
अपने सबसे बड़े दुश्मन ईगो से लड़ना सीखें। Ego is the enemy
ईगो इज़ द एनेमी (Ego is the enemy) में हम हमारे अंदर छिपे उस दुश्मन के बारे में जानेंगे जो हमें कामयाब नहीं बनने देता। हम यह देखेंगे कि ईगो किस तरह से हमारे लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसे काबू करना क्यों जरूरी है और किस तरह से हम इसे काबू कर सकते हैं।
लेखक Ryan Holiday
रेयान हॉलिडे (Ryan Holiday) अमेरिका के एक मार्केटर, लेखक और आन्त्रप्रीन्योर हैं। उन्होंने अब तक चार किताबें लिखीं हैं। वे अमेरिकन अपेरल के मार्केटिंग डाइरेक्टर रह चुके हैं। वे न्यूयॉर्क आब्जर्वर के मीडिया कालमिस्ट भी रह चुके हैं।
Ego is the enemy जो ईगो के बारे में जानना चाहते हैं।
किसी महान व्यक्ति ने एक बार कहा था जब आप अपने अंदर के दुश्मन से जीत जाते हैं, तो बाहर का दुश्मन आपका कुछ नुकसान नहीं कर सकता। अंदर के दुश्मन बहुत सारे होते हैं जैसे आलस, गुस्सा और घमंड। लेकिन इस किताब में हम एक खास तरह के दुश्मन की बात करेंगे जिसका नाम है – ईगो।
ईगो हमारे चरित्र का वो हिस्सा है जो हमारे बारे में हमेशा अच्छा सोचता है। अपने बारे में अच्छा सोचना गलत बात नहीं है, लेकिन जब आप अपनी कमियों को अनदेखा कर के, अपने गलत काम को भी अच्छी नजर से देखने लगते हैं, तो यह नुकसानदायक हो सकता है। यह किताब हमें बताती है कि ईगो असल में होता क्या है, किस तरह से आप इसे काबू कर सकते हैं और इसे काबू ना करने के क्या नुकसान हैं।
ईगो किस तरह हमारा दुश्मन हो सकता है।
विनम्रता और महत्वाकांक्षा किस तरह से हमारे ईगो को काबू कर सकते हैं।
खुद को हमेशा एक स्टुडेंट समझने का क्या फायदा है।
बिना काम किए तारीफ की ख्वाहिश करना ही ईगो है।
हम में से हर किसी को अपनी तारीफ सुनना पसंद है, भले ही वे तारीफ झूठी ही क्यों न हो। लेकिन अगर कोई हमारी मुलाकात हमारी बुराइयों से करा दे तो हम बुरा मान जाते हैं। ऐसा क्यों होता है कि झूठ एक छलावा होने के बाद भी इतना अच्छा लगता है और सच असलियत होने के बाद भी खराब? इसका जवाब है – हमारे ईगो की वजह से।
ईगो हमारे अंदर की वो भावना है जो चाहती है कि उसे हर उस अच्छे काम के लिए शाबाशी मिले जो उसने नहीं किया। इस ईगो को बहुत तकलीफ होती है जब हम इसे बताते हैं कि यह गलत है। यह चाहता है कि लोग इसकी इज्जत करें, भले ही वो इज्जत के लायक हो या ना हो।
ईगो का उल्टा होता है महत्वाकांक्षा। इसका मतलब यह है कि आपको जो चीज़ चाहिए आप उसे अपनी मेहनत से हासिल करेंगे। अगर आपको पैसे चाहिए तो आप इस बात की उम्मीद नहीं करेंगे कि आपके माता-पिता या आपका कोई दोस्त आपको पैसे दे। इसका मतलब है आप उसे खुद कमाएंगे।
एक्ज़ाम्पल के लिए आप अमेरिका के प्रेसिडेंट युलाइसेस ग्रैंट को ले लीजिए। वे अपने मिलिट्री के दिनों में बहुत फेमस हुआ करते थे। उन्होंने इसका फायदा उठाया और वे प्रेसिडेंट के लिए खड़े हो गए और जीत भी गए। लेकिन उन्हें राजनीति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। दूसरे शब्दