसे समझना और इसकी कहानी को याद रखना इतना आसान नहीं है. लेकिन हम अपने दिमाग की देखभाल करके, सफलता की हर उचाईयों को छू सकते हैं. उसके लिए ज़रूरी है कि हम अपने दिमाग के बारे में अच्छे से पता करें और उसे मज़बूत बनाने की रोज़ कोशिश करें. ”

इसे अगर थोड़ा और बारीकी से समझने की कोशिश करें तो अभी तक हम सोचते रहे हैं कि अगर हम हमेशा concious नहीं रहेंगे तो हम गलतियाँ करते रहेंगे, लेकिन दुनियाभर में हुई study तो अलग ही कहानी बयाँ करती है.

study के हिसाब से हमारी गलतियों के कम होने में concious दिमाग का कोई role नहीं है. बल्कि ज्यादा समय तक concious रहने से ज्यादा गलतियाँ होने लगती हैं. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि हम free रहना सीखें, ऐसा करने से हमें ना past का पछतावा होगा और ना ही भविष्य की चिंता सताएगी.

मनोविज्ञान में हुई research में भी ये निकलकर सामने आया है कि “हम जितना समझते हैं, subconcious mind उससे कई गुना ज्यादा ताकतवर है. इसलिए scientist ‘s ने दिमाग के इस हिस्से को “game changer factor” भी कहा है. उनका मानना है कि अगर किसी ने दिमाग के इस हिस्से को समझ लिया तो वो अपने जीवन को पूरी तरह से बदल सकता है.”

इसलिए हमें अपने दिमाग को समझने की कोशिश करनी चाहिए, इसे समझकर हम pornography की लत से पूरी तरह से बाहर निकल सकते हैं.

जैसे-जैसे आप अपने दिमाग से दोस्ती करते जाएंगे, आप सेक्सुअल DETOX को भी समझते जाएंगे.

इतनी बातों के बाद भी मास्टरबेशन से जुड़ी एक बात रह गई, जिसके ऊपर थोड़ी सी रोशनी डालनी ज़रूरी है. वो ये है कि क्या आपको मास्टरबेशन करना छोड़ देना चाहिए?

इसका सही जवाब आपके अलावा कोई और नहीं दे सकता है. खुद से सवाल करिए कि क्या आप मास्टरबेशन करना छोड़ना चाहते हैं? अगर आप छोड़ना चाहते हैं तो आज से ही अपने दिमाग के ऊपर कंट्रोल करने की शुरुआत कर दीजिए. छोड़ने की टिप्स चाहिए तो आप योग, मेडिटेशन या फिर अध्यात्म की ओर अपना ध्यान लगा सकते हैं. ऐसा करने से आपके दिमाग में एक पॉजिटिव एनर्जी जाएगी. जिसकी मदद से धीरे-धीरे ही सही लेकिन ये आदत आपकी छूट जाएगी.

अगर आप नहीं छोड़ना चाहते हैं तो कोशिश करिए कि इससे आपके पार्टनर को कोई दिक्कत ना हो और इसकी आपको लत ना लगे…

Sexual Detox

चलिए अब वक्त आ चुका है कि हम सेक्स के बारे में और ज्यादा खुलकर बातें करें

लेखक ने इस किताब को लिखने से पहले बहुत से लड़के-लड़कियों से मुलाक़ात की थी. इस दौरान उनकी मुलाक़ात एक ऐसी लड़की से भी हुई थी. जिससे उनकी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी.

उस लड़की ने लेखक से कन्फेशन करते हुए बताया था कि “वो porn कई सालों से देख रही है और उसकी करीब-करीब हर फीमेल दोस्त भी porn देखती हैं. उसने आगे बताते हुए कहा था कि porn में समां है, संगीत है, शराब है और साकी भी है. जिसकी मदद से उनके शरीर और मन को सुकून मिलता है. उनके दिमाग में एक अजीब सी लहर दौड़ती है. जो कि भले ही कुछ समय के लिए हो लेकिन उन्हें सुकून देकर जाती है..”

आगे बताते हुए लड़की कहती है कि शायद उसकी लाइफ में ये porn एक लत बन गई है और ये उसके दिमाग और शरीर के लिए खतरनाक भी साबित हो रही है. लेकिन वो इस लत को छोड़ नहीं पा रही है..”

ये सुनकर लेखक को काफी दुःख हुआ कि इस उम्र की युवा पीढ़ी, जिसके अंदर बहुत कुछ अच्छा हासिल करने की क्षमता है. वो कहाँ फंसती जा रही है?

इसलिए आपको बता दें कि इस बुक समरी के सफर में अब काफी इंट्रेस्टिंग मोड़ आ चुका है. अब pornography को लेकर एक ऐसे झूठ के बारे में बात होगी. जिसे ज्यादातर लोगों ने सच मान लिया है.

अब बात औरतों और लड़कियों की होने वाली है. अब बात उन लोगों की होने वाली है जिन्होंने ये मान लिया है कि औरतों को porn की लत नहीं लग सकती है.

दरअसल ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि पोर्न का मतलब केवल और केवल आदमियों से ही होता है. आदमी ही उसे देखते हैं और आदमियों को ही पोर्न का एडिक्शन भी होता है. अधिकत्तर लोग लड़कियों को pornography की victim के तौर पर देखते हैं. अगर कोई लड़की पोर्न देखती है तो ऐसा माना जाता है कि उसके बॉय फ्रेंड ने कंपनी के तौर पर देखने को कहा होगा?

लेकिन आपको बता दें कि इस तरह की बातें भी गलत ही हैं. आज के समय में औरतें भी अपनी मर्जी से पोर्न फ़िल्में देखती हैं. कई औरतें अपनी इच्छा की वजह से पोर्न फ़िल्में देखती हैं तो कई लड़कियों को इसकी लत लग चुकी होती है.

ऐसे भी एग्जाम्पल देखने को मिले हैं, जब लड़कियों ने पोर्न की लत की वजह से अपनी सेक्स लाइफ को पूरी तरह से खराब कर लिया था. कुछ लड़कियों को पॉर्न देखने की ऐसी लत लग जाती है कि वो इसके बगैर रह ही नहीं पाती हैं. पोर्न देखने की आदत उनकी डेली रूटीन में शामिल हो जाती है. जिसका बुरा असर उन्हें तुरंत तो देखने को नहीं मिलता है लेकिन लॉन्ग टर्म में उन्हें काफी बुरे असर देखने को मिलते हैं.

कुछ लड़कियां तो इस आदत की गिरफ्त में इस हद तक आ जाती हैं कि चाहकर भी वो इससे अपना पीछा नहीं छुड़ा पाती हैं. कई लड़कियों ने तो इस आदत की वजह से अपनी पूरी लाइफ तक खराब कर ली है. लेखक कहते हैं कि एक पॉर्न एडिक्ट महिला ने अपनी कहानी उनसे शेयर की थी.

उस महिला ने उनको बताया था कि “कैसे pornography की लत ने उसकी सेक्स लाइफ तबाह कर दी थी?.. उस महिला ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि उसकी इच्छा थी कि उसकी बेड रूम लाइफ रोमांटिक और फिल्मों की तरह हो. इसी वजह से उसने पॉर्न देखना शुरू किया था.

महिला आगे कहती हैं कि “मैं अपने पार्टनर के साथ अच्छा अनुभव करना चाहती थी, मैं नहीं चाहती थी कि मेरा सेक्स कभी भी बोरिंग हो और सबसे ज्यादा मुझे ये जानने की इच्छा थी कि मैं जो कर रही हूं, वो सही है या नहीं?

सबसे पहले मेरे सामने सवाल था कि मैं इस तरह के वीडियो कहाँ से पाऊं? मैंने इसके लिए अपनी फ्रेंड की मदद ली.. उसने मुझे कई पोर्न वेब साईट के बारे में बताया, वो काफी पहले से इन वेब साईट में पोर्न देखा करती थी. उसनें मुझे बताया कि इन वेब साईट की मदद से मैं सेक्स को अच्छे से समझ भी सकती हूँ. इसके बाद मैंने सर्च भी किया तो मुझे कई सारी वेब साईट मिल गईं.

मैं वेब साईट को रेगुलरली विज़िट करने लगी, जहाँ कुछ-कुछ वीडियोज में मुझे वॉयलेंट एक्टिविटी भी देखने को मिली. वीडियो में महिलाएं जिस तरह इन एक्टिविटी को एक्सेप्ट कर रही थीं, उससे मुझे ये सब नॉर्मल लगने लगा. मुझे ऐसा लगा कि शायद अच्छे सेक्स का मतलब ही यही होता है. ‘मैं ऐसी चीजें ढूंढ रही थी जो मुझे अच्छी भले ना लगे लेकिन उन्हें ‘कूल’ माना जाए. मैं फिजिकल इंटीमेसी को उसी तरह एंजॉय करना चाहती थी जैसे कि मुझे शॉपिंग के समय महसूस होता है. मैं ऐसे मूव्स करना चाहती थी ताकि मैं अपने पार्टनर को इंप्रेस कर सकूं.

जैसे-जैसे मैं पोर्न देखती गई, मैं ये समझने लगी थी कि सेक्स के दौरान पार्टनर की सभी बातों को मान लेना चाहिए. अगर मैं अपने पार्टनर की सारी डिमांड्स को मान लूंगी तो वो मेरे साथ काफी खुश रहने लगेगा. भले ही वो हिंसक और खतरनाक हो लेकिन मुझे उसे चुपचाप स्वीकार ही करना है. मुझे ये नहीं कहना चाहिए कि मुझे उसकी ये हरकत पसंद नहीं आ रही. मेरे मन में ये ख्याल घर कर चुका था कि नॉर्मल लोग ऐसे ही इंटिमेट होते हैं.

फिर एक रात वो समय भी आया जब मैंने पहली बार सेक्स किया.. ‘जब मैं पहली बार सेक्स कर रही थी तो अपने पार्टनर की सभी इच्छाओं को मानती जा रही थी. उसकी कई बातें तो मुझे अच्छी नहीं लग रही थीं, लेकिन फिर भी मैं उन्हें मना नहीं कर पाई. शायद ये मुझ पर पॉर्न का ही असर था, मेरे मन में यही बात थी कि मुझे अपनी तरफ से कुछ मना नहीं करना है. लेकिन धीरे-धीरे समय बीतता गया और मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा था कि मैं कैसे इन चीजों को सामान्य समझने लगी हूं? पॉर्न देखने की वजह से मैं सेक्स एंजॉय करना ही भूल गई थी. फिर मुझे एहसास होने लगा था कि मुझे तो मालुम ही नहीं है कि असली सेक्स क्या होता है? मैंने अपनी पूरी लाइफ पोर्न को ही असली सेक्स समझा था. जो कि मेरी लाइफ की सबसे बड़ी गलती साबित हो रही थी.

समय बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगा और मुझे एहसास हो गया कि पॉर्न से मैंने कोई नए मूव्स नहीं सीखे बल्कि बस इतना जाना कि पुरुष मेरे साथ जो भी करे मुझे उसे एक्सेप्ट करना है. मुझे ऐसा समझ में आया कि पोर्न ने मुझे एक एक्ट्रेस बना दिया है. जिसका काम बिस्तर में ये दिखाना रह गया है कि उसे बहुत अच्छा लग रहा है. हद तो तब हो गई, जब मुझे पता चला कि orgasm नाम की भी कोई चीज़ होती है? मैंने अपने पार्टनर के साथ बहुत बार सेक्स किया था लेकिन मुझे कभी orgasm का अनुभव करने को नहीं मिला था. इसकी सिर्फ और सिर्फ एक ही वजह थी, वो ये थी कि मैंने पोर्न को ही रियल सेक्स समझ लिया था.

लेखक यहाँ सलाह देते हैं कि इस कहानी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं. उनमें से पहली चीज़ ये है कि औरतें भी पोर्न देखती हैं. इसलिए आज से ही हमें इस मिथ में नहीं पड़ना चाहिए कि पोर्न केवल आदमियों की चीज़ है. दूसरी सबसे बड़ी चीज़ हमें ये सीखनी चाहिए कि पोर्न में दिखने वाला सेक्स रियल सेक्स बिल्कुल नहीं है. रियल सेक्स में इंटीमेसी का रोल होता है. जो कि किसी भी रोमांटिक रिलेशनशिप का पिलर भी है.

इसी के साथ हमें ये भी समझना चाहिए कि पोर्न में दिखाया जाने वाला सेक्स कल्चर काफी खतरनाक भी साबित हो सकता है. इसलिए अगर आप पोर्न देखते हैं तो उसे देखना कम कर दीजिए. हो सके तो छोड़ ही दीजिए. या फिर अगर नहीं छोड़ पा रहे हैं तो उसे देखने से पहले ये मान लीजिए कि इसका रियल्टी से कोई संबंध नहीं है.

लड़कियों का पोर्न के साथ रिलेशनशिप काफी गहरा हो चुका है. इस बात को ये डेटा और भी अच्छी तरह से बताता है. पिछले 6 महीने के डेटा की बात करें तो ये निकलकर सामने आया है कि 25 साल की उम्र तक की 90 परसेंट लड़कियां पोर्न देखती हैं. उनमें से 50 परसेंट लड़कियों को तो पोर्न की लत भी लगी हुई होती है. मतलब उनके फोन में हर दूसरे तीसरे दिन पोर्न वीडियो देखे जाते हैं.

एक सर्वे में तो 4 परसेंट 60 साल की उम्र की औरतों ने भी खुद माना है कि हाँ वो लोग भी पोर्न देखती हैं. ये डेटा साफ़-साफ़ बताता है कि pornography का sexuality से कोई लेना देना नहीं होता है. आज के समय में हर जेंडर के लोग pornography के कंटेंट का यूज कर रहे हैं.

‘sex’ इस शब्द को सुनकर ही ज्यादातर लोग झिझक जाते हैं. हैरानी की बात है कि भारत जैसे विशाल देश में, जहाँ की आबादी 140 करोड़ को पार कर रही है. जिस देश के लोग दुनियाभर की बड़ी-बड़ी कम्पनियों में काम कर रहे हैं. हमें पता होना चाहिए दुनिया के हर 100 आदमी में से 18 लोग भारत में रहते हैं. उस देश में सेक्स के ऊपर खुलकर बात नहीं होती है. तो ये कहना गलत नहीं होगा कि यहाँ के लड़कों और मर्दों को सेक्स करना तो अच्छा लगता है. लेकिन इसके बारे में जानकारी इकट्ठा करना अच्छा नहीं लगता है.

लेखक tim challiesइस एपिसोड में केवल सेक्स के बारे में ही बात करने वाले हैं. इस टॉपिक के बारे में बात करते हुए लेखक कहते हैं कि “इसके बारे में इतनी ज्यादा बात होनी चाहिए कि फिर ये टॉपिक टैबू बिल्कुल ना रहे. लेकिन अभी ये बात पूरी तरह से सच है कि दुनिया के कई हिस्सों में आज भी इस टॉपिक के बारे में बिल्कुल बात नहीं होती है.”

हर घंटे बदलती डिजिटल दुनिया के युग में भी कुछ लोग सेक्स एजुकेशन का नाम सुनते ही गुस्से से लाल-पीले होने लगते हैं. उन्हें काफी ज्यादा अजीब सा लगने लगता है. उन्हें ऐसा लगता है कि इस फालतू से टॉपिक के ऊपर कभी बात ही नहीं होनी चाहिए? वो ये तर्क देते भी नहीं थकते हैं कि ये कौन सा एजुकेशन है? ये कोई पढ़ने की चीज है? इसको पढ़कर कोई upsc नहीं निकाल सकता है. आमतौर पर ज्यादातर लोग मानते हैं कि सेक्स एजुकेशन कोई पढ़ने का सब्जेक्ट ही नहीं है.

लेकिन आज हम आपको बतायेंगे की सेक्स एजुकेशन क्या है? और इसके बारे में जानकारी होना क्यों ज़रूरी है? और आपकी लाइफ में इसका importance कितना है? अगर शुरूआत में ही सेक्स के बारे में सही जानकारी नहीं दी जाए, तो बढ़ती उम्र और हार्मोनल बदलाव के आधार पर बच्चों को इंटरनेट की चमकदार दुनिया में आधी-अधूरी और ज्यादातर गलत जानकारी ही मिलती है.

जिससे उनके यही नहीं मालुम रहता है कि आखिर सेक्स का असली मतलब क्या होता है? वो सेक्स को बुरी और अजीब नज़र से देखने लगते हैं. लेकिन उनके मन में इसके लिए फैंटेसीज़ तो रहती ही हैं. जिसकी वजह से उन्हें porn फिल्मों का सहारा लेना पड़ता है. फिर कब उन्हें इस तरह की फिल्मों की आदत लग जाती है? उन्हें खुद भी नहीं पता चलता है. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि हर घर में सेक्स एजुकेशन के बारे में बात होनी शुरू हो..

जिससे उनके मन में सेक्स से जुड़ी सारी कन्फ्यूजन दूर हो सके. सही जानकारी न होने से सेक्स के दौरान और उसके बाद न केवल आपको, बल्कि आपके पार्टनर को भी कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं. इसलिए इस दौर में भी कुछ पढ़े लिखे लोग हैं, जो चाहते हैं कि आज के बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना बहुत ज़रूरी है.

कई बार आपने अपने बच्चे के मुंह से सुना होगा की मम्मी ये बच्चे कैसे पैदा होते हैं? सेक्स क्या होता है? बच्चों के मुंह से ये सवाल सुनते ही आप चौंक जाते हैं कि बच्चे को क्या जवाब दें?

लेकिन हमें इस बात का एहसास होना चाहिए कि अगर हम बच्चों को शुरूआत में ही सेक्स एजुकेशन के बारे में बता दें? तो सेक्स के बारे में उन्हें अच्छी जानकारी हो जाएगी. इसी के साथ ये उनकी लाइफ का एक साधारण सा हिस्सा भी बन जाएगा. उन्हें पता चल जाएगा कि इसके बारे में जानने के लिए उन्हें किसी porn वेबसाईट का सहारा नहीं लेना है. इसी के साथ उन्हें ये भी पता चल जाएगा कि लाइफ में ज्यादा porn वेबसाईट में विजिट करने से क्या- क्या बुरे असर पड़ सकते हैं?

इसलिए सबसे पहले हम समझें कि सेक्स एजुकेशन क्या है?

सेक्स एजुकेशन के बारे में जानना सभी उम्र के लोगों के लिए ज़रूरी है. इस सब्जेक्ट में स्पेसिफिक जेंडर का होना ज़रूरी नहीं है. भले ही आप महिला हों या पुरुष दोनों के लिए इस टॉपिक के बारे में प्रॉपर ज्ञान होना ज़रूरी है.

आपको पता होना चाहिए कि सेक्स के कई पहलु होते हैं, आज दुनियाभर के कई देशों में सेक्स एजुकेशन को बाकी दूसरे सब्जेक्ट की ही तरह एक important subject बना दिया गया है.

अब बात कर लेते हैं कि आखिर सेक्स एजुकेशन में ऐसा क्या बताया जाता है? जिसे पोर्न वीडियो में नहीं दिखाया जाता. इसके लिए आपको बता दें कि porn वीडियो और सेक्स एजुकेशन में बहुत बड़ा फर्क है. सबसे बड़ा फर्क ये है कि सेक्स एजुकेशन में ज्ञान की बातें बताई जाती हैं. और porn क्लिप्स में ऐसी चीजें दिखाई जाती हैं. जिनका रियलिटी से कोई दूर-दूर तक लेना देना नहीं है.

आपको बता दें कि सेक्स एजुकेशन में सेक्स से जुड़ी एक-एक साधारण और गंभीर बातों पर चर्चा की जाती है. हमें बताया जाता है कि हमारे देश में सेक्स को लेकर क्या-क्या कानून और नियम बनाए गए हैं?

इसी के साथ इसके बारे में पूरी जानकारी दी जाती है कि हम किस तरह से सेक्स करना हमारे समाज में लीगल माना गया है?

इसकी क्या सीमाएं तय की गई हैं, इन सभी बातों की जानकारी सही तरीके से दी जाती है.

सेक्स एजुकेशन में आपको यह जानकारी भी दी जाती है कि यदि आपकी उम्र के साथ-साथ आपके हार्मोन में बदलाव होता है, तो आप इस बदलाव का सामना कैसे कर सकते हैं? सेक्स एजुकेशन में ये बताया जाता है कि सेक्स के बारे में बातें करना कोई बुरी बात नहीं है.

हमें इस टॉपिक के बारे में प्रॉपर जानकारी होना ज़रूरी है. इसलिए ही लेखक ने इस टॉपिक के ऊपर प्रॉपर एक एपिसोड तैयार किया है. जिसमें आपको इस टॉपिक के बारे में पूरी जानकारी दी जा रही है.

सेक्स के बारे में बात करते हुए लेखक tim challies कहते हैं कि भले ही खुलकर सेक्स के ऊपर चर्चा ना होती हो, लेकिन बहुत से रिसर्चर ने सेक्स के ऊपर बहुत कुछ लिखा है. कई स्पिरिचुअल लोगों ने भी सेक्स के ऊपर बारीकी से चर्चा की है.

बहुत लोगों ने तो सेक्स को दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास भी बताया है. लेकिन इसी के साथ ये भी कहा है कि इस एहसास को फील करने के लिए आपको झूठी porn की दुनिया से बाहर आना होगा. क्योंकि porn की दुनिया में कभी भी आपको रियल सेक्स के एहसास के बारे में जानकारी नहीं हो सकती है.

कई महान theologians ने डीपेस्ट मीनिंग ऑफ़ सेक्स को भी बताने की कोशिश की है. उन्होंने बताया है कि सेक्स ‘joys of heaven,” है. मतलब साफ़ है कि अगर आपको रियल सेक्स के बारे में मालुम चल जाए तो आप दुनिया के सबसे खूबसूरत जॉय से रूबरू हो सकते हैं.

लेकिन उस जॉय तक पहुँचने के लिए सबसे पहले तो आपको porn की लत से बाहर आना होगा. क्योंकि porn वीडियोज़ ने सेक्स को मशीनरी एक्ट बना दिया है. उन्हें देखकर लोग सेक्स को केवल बॉडी से कनेक्ट करने लगे हैं. लेकिन इस कांसेप्ट का असली आनंद तभी मिल सकता है. जब आप इसे आत्मा से कनेक्ट करने की कोशिश करें.

बिना आत्मा की बात किए हुए सेक्स की बात पूरी हो ही नहीं सकती है.

आत्मा और लाइफ को समझाते हुए ओशो ने बहुत खूब कहा है कि “जीवन एक कविता है जिसे लिखा जाना चाहिए. यह गाया जाने वाला गीत, किया जाने वाला नृत्य है.”

हमें समझना चाहिए कि porn की वजह से हम अपनी लाइफ की कविता को ख़राब करते जा रहे हैं. हम दुनिया के सबसे बड़े गिफ्ट यानि सेक्स को भी ख़राब करते जा रहे हैं. इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम “sexual detox” की प्रोसेस को अपनी लाइफ का हिस्सा बनाने की कोशिश करें.

इन सभी बातों के साथ कई महान दार्शनिक ने कहा है कि सेक्स बहुत अच्छी चीज़ है. बशर्ते, हमें सेक्स के द्वारा दी गई “तीन गिफ्ट्स” के बारे में मालुम हो.

जी हाँ, आप ये सुनकर चौक मत जाइएगा, हम सही कह रहे हैं. सेक्स ने इंसान को तीन गिफ्ट्स दिए हैं. जिनकी सही जानकारी रखने बस से, हम अपनी लाइफ को बेहतर से बेहतरीन बना सकते हैं.

ये तीन गिफ्ट्स कुछ इस प्रकार हैं-

1. sex motivates joyful obedience

2. male leadership

3. true freedom

चलिए इन तीनों गिफ्ट्स के बारे में बारीकी से कुछ बातें समझने की कोशिश करते हैं. सेक्स ने हमें पहला गिफ्ट “joyful obedience” की तरह दिया है. इस बारे में मशहूर लेखक c.s. lewis कहते हैं कि इस बारे में कोई शक नहीं है कि सेक्स का एक मुख्य पर्पस जनरेशन को आगे बढ़ाना भी है. ये इतना बड़ा पर्पस है कि इसकी मदद से पति-पत्नी हमेशा के लिए एक बंधन से बंध जाते हैं. उनके अंदर एक दूसरे को लेकर ईमानदारी आ जाती है.

इसलिए हमें कभी भी इस पर्पस को नहीं भूलना चाहिए. हर किसी को कोशिश करनी चाहिए कि वो अपने पार्टनर की तरफ पूरी तरह से ईमानदार रहे. सेक्स हमें सिखाता है कि कैसे शरीर की इच्छा को पूरी करके दिमाग को फ्रेश रखा जा सकता है. इसके ऊपर हुई कई रिसर्च बताती हैं कि सही सेक्स करने वाले लोगों लाइफ में जॉयफुलनेस बनी रहती है.

लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात यही है कि हमें सेक्स के साथ भी biological purpose को याद रखना चाहिए. हमें याद रखना चाहिए कि फूड से शरीर रिपेयर होता है. लेकिन दिन भर खाते रहने से शरीर में कई बीमारियाँ भी आ सकती हैं. उसी हिसाब से इंसान के अंदर sexual desire होना लाज़मी है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप इसके लिए porn के गलियारे में पहुँच जाएँ. आपको अपनी बायोलॉजिकल नीड्स को कंट्रोल में करके रखना होगा.

अब बात सेक्स के दूसरे गिफ्ट के बारे में करते हैं. इसका नाम “male leadership” है. या फिर कई लोग इसे हसबैंड लीडरशिप भी कहते हैं. आपको पता होना चाहिए कि सेक्स की वजह से हसबैंड के अंदर एक लीडर का भी जन्म होता है. जो हसबैंड अपनी पत्नी को अच्छा सेक्स दे पाता है. उसके अंदर एक अलग ही कांफिडेंस का जम्म होता है. उसे अपनी सेक्स पॉवर के बारे में सुनकर अच्छा लगता है. इसलिए हमें समझना चाहिए कि सेक्स ने मेल्स को लीडरशिप के तौर पर एक गिफ्ट दिया है.

लेकिन इस गिफ्ट को हासिल करने के लिए आपको अपनी sexual energy को कहीं भी वेस्ट नहीं करना चाहिए. आपको पता होना चाहिए कि आपकी sexual energy में आपकी पार्टनर का ही हक है. इसलिए सेक्स को समझिए और इसके गिफ्ट्स को भी समझने की कोशिश करिए.

अगर आप अपनी पार्टनर को बेड पर भी रिस्पेक्ट देना चाहते हैं. तो आपको एक बेसिक बात समझनी चाहिए. वो ये है कि आदमी बिस्तर में सेक्स के लिए जाता है. मतलब सेक्स उसके लिए एक मशीनरी एक्ट है. लेकिन औरत के लिए सेक्स एक मशीनरी एक्ट से बहुत आगे की चीज़ है. एक औरत सेक्स से पहले intimacy और acceptance चाहती है. अगर आपको अच्छा sexual रिश्ता चाहिए तो आपको सेक्स और intimacy के बीच का फर्क पता होना चाहिए. कभी भी सेक्स को केवल मशीनरी एक्ट की तरह मत देखिएगा. ये पूरी एक प्रोसेस है जिसको सीखने में समय लगता है.

इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दोनों पार्टनर्स को खुलकर सेक्स ऊपर बातें करनी चाहिये. इन बैटन में उन्हें अपनी desires के बारे में चर्चा करनी चाहिए. क्योंकि किसी भी रोमांटिक कपल्स के लिए एक अच्छा सेक्स लाइफ चेंजिंग फैक्टर साबित हो सकता है. आज के डिजिटल युग में जैसे-जैसे porn वेबसाइट्स की रीच बढ़ती जा रही है. वैसे-वैसे कपल्स के बीच में तलाक का रेशियो भी बढ़ रहा है. इसका सबसे बड़ा रीजन सेक्स के बारे में लैक ऑफ़ कम्युनिकेशन है. ज्यादातर आदमियों को पता ही नहीं होता है कि उनकी पत्नी की सेक्स desires क्या हैं?

ये बात सुनने में छोटी लग सकती है लेकिन ये तलाक की बड़ी वजह साबित हो रही है. अगर हम चाहते हैं कि हमारी इस जनरेशन की लाइफ में रिश्ते बेहतर बने रहें. तो हमें इस टैबू को अभी तोड़ने की शुरुआत कर देनी चाहिए.

हमें समझना चाहिए कि एक मज़बूत रोमांटिक रिश्ते के लिए दोनों पार्टनर्स की sexual desires का मैच होना बहुत ज़रूरी है. इसलिए अगर आप बहुत जल्द शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. तो इस टॉपिक पर भी अपने पार्टनर के साथ खुलकर बातें करिए.

अब वक्त है कि हम सेक्स के तीसरे गिफ्ट के बारे में कुछ बातें जानने की कोशिश करें. इस गिफ्ट का नाम “true freedom” है. लेखक आपको बताना चाहते हैं कि सेक्स की वजह से “true freedom” बढ़ती है.

इस फैक्टर की वजह से ही कई बार लेखक ने कहा है कि सेक्स केवल शरीर का टॉपिक नहीं है. इसका बहुत मज़बूत रिश्ता दिमाग से भी है. इसी के साथ कई रिसर्च बताती हैं कि जिस आदमी को अच्छा सेक्स मिलता है या फिर जिसे सेक्स के बारे में अच्छी जानकारी होती है. उसकी सोच भी खुली हुई होती है. मतलब स्वतंत्र दिमाग का इंसान होता है. उसके दिमाग में कन्फ्यूजन कम और फैक्ट्स ज्यादा होते हैं.

याद रखिए कि कोई भी इंसान “true freedom” को अपने दिमाग की मदद से ही हासिल कर सकता है. इसके लिए आपको अपने दिमाग को खुश और सही जानकारी से फुलफिल करना होगा. और ये बात तो प्रूफ हो चुकी है कि अगर प्यार के साथ अच्छा सेक्स किया जाए तो दिमाग खुश रहता है. लेकिन यहाँ इस बात को याद रखिएगा कि ‘प्यार के साथ सेक्स होना चाहिए..” मतलब अपनी पत्नी से प्यार करिए फिर उनके साथ संबंध बनाइए, क्योंकि बिना प्यार के साथ किया गया सेक्स किसी मशीनरी एक्ट की ही तरह हो जाता है. जिसके बाद इंसान के अंदर फर्स्टटेशन और दुःख का जन्म होता है.

उसके दिमाग में सेक्स को लेकर एक गलत इमेज बन जाती है. इसलिए किसी भी इमेज को बनाने से पहले सेक्स की तरफ से दिए गए इस गिफ्ट के बारे में ज़रूर पढ़ और सुन लीजिएगा.

इसी के साथ लेखक कहते हैं कि “गॉड या फिर क्रिएचर ने इस दुनिया में सेक्स की पॉवर इसलिए ही दी है. क्योंकि पति और पत्नी के बीच में मज़बूत रिश्ता बन सके. दुनिया को सेक्स इसलिए नहीं मिला है कि हम porn फिल्मों में अपने टाइम को खराब करें. इसलिए हमें समझना चाहिए कि गॉड ने किसी भी चीज़ को दुनिया में क्यों लाया है? अगर हम इतनी सी बात समझ लिए तो हम कभी भी porn की तरफ नहीं जाएंगे. और इससे बड़ा कोई दूसरा “sexual detox” हो ही नहीं सकता है.”

इसलिए आज से ही इस नज़रिए को अपने अंदर लाने की कोशिश करिए और समझिए की नज़रिए का खेल भी बहुत असरदार “sexual detox” साबित हो सकता है. अगर हमारे अंदर अपने नज़रिए को बदलने की काबिलियत आ जाए. तो हम अपने किसी भी रिजल्ट को पॉजिटिव दिशा की तरफ मोड़ सकते हैं.

इसलिए इस नज़रिए को सेक्स की तरफ बेहतर करने के लिए हमें समझना होगा कि शरीर के बाकी हिस्सों की तरह सेक्स भी हमारे शशरीर का जरूरी हिस्सा है. और इस हिस्से ने हमें कई गिफ्ट्स दिए हैं. बस बात इतनी सी है कि क्या हम उन गिफ्ट्स का सही इस्तेमाल कर पाते हैं? या नहीं कर पाते हैं? अभी की सिचुएशन तो यही है कि हमारे युवा लड़के porn की लत में फंसते जा रहे हैं. इसलिए उन्हें “sexual detox” की सख्त ज़रूरत है.

अब बात बेड रूम की होगी और साथ ही साथ DETOXIFICATION की भी होगी

दोस्तों, अब तक हम लोगों ने गुडनेस ऑफ़ सेक्स के बारे में और सेक्सुअल boundaries के बारे में बारीकी से चर्चा कर ली है. साथ ही साथ हम लोगों को सेक्स एजुकेशन की importance भी पता चल चुकी है.

अब तस्वीर में एक बिग पिक्चर सवाल आने वाला है. ये सवाल कुछ इस तरह है कि पति को अपनी पत्नी की तरफ “sexuallove” कैसे एक्सप्रेस करना चाहिए? लेकिन इस सवाल के साथ एक सवाल का और जन्म होता है. वो ये है कि “what should i do in bed? what should i not do?..”

आज के समय के अधिकत्तर लड़कों को यही नहीं मालुम है कि उन्हें बेड में कैसे बिहेव करना चाहिए?

इन सवालों का जवाब यही है कि कोई सेक्स एक्ट्स को लेकर

कोई स्पेसिफिक चेक लिस्ट नहीं दे सकता है? इसका ये मतलब नहीं है कि सेक्स की कोई चेक लिस्ट नहीं बन सकती है. बिल्कुल बन सकती है, सेक्स की चेक लिस्ट बन सकती है और विश्वास करिए कि उसमें आपकी सोच से भी ज्यादा बॉक्स होंगे. लेकिन बात यही है कि हर स्पेसिफिक पर्सन के लिए उसकी अलग से चेक लिस्ट होनी चाहिए. उस चेक लिस्ट के लिए आपको आपकी पत्नी के बारे में सारी जानकारी होनी चाहिए. आपको पता होना चाहिए कि पत्नी की sexual fantasies क्या-क्या हैं? क्या आपकी पत्नी को भी sexual activity में उतनी ही दिलचस्पी है जितनी आपको है? इसी के साथ आपको अपनी पत्नी के desires भी अच्छे से पता होने चाहिए?

बिना इन सब फैक्टर्स को समझे हुए कोई भी प्रॉपर चेक लिस्ट नहीं बना सकता है. इसलिए कहा गया है कि हर कपल्स की ख्वाईशें उन्ही को पता होती हैं. इसलिए एक दूसरे को पूरी तरह से सैटीसफाई वही कर सकते हैं.

अगर कोई भी आपसे ये वादा करता है कि वो आपके एक ऐसी चेक लिस्ट दे देगा, जिसकी मदद से आपकी सेक्स लाइफ बेहतर हो जाएगी? तो समझ लीजिए कि वो इंसान आपसे झूठ कह रहा है या फिर उसे खुद सेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. क्योंकि दूसरे की चेक लिस्ट में उसकी कमज़ोरी और स्ट्रेंथ के बारे में लिखा होगा. वो चेकलिस्ट उसके पार्टनर के हिसाब से बनी हुई होगी.

ये ठीक उसी तरह की बात हुई कि मलेरिया के रोग में कैल्शियम की गोली दी जा रही है. अब आप खुद सोचिए कि क्या सिर्फ कैल्शियम की गोली से किसी की जानलेवा मलेरिया को ठीक किया जा सकता है?

बिल्कुल नहीं, इसलिए अपने आपको बताइए कि आपकी पार्टनर को बेडरूम में केवल आप ही असली ख़ुशी दे सकते हैं. यहाँ इस बात के बारे में भी पता होना ज़रूरी है कि हर किसी के लिए ख़ुशी के भी अलग-अलग मायनें होते हैं. हो सकता है कि हार्ड इंटिमेट होना पसंद हो तो किसी को सॉफ्ट सेक्स में दिलचस्पी हो. इसलिए जब बेडरूम की बात आती है तो sexual needs के बारे में पता होना बहुत ज़रूरी है.

इसलिए सबसे पहले सेक्स की बेसिक जानकारी रखिए. आपको पता होना चाहिए कि सेक्स में एक चीज़ इंटरकोर्स भी होती है. इसे सरल भाषा में कहे तो दो लोगों के बीच होने वाले शारीरिक संबंध को सेक्स का एक important हिस्सा माना जाता है. इसी के साथ आपको सेक्स और प्यार के बीच का रिश्ता भी पता होना चाहिए. यदि आप अपने सेक्स पार्टनर से प्यार करते हैं. आप दोनों के बीच एक लगाव और प्यार का रिश्ता है, तो आपकी सेक्स लाइफ ज्यादा अच्छी होगी.

इस बारे में हम लोगों ने पहले भी चर्चा की है, वो इसलिए ही की है क्योंकि इसके बिना सेक्स के बारे में बातचीत पूरी ही नहीं हो सकती है. अगर आपको सेक्स को अच्छे से जानना है तो आपको प्यार के बारे में भी पता होना चाहिए. इसी के साथ- साथ आपको प्यार और हवस के बीच का अंतर भी पता होना चाहिए.

बिना इन सब पहलू के बारे में अच्छे से जाने हुए, आप अपने बेड रूम के रिश्ते को बेहतर नहीं बना सकते हैं. और लाइफ को बेहतर करने के लिए बेडरूम का रिश्ता बेहतर होना बहुत ज़रूरी है.

जब बेड रूम की बात हो रही है, तो एक सबसे बड़ी बात का होना भी ज़रूरी है. वो ये है कि कभी भी बिना कंसेंट यानि सहमती के सेक्स नहीं करना चाहिए. आपको पता होना चाहिए कि सेक्स के लिए साथी की सहमति लेना बहुत जरूरी है. भले ही आप सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन बिना अपनी साथी की सहमति के सेक्स नहीं करना चाहिए. पति-पत्नि के रिश्ते में भी अपने साथी की इच्छा का सम्मान करना चाहिए.

सम्मान की बात होना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि porn के चक्कर में फंसकर युवा फ़ोर्सफुली सेक्स को ही असली सेक्स मानने लगे हैं. उन्हें लगता है कि लड़के होने का मतलब यही होता है कि जब आपका मन करे तब आप अपने पार्टनर के साथ सेक्स कर सकते हैं. आपको इस बारीक सी बात का ख्याल रखना चाहिए कि सेक्स का मतलब सामने वाले को दर्द देना नहीं होता है.

जब तक पार्टनर्स के बीच में रिस्पेक्ट नहीं होगी, तब तक उनके बीच में बेहतर सेक्स नहीं हो सकता है. अगर आपकी शादी हो चुकी है या फिर होने वाली है. तो आपको पता होना चाहिए कि पत्नी की बिना सहमति के अगर पति जबरन उससे सेक्सुअल संबंध बनाने की कोशिश करता है. या फिर उसके साथ जबरदस्ती सेक्स करता है, तो इस तरह के एक्ट को ‘मैरिटल रेप’ कहा जाता है. जिसके बारे में बेडरूम के अंदर और बाहर दोनों जगह बात होनी बहुत ज़रूरी है.

आपको इसके लिए ये तर्क नहीं देना चाहिए कि कानून में इसे रेप माना गया है या नहीं माना गया है? आपको इस बात से मतलब नहीं होना चाहिए कि ये क्या है? आपको बस इस बात पर ध्यान देना है कि इस दुनिया के किसी भी हिस्से में पत्नी की मर्जी से बड़ी कोई चीज़ नहीं हो सकती है.

अगर आपकी पार्टनर सेक्स नहीं करना चाहती है तो आप कभी भी अपने आपको उसके ऊपर फ़ोर्स नहीं कर सकते हैं. इसी कांसेप्ट को “detox in the bedroom” भी कहा गया है. हमें आज के दौर में जब लोग ज्यादातर समय pornography के साथ बिताना पसंद कर रहे हैं. तब हमें इस तरह के detoxificaton की सख्त ज़रूरत है.

“detox in the bedroom” की मदद से हम एक अच्छे पति के साथ-साथ बेहतर इंसान भी बन सकते हैं. इससे हमें पता चलेगा कि प्यार और केयर सेक्स से भी बड़ी चीज़ है.

आपको इस important बात को समझना होगा कि शादी के बाद एक व्यक्ति के तौर पर किसी की सोसाइटीकल आइडेंटिटी खत्म नहीं हो जाती है. पति-पत्नी के अलावा भी व्यक्ति की एक पहचान है और उसके भी constitutional हक हैं. सेक्स के लिए पत्नी का कंसेंट अभी नहीं बल्कि हमेशा ज़रूरी है. किसी को रेप करने का हक सिर्फ इसलिए नहीं मिलना चाहिए कि वह उसका पति है.

इसलिए सेक्स के बारे में पढ़ना और सुनना शुरू करिए, इसका ये मतलब नहीं है कि आप porn वीडियो देखने की शुरुआत कर दें. क्योंकि porn में ना ही रियल सेक्स दिखाया जाता है और ना ही रियल सेक्स के बारे में जानकारी दी जाती है.

इसलिए ये समझना बेहद ज़रूरी है कि सेक्स को समझने के लिए, हमें उसकी तरफ सही अप्रोच को अपनाना होगा. हमें उसके बेसिक्स को समझने की कोशिश करनी होगी. हमें समझना होगा कि गॉड ने सेक्स को क्यों बनाया है? अगर हम इस कांसेप्ट के बेसिक्स को समझ लिए, तो विश्वास करिए, बेड रूम ही नहीं बल्कि लाइफ से भी हमारी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी.

इसके बेसिक्स में यही बताया गया है कि बेड रूम के अंदर कपल्स को ऐसे चीजें ट्राय करनी चाहिए. जिन एक्ट्स में दोनों कम्फर्टेबल रहें और एन्जॉय करें. एक अच्छे सेक्स में एन्जॉयमेंट फैक्टर को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है.

दोस्तों, सेक्स के बारे में इतनी चीज़ें जानने के बाद, अब वक्त आ गया है कि हम इस चीज़ को भी समझने की कोशिश करें कि आखिर कौन सी चीज़ सेक्स नहीं है? मतलब साफ़ है कि इस डिजिटल दुनिया में जहाँ से सच से जल्दी झूठ फैलता है. वहां फैक्ट चेकिंग करने की कोशिश करते हैं. sex से जुड़ी myth को भी समझने की कोशिश करते हैं.

इसके लिए सबसे पहला फैक्टर तो यही है कि कभी भी सेक्स को लाइफ का मेन पर्पस नहीं बना लेना चाहिए. हमें समझना चाहिए कि लाइफ के लिए सेक्स भी ज़रूरी है. लेकिन पूरी लाइफ ही सेक्स नहीं है. किसी की भी ज़िन्दगी का अल्टीमेट गोल सेक्स हो ही नहीं सकता है. इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि हम सिंगल हैं या फिर मैरिड, हमारी ज़िन्दगी केवल सेक्स के आस पास नहीं हो सकती हैं.

हमें अपनी लाइफ को सक्सेस की मुकाम पर ले जाने के लिए, एक बड़े लक्ष्य की ज़रूरत है. और वो बड़ा लक्ष्य सेक्स तो बिल्कुल नहीं है. आपके लिए सेक्स लाइफ स्ट्रेस बस्टर का काम कर सकती है. लेकिन सिर्फ और सिर्फ इसकी बदौलत आप खुश नहीं रह सकते हैं. लाइफ में ख़ुशी के कई मायने हैं, उनका एक छोटा सा हिस्सा सेक्स भी है. इस सिम्पल सी बात को याद रखने की कोशिश करिए और अपनी लाइफ को सिम्पल बनाकर रखिए.

सेक्स से जुड़ी दूसरी मिथ यही है कि बहुत ज्यादा लोग pornography में दिखाए गए सेक्स को ही रियल सेक्स समझ लेते हैं. वो समझते हैं कि अगर हम ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. तो हमारे अंदर ही कोई कमी है. लेकिन ये बिल्कुल भी सच नहीं है. आपको पता होना चाहिए कि porn फिल्म्स कत्तई सेक्स नहीं हैं. ये सेक्स के आस पास भी नहीं हैं.

sex act कोई माजाक नहीं है बल्कि ये पूरी तरह से holy process है. इसे समझने के लिए किसी का भी समझदार होना बहुत ज़रूरी है. सेक्स ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप एक वीडियो की मदद से सीख जाएंगे. इसे सीखने के लिए आपको मेंटली मज़बूत होना पड़ेगा. आपको खुद के अंदर पेशन्स लाना होगा, साथ ही साथ कई बार “sexual detox” की प्रोसेस से भी होकर गुज़रना होगा.

इसी के साथ अब सेक्स से जुड़ी सबसे बड़ी मिथ की बात करते हैं. ऐसा देखा जाता है कि जिससे भी इंटरकोर्स आता है. वो अपने आपको सेक्स का मास्टर समझने लगता है. लेकिन हमें पता होना चाहिए कि जिस तरह पूरा का पूरा सेक्स लाइफ का के छोटा सा हिस्सा है. उसी तरह केवल इंटरकोर्स भी सेक्स प्रोसेस का एक छोटा सा हिस्सा है.

इसलिए अगर आपसे केवल इंटरकोर्स आता है, तो आप तो अभी सेक्स के स्टूडेंट् भी नहीं बने हैं. रियल सेक्स एक जादू की तरह होता है, जिसके लिए आपको एक जादूगर तो बनना ही पड़ेगा. ज्यादातर लोग इंटरकोर्स को सेक्स का मेन हिस्सा समझते हैं. ये एक बहुत बड़ा मिथ भी है. उन्हें ये पता होना चाहिए कि इंटरकोर्स से ज्यादा सेक्स में आँखों और हाथों की उँगलियों का खेल होता है. कोई भी अपनी पार्टनर को केवल आँखों की मदद से भी सम्मोहित कर सकता है. इसलिए सेक्स को समझने के लिए अपनी पत्नी की आँखों को पढ़ना सीखिए.

आँखों और उंगलियों के अलावा भी सेक्स में अदाओं का भी बहुत बड़ा योगदान होता है. किस तरह आप अपने पार्टनर को बेड में ट्रीट करते हैं? इस चीज़ से पता चलता है कि आपके अंदर सेक्स को लेकर कितनी तमीज है? बिना सही ट्रीटमेंट के सेक्स किया ही नहीं जाना चाहिए.

इसलिए लेखक कहते हैं कि “गॉड ने सेक्स को बहुत खूबसूरत बनाया है. इसे खराब को हम और हमारी porn की लत बनाती जा रही है. सेक्स एक ऐसा टॉपिक है, जिसके बारे में अभी बहुत सारी रिसर्च होना बाकी है. और इसके बारे में आप जितना भी जानते जाएंगे, वो कम ही पड़ता जाएगा. इसलिए सिम्पल सी बात ये हैं कि इसकी simplicity को याद रखें. इसकी खूबसूरती इसके नाम में छुपी हुई है. ज़रूरत तो बस इतनी सी है कि हम इसकी खूबसूरती को पहचान सकें.”

Sexual Detox

आत्मा को शुद्ध करना भी ज़रूरी है, इसके बिना लाइफ बेहतर नहीं हो सकती है

ज़िन्दगी की बात बिना आत्मा की बात से पूरी ही नहीं हो सकती है. क्योंकि बिना soul के कोई लाइफ की कल्पना भी नहीं कर सकता है. लाइफ को सफल बनाने के लिए detoxification की ज़रूरत पड़ती है. इसी तरह इस सफल लाइफ के लिए एक अच्छी soul का होना भी बहुत ज़रूरी है. इस अच्छी soul के लिए “detox in your soul” के कांसेप्ट को जानना भी बहुत ज़रूरी है.

आज के समय के युवा बच्चों को ये जानना ज़रूरी है कि porn की लत उन्हें अंदर से खराब कर रही है. ये लत उनकी आत्मा के साथ भी खिलवाड़ कर रही है. इसलिए सबसे पहले तो हमें खुद से सवाल करना है कि क्या हमें porn देखने का मन करता है? और अगर करता है तो हम हफ्ते में कितनी बार porn फ़िल्में देखा करते हैं?

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हमें खुद ही पता लगाना होगा कि क्या हम porn की लत के शिकार हैं? या नहीं हैं? क्योंकि हमारा हमसे बेहतर कोई दूसरा मेंटर नहीं हो सकता है.

हमें खुद की मेंटरिंग करना सीखना होगा. हमें ये भी जानने की कोशिश करनी होगी कि दिन भर porn की बातें करने से कैसे हमारी आत्मा पर बुरा इफ़ेक्ट पर रहा है.

इसलिए आपकी आत्मा को बचाने की ज़िम्मेदारी आपकी ही है. इसके लिए आप कई तरीके अपना सकते हैं. एक जो सबसे अच्छा और कारगर तरीका है, वो ये है कि अपना कुछ वक्त ही सही लेकिन कुछ वक्त ज़रूरी अध्यात्मिक कामों के लिए निकालने की कोशिश करिए. अगर आप अध्यात्मिक कामों के लिए समय निकालेंगे तो धीरे-धीरे आप ओब्सर्व करेंगे कि आपकी आत्मा पहले से ज्यादा पॉजिटिव रहने लगी है. इसी के साथ कोशिश करिए कि दिन भर में कुछ मिनट स्पिरिचुअल किताबों को पढ़ सकें.

उन्हें पढ़ने से आप उन्हें समझना शुरू करेंगे, जैसे-जैसे आपकी दोस्ती पवित्र अध्यात्मिक ग्रन्थों से होती जाएगी, आप ओब्सर्व करेंगे कि आपकी आत्मा detox होना शुरू हो गई है. जैसे- जैसे आपकी आत्मा शुद्ध होगी, वैसे-वैसे ही आपकी लाइफ भी बेहतर होती जाएगी. इसलिए कहा गया है कि लाइफ को बेहतरीन करने के लिए “detox in your soul” के कांसेप्ट को समझना बहुत ज़रूरी है.

हमें समझना होगा कि आजकल के दौर में हमारा शेड्यूल बहुत टाइट हो गया है.. पढ़ाई, जॉब, फोन पर बातें, ट्रैफिक.. हैंग आउट करना और फिर समय निकालकर porn देख लेना. इस तरह की चीज़ें यह बहुत कम समय तक ही मजेदार रहती हैं, एक समय के बाद यह डिप्रेसिंग हो जाती हैं. जिसका सीधा असर इंसान की मेंटल हेल्थ पर पड़ने लगता है. ऐसे में हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारी मदद अध्यात्मिक जर्नी बहुत ज्यादा कर सकती है.

लेखक कहते हैं कि स्पिरिचुअल जर्नी से हमें दूसरों के साथ अच्छे सम्बंध बनाने की मोटिवेशन मिलती है. आपको परिवार और दोस्तों का महत्व भी समझ में आता है और मानवता का भाव भी पैदा होता है.

इसलिए अपनी लाइफ में हमें स्पिरिचुअल जर्नी के महत्व को समझना चाहिए. स्पिरिचुअल जर्नी के साथ ही साथ एक फैक्टर और है. जिसकी मदद से हमारी मेंटल हेल्थ और sexual health दोनों बेहतर होगी. इस फैक्टर का नाम मेडीटेशन है. इससे हमारी बॉडी में “sexual detox” की प्रोसेस को भी काफी ज्यादा मदद मिलती है.

meditation या फिर ध्यान के बारे में आपने काफी सुना होगा, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि meditation की मदद से आप अपना पूरा जीवन बदल सकते हैं. ये एक जादुई शक्ति है, जिसकी मदद से आप अपने जीवन में सफलता की उचाईयों को बड़ी आसानी से छू सकते हैं. ध्यान को अपने जीवन में शामिल ना करके, हम सबने बहुत बड़ी गलती की है. लेकिन अब इस गलती को सुधारकर अपने जीवन में कामयाबी ला सकते हैं.

meditation यानि ध्यान, ये शब्द सुनने में जितना आसान लगता है. इसके फायदे उतने ही ज्यादा हैं. आज कल meditation के बारे में हम अपने चारों तरफ पढ़ते और सुनते रहते हैं.

सोशल मीडियासे लेकर बाहरी कैम्पतक में ध्यानके फायदे बताये जा रहे हैं. ज्यादातर जगह बताया गया है कि ध्यान की मददसे इंसान का दिमाग और शरीर बेहतर होता है.

लेकिन हमें पता होना चाहिए कि ध्यानका रिश्ता बस हमारे शरीर से ही नहीं बल्कि हमारी सेक्स life से भी होता है. meditation की मदद से हम हमारी personal life से लेकर सेक्स लाइफ तक को भी बेहतर कर सकते हैं.

ऐसा इसलिए है क्योंकि ध्यान एक “sexual detox” की प्रोसेस भी है. इससे इंसान का दिमाग मज़बूत होता है और उसके अंदर एक अलग सी ताकत भी देखने को मिलती है.

लेखक tim challies कहते हैं कि “personal development की ज्यादातर किताबों में सुनी सुनाई बातों को बताया गया है. लेकिन इस किताब में उन्होंने खुद के निजी अनुभवों को बताने की कोशिश की है. उनके जीवन को meditation ने पूरी तरह से बदला है. जिसका अनुभव उन्होंने इस किताब में लिखा है.”

लेखक यहाँ एक छोटी सी कहानी शेयर करते हुए बताते हैं कि एक दौर की बात है. उनके खास दोस्त और उसकी पत्नी को ऐसा लगने लगा था कि “उनके अंदर पैशनेट सेक्सको लेकर पैशन खत्म हो चुका है. किसी भी नए कपल्सके लिए ऐसी सिचुएशन बहुत भयानक है. इसकी वजह से उन्हें लगातार थकावट और anxiety का भी सामना करना पड़ रहा था. उनके अंदर एक दूसरे के साथ सेक्स करने की इच्छा ही खत्म होती जा रही थी. उन्हें अब अपने रिश्ते का फ्यूचर कुछ अच्छा नज़र नहीं रहा था.”

तभी उन्हें किसी चाहने वाले ने meditation को अपने जीवन में लाने की सलाह दी, उन्हें भी दूसरा कोई रास्ता नहीं दिखा. सलाह देने वाले ने कहा कि “अगर आपको ध्यान करने में परेशानी हो, तो शुरुआत में आप इसे सिर्फ 5 मिनट करें. जैसे- जैसे आप अपने दिन का 5 मिनट meditation को देने लगेंगे. आपके जीवन में बेहतर बदलाव होने लगेंगे.”

इसके बाद कपल्स ने 5 मिनट के पहले सेशन से ध्यान करने की शुरुआत की, शुरू में उन्हें थोड़ा अजीब सा भी लग रहा था. ख़ास बात ये है कि पहला सेशन उन्होंने अपनी ऑफिस चेयरमें ही किया, उन्हें थोड़ा अजीब भी लगा, इस बारे में बताते हुए लेखककहते हैं कि “शुरुआत में तो उन्हें कत्तई विश्वास नहीं था कि 5 मिनट के ध्यान से उनके जीवन में बदलाव आ सकते हैं.”

लेकिन धीरे-धीरे उन्हें अपनी मेंटलऔर फिजिकल हेल्थमें पॉजिटिवबदलाव महसूस होने लगे, जिससे उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें ध्यानके और ज्यादा करीब जाना चाहिए. फिर उन्होंने साथ में ध्यान करने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया.

जब दोनों का मूड अच्छा रहने लगा, तो दोनों खुश भी रहने लगे, उन्हें एक दूसरे के साथ समय बिताना भी अच्छा लगने लगा. उन्हें एहसास हुआ कि लाइफ में खुश रहने के लिए केवल सेक्स बस ज़रूरी नहीं है. बल्कि और भी बहुत से फैक्टर्स हैं, जिनको सही करके आप ख़ुशी को हासिल कर सकते हैं.

इस एग्जाम्पल से आपको समझ में आ गया होगा कि ध्यान की मदद से अपनी आत्मा को बेहतर बनाया जा सकता है.

आज जितने भी लोग मोटिवेशनल स्पीकर्स के दरबार में महंगे टिकट लेकर जाते हैं. उन्हें पता भी नहीं है कि ध्यान के रूप में उनके पास कितनी बड़ी शक्ति है? इस शक्ति की मदद से वो अपनी इन्द्रियों को जगा सकते हैं. फिर उन्हें कभी भी किसी भी स्पीकर या डॉक्टर के यहाँ जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

लेकिन ये बात भी सच है कि ध्यान तक पहुँचने के लिए आपको
pornography की लत छोड़नी ही होगी. इसके लिए आप कल का बहाना नहीं मार सकते हैं. क्योंकि आपको पता होना चाहिए कि किसी का भी ‘कल’ कभी नहीं आता है. लाइफ को बेहतर करने की शुरुआत आज से ही होती है. इसलिए आपको भी pornography को छोड़ने की शुरुआत आज से ही करनी होगी.

ऐसा नहीं है कि अचानक से ही कोई लत छूट जाती है. आपके लिए इसे छोड़ना बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला है. इसलिए आज से ही अपने दिमाग को ट्रेंड करने की शुरुआत करिए, आपको पता होना चाहिए कि आप दिमाग को ट्रेंड करके कुछ भी हासिल कर सकते हैं.

किसी भी लत को छोड़ने के लिए सबसे पहले ये एक्सेप्ट करना पड़ता है कि आप उस लत के शिकार हैं? पता नहीं क्यों लेकिन आज कल के लड़कों को कुछ भी एक्सेप्ट करने में बड़ी दिक्कत होती है. इसलिए आज कल के टीनेजर्स, आप लोग इस बात को एक्सेप्ट करिए कि आपको pornography की लत लग चुकी है. जब आप इस बात को एक्सेप्ट कर लेंगे तब आप खुद के अंदर बदलाव करने के लिए तैयार हो जाएंगे.

आपको समझना होगा कि अरबों लोग रोज़ाना पॉर्न वेबसाइट, क्लिप्स और फ़ोटोज़ देखते हैं. इन्हें दोस्तों से शेयर करते हैं, इनके बारे में बातें करते हैं और तो और ज्यादातर समय पॉर्न के बारे में ही सोचते भी हैं. रोज़ के इस रूटीन के चलते वे पॉर्न एडिक्ट हो जाते हैं, जिस वजह से पॉर्न देखे बिना उनका गुजारा नहीं होता. इसलिए porn addiction को छोड़ने के लिए पहले आपको तैयार होना पड़ेगा.

जिन लोगों को भी porn देखे बिना नींद नहीं आती है, या फिर वो कितने भी बिज़ी स्केड्यूल से porn के लिए समय निकाल ही लेते हैं. उन्हें समझ जाना चाहिए कि वो porn की लत में फंस चुके हैं.

इसी एडिक्शन की वजह से आज कल लोगों को अकेलापन अच्छा लगने लगा है. इस एडिक्शन की वजह से इंसान की फोकस करने की क्षमता भी खराब होती जाती है. छोटी-छोटी बातों पर मूड स्विंग होता है, सोशल लाइफ खत्म हो जाती है, सेहत खराब होती है, मेमोरी खराब होती है, चीजें भूलने लगते हैं, काम से फोकस हट जाता है, और सेक्स लाइफ भी बिल्कुल खराब हो जाती है.

अगर कोई ये सोचता है कि porn देखने से वो बेहतर सेक्स कर पायेगा तो ये उसकी गलत फहमी है. इस गलत फहमी को तोड़ने के लिए उसे कभी अपनी पत्नी से सेक्स के बारे में खुलकर बात कर लेनी चाहिए. उसे पता चल जाएगा कि सेक्स को लेकर उसे कितना कम ज्ञान है?

शायद porn addiction से कुछ समय के लिए कोई प्लेज़र मिल जाता हो. लेकिन आपको पता होना चाहिए कि ये दारु की नशा से भी ख़राब चीज़ है. कुछ समय के प्लेज़र की वजह से एडिक्ट आदमी की पूरी लाइफ खराब हो जाती है.

इतनी चर्चा के बाद ये तो करीब-करीब सभी को पता हो चुका है कि अल्कोहल के अलावा porn addiction भी इन्सान की हेल्थ के लिए खतरनाक होती है.

यही वजह है कि वैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं और कहते भी हैं कि इंसान के लिए porn addiction एक इवोल्यूशनरी एक्सीडेंट है. वैज्ञानिक के अनुसार porn addiction एक ऐसी लत बन जाती है. जो कि इंसानी दिमाग जानता है कि इसका कोई फायदा नहीं है. लेकिन फिर भी हम उसे छोड़ नहीं पाते हैं. अब आप खुद सोचिए कि porn इंसान को कितना मज़बूर बना देती है? कि उसे पता होता है कि ये उसके लिए एक ज़हर की तरह है. फिर भी वो उसे कन्ज्यूम करता रहता है.

इस बारे में लेखक आगे कहते हैं कि porn को लेकर सवाल भी यही उठता है कि आखिर ऐसा व्यवहार एक्सिस्ट क्यों कर रहा है? इस तरह के और भी कई बिहेवियर हैं, जिनके बारे में इंसान को मालुम होता है कि इनका कोई पर्पस नहीं है? लेकिन फिर भी उसे वो छोड़ नहीं पाता है. ये बात दिखाती है कि हमें डीसीप्लीन की कितनी ज्यादा ज़रूरत है? हमारे अंदर पेशन्स और डीसीप्लीन पूरी तरह से खत्म हो चुका है.

इसी डीसीप्लीन और पेशन्स को अचीव करने के लिए हमें “sexual detox” प्रोसेस की ज़रूरत है.

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि डीसीप्लीन और पेशन्स की मदद से हम porn addiction को छोड़ सकते हैं. लेकिन हमें ये भी पता होना चाहिए कि porn addiction के लक्षण कैसे होते हैं? वैसे तो ये बात भी सच है कि अलग-अलग लोगों में पॉर्न एडिक्शन के लक्षण भी अलग हो सकते हैं लेकिन इसके बावजूद कुछ बेहद ही कॉमन लक्षण भी दिखते हैं.

जैसे कि किसी लड़के का पॉर्न देखने से खुद को रोक नहीं पाना, या फिर अपने मोबाइल फोन में कई जीबी porn movies को डाउनलोड करके रखना, या फिर पॉर्न देखने के लिए पैसा और वक्त, दोनों हद से ज्यादा खर्च करना.. ये जानते हुए कि porn देखने से नुकसान हो रहा है, लेकिन फिर उसे देखने से खुद को रोक नहीं पाना.. अपनी प्रेमिका या पत्नी से porn star की तरह सेक्स करने उम्मीद रखना.

ये सब कुछ बेसिक सी बातें हैं, जिनसे कोई पता कर सकता है कि वो porn addiction के कितने नज़दीक पहुँच चुका है.

जब आपको लक्षण के बारे में पता चल चुका है, तो इसके कारणों के बारे में भी थोड़ा जान लेते हैं. आम तौर पर किसी चीज़ की लत तभी लगती है, जब आप अपनी रेगुलर लाइफ से खुश या संतुष्ट होना बंद कर देते हैं. अब चाहे वह सोशल लाइफ हो या पर्सनल लाइफ, ह्यूमन बॉडी हो या इंसान का मन, जब भी यहाँ खुशी का अनुभव कम होता है. तो इंसान ख़ुशी की तलाश करने झूठी जगहें निकल जाता है. उन्हीं में से एक जगह porn website की झूठी दुनिया भी है. जहाँ के जंजाल में फंसने के बाद उससे बाहर निकल पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है.

आपको इसी जंजाल से बाहर निकालने के लिए लेखक tim challies ने इस किताब को लिखा है. जिसमें बताई गईं टिप्स और ट्रिक्स से आप porn addiction से बाहर आ सकते हैं. इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है. बस इन टिप्स और ट्रिक्स को अपनी लाइफ में अप्लाई करने की शुरुआत कर देनी है.

इन टिप्स में सबसे बड़ी टिप ये भी है कि कॉम्प्लिमेंटरी मिले फ्री इंटरनेट डेटा का सही इस्तेमाल करना सीखिए. अगर इसका सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. तो कम से कम एक महीनें के लिए मोबाइल फोन से दूरी बना लीजिए. युवाओं को पोर्न की लत लगवाने में बहुत बड़ा रोल कॉम्प्लिमेंटरी मिले फ्री इंटरनेट डेटा का भी है. आपको पता होना चाहिए कि आप इस डेटा की मदद से अपनी लाइफ को पॉजिटिव दिशा में भी बदल सकते हैं. इस डेटा की मदद से आप करियर में भी बहुत अच्छा कर सकते हैं. लेकिन उसके लिए आपको इसका सही यूज़ करना सीखना होगा.

आपको अपने अंदर इतनी समझदारी तो पैदा करनी ही होगी कि “सही और ग़लत के बीच की महीन रेखा नज़र आ सके..”

आज के यूथ को पता होना चाहिए कि पॉर्न देखने का ज़रिया सस्ता और आसान होने से पॉर्न एडिक्शन बढ़ गया है. इस वजह से कई तरह की नेगेटिविटी देखी जा रही है, जिसका ट्रीटमेंट होना बहुत ज्यादा ज़रूरी है.

अगर आपकी पोर्न की लत काफी ज्यादा है तो पॉर्न के सभी सोर्सेज़ को खत्म करने की शुरुआत करिए जैसे पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क या फिर मोबाइल फाइल, सभी से पॉर्न डिलीट कर दीजिए.

खुद को बताइए कि पॉर्न वेबसाइट इंटरटेनमेंट का सोर्स नहीं हैं. इसलिए उन पर विजिट करने की गलती नहीं करनी है. इसके बाद शुरू होती है ब्लॉक करने की प्रोसेस, आपको पोर्न वेब साईट को हमेशा के लिए ब्लॉक करना होगा.

इसी के साथ आपको एंटी पॉर्न सॉफ्टवेयर को खरीदना होगा. इसमें कुछ पैसा खर्च हो सकता है. लेकिन ये पैसा आपके ऊपर किया गया इन्वेस्टमेंट साबित होगा. उन सॉफ्टवेयर की वजह से फ्यूचर में कभी पोर्न से जुड़े हुए ऐड्स भी आपके सामने नहीं आ पाएंगे. आपको पता होना चाहिए कि ये सब कदम आसान नहीं होने वाले हैं. लेकिन इन एफर्ट्स की वजह से आपकी “sexual detox” की जर्नी आगे बढ़ेगी. इसी जर्नी की मदद से आप पोर्न की लत को खत्म कर पाएंगे.

इसलिए आपको पता होना चाहिए कि इसका ट्रीटमेंट आपको अपने अंदर से शुरू करना है. आपको आज से ही “sexual detox” मोड को ऑन करना है और मोबाइल और इंटरनेट से दूरी बनाकर रखनी है.

हालाँकि, ये दूरी बहुत दिनों तक नहीं बनानी है क्योंकि बस दूरी बनाने से कोई भी एडिक्शन कम नहीं हो सकती है. एडीकशन खत्म करने के लिए डिसीप्लीन और इच्छाशक्ति का होना बहुत ज़रूरी है.

इन दोनों ही फैक्टर्स को मज़बूत करने के लिए स्पिरिचुअल जर्नी का रास्ता पहले ही बता दिया गया है. स्पिरिचुअल जर्नी की मदद से आपकी मुलाक़ात एक नए नज़रिए से होगी. जिसकी वजह से आपको पता चलेगा कि फ्यूचर की लाइफ में कितनी अच्छी-अच्छी चीजें हैं? हम क्यों अपना आज और फ्यूचर porn जैसी चीज़ों में वेस्ट कर रहे हैं?

 

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लेखक इमोशनल अपील करते हुए कहते हैं कि “मुझे उम्मीद है कि इस किताब की मदद से आपको पोर्न के बारे में एक नए नज़रिए को पैदा करने में मदद मिलेगी. क्योंकि बिना नए नज़रिए की मदद से pornography के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है.. इसी के साथ-साथ इस किताब की मदद से आपको pornography के destructive nature को जानने का भी मौका मिला है.”

इसी के साथ आपको पता चला है कि किस तरह pornography इस समाज और हम लोगों के परिवार को खोखला करती जा रही है? इसलिए अभी भी समय है कि हम सेक्स शब्द को टैबू से बाहर निकाल दें और इसके बारे में खुलकर बातचीत करें.

वैसे तो pornography को छोड़ने के लिए कई रास्ते अपनाए जा सकते हैं. लेकिन एक रास्ता बहुत कारगर साबित हो सकता है. वो ये है कि आपको अपने डर को खत्म करना होगा. ये डर है किसी भी बदलाव की शुरुआत करने का डर.. क्या आप भी इस डर के शिकार में लाइफ को बर्बाद कर रहे हैं?

हिंदी सिनेमा के अभिनेता आशुतोष राणा ने क्या खूब कहा है कि “नज़र को बदलो, नज़ारे बदल जाएंगे, सोच को बदलो, सितारे बदल जायेंगे.. कश्तियां बदलने की जरूरत नहीं, दिशा को बदलो किनारे बदल जायेंगे………..”

इस पंक्ति में नज़रिए के महत्व के बारे में बात की गई है. बताया गया है कि इंसान अपनी लाइफ की दिशा बदलकर पूरी ज़िन्दगी को पॉजिटिव दिशा की ओर मोड़ सकता है. इसी के साथ ये भी बताने की कोशिश की गई है कि किसी भी सिचुएशन के रिजल्ट को बदलने के लिए, बस नज़र को बदलने की ज़रूरत पड़ती है.

इस किताब की मदद से कुछ ऐसी ही कोशिश लेखक ने भी की है. उन्होंने भी porn जैसा टॉपिक जो कि टैबू बन चुका है. उसके ऊपर लोगों के नज़रिए को बदलने की काबिले तारीफ़ कोशिश की है.

लेखक tim challies इस किताब के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि “अब हम इस सफर के आखिरी पड़ाव में पहुँच चुके हैं. तो आपको बता दूं कि इस किताब को लिखने की जर्नी मेरे लिए बहुत इमोशनल रही है. इस किताब को मैंने आदमियों को सेंटर में रखकर लिखा है. क्योंकि जब मैं ‘sexual detox’ नाम का ब्लॉग सीरीज लिख रहा था.

तो कई महिलाओं ने मुझसे उनके हसबैंड की pornography की लत के बारे में बात की थी. उन औरतों की संख्या कोई 100-200 में नहीं थी. बल्कि बहुत ज्यादा थी, तब मुझे समझ में आया कि इस टॉपिक के ऊपर रिसर्च करना कितना ज़रूरी है? ना जाने कितने लोगों की रोमांटिक रिलेशनशिप बस इस वजह से खत्म हो रही हैं कि एक पार्टनर पोर्न की लत का शिकार है. इसलिए इस किताब में सिर्फ और सिर्फ यंग आदमी के लिए बातें नहीं बताई गईं हैं. इन टिप्स को कोई भी किसी भी उम्र का फॉलो कर सकता है और अपनी लाइफ को बेहतर बना सकता है.”

इसी के साथ लेखक ये भी कहते हैं कि “आपको कई लोग ऐसा भी कहते मिल जाएंगे कि यार कभी-कभी पोर्न देख लेना चाहिए. हफ्ते में एक बार देखने से कुछ नहीं होता है. सबसे पहले उन लोगों को बता दीजिएगा कि जो चीज़ ग़लत होती है. वो ग़लत ही होती है. क्या आप हफ्ते में एक दिन चोरी कर सकते हैं? या फिर कुछ समय के लिए कोई और गलत काम.. नहीं ना.. फिर कुछ समय के लिए पोर्न क्यों देखना?

अब आप तर्क दे सकते हैं कि चोरी करना तो जुर्म है, उसमें किसी और का नुकसान होता है. इसके लिए आपको बता दें कि पोर्न देखने से आप खुद का भी और अपनी पत्नी का भी नुकसान करते हैं. आपकी पोर्न की लत से पत्नी की इच्छाओं का दम घुटता है. ना जाने कितने रोमांटिक रिश्ते इस वजह से खत्म हो जाते हैं? इसलिए पोर्न देखना बिल्कुल भी सही नहीं है. इस गंदी आदत को जल्दी से जल्दी छोड़ देना चाहिए.

इसी के साथ इस बात को भी याद रखिएगा कि कोई भी लत बताकर नहीं लगती है. हर लत की शुरुआत थोड़े-थोड़े से ही होती है. लेकिन फिर इंसानी दिमाग कब उस लत का शिकार हो जाता है? उसे पता भी नहीं चलता.

इसलिए पोर्न की लत से खुद को बाहर निकालने की कोशिश करते रहना चाहिए. जैसे-जैसे आप ये करते जाएंगे. आपका रोमांटिक रिश्ता भी बेहतर होता जाएगा.

अगर हम रोमांटिक रिश्ते के बारे में बात करें तो उसको बेहतर करने में कम्युनिकेशन का भी बड़ा रोल होता है.

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पार्टनर के साथ फन करना ज़रूरी होता है. अब आपको पता होना चाहिए कि उससे बात- चीत कैसे करनी है? इफेक्टिव कम्युनिकेशन भी एक आर्ट है, इसे आपको सीखना होगा.

आपको बता दें कि इफेक्टिव वर्बल कम्युनिकेशन के दो एलिमेंट होते हैं. पहला-एक्सप्रेशन और दूसरा- वैलीडेशन, इन दोनों की मदद से आप अपनी पार्टनर से इफेक्टिव कम्युनिकेशन कर सकते हैं. इसका मतलब ये है कि जब भी आप अपनी पार्टनर से बात करें तो आपका हाव-भाव क्लियर और पॉजिटिव होना चाहिए.

पार्टनर को ऐसा लगना चाहिए कि आप उनकी बात को ध्यान से सुन रहे हैं. इसी के साथ उनके साथ ऑय कांटेक्ट बनाने की भी कोशिश करनी चाहिए. कई बार ऐसा होता है कि दिल की सारी बातें आँखों में छुपी हुई होती हैं. इसलिए सेक्स जैसे प्योर आर्ट में आँखों के रोल के बारे में भी आपको पिछले एपिसोड्स में बता दिया गया है. इस टिप को भी अपनी लाइफ में अप्लाई करने की कोशिश करिएगा.

प्यार से बात करने से बड़ी से बड़ी दिक्कत सॉल्व हो सकती है. इसलिए बातचीत के दौरान अपने दिमाग का स्विच ऑन रखने की कोशिश करनी चाहिए. हेल्दी कन्वर्सेशन में डायरेक्ट बात होती है. इस बातचीत में आपको सामने वाले को सुनना भी है. साथ ही साथ आपको जजमेंटल नहीं होना चाहिए.

लेकिन इसके साथ आपको इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि रिलेशनशिप में स्पीच नहीं दी जाती है. बात सुनी भी जाती है, इसी क्लास ऑफ़ आर्ट को कन्वर्सेशन कहते हैं.इस किताब में सेक्स से जुड़ी हुई तमाम बातों पर चर्चा की गई है. इसलिए इस बुक समरी की बातों को दिल से समझिए और उन्हें अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाने की कोशिश करिए. अगर आप ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय बाद आप अपनी ज़िन्दगी में पॉजिटिव बदलाव ज़रूर महसूस करेंगे.

दोस्तों, pornography के जंजाल और sex से जुड़ी रोचक जानकारी को जानने के लिए आज हम ‘येबुक’ एप पर चर्चा कर रहे थे…… लेखक “tim challies” की लिखी किताब “sexual detox”: guide for guys who are sick to porn के बारे में….

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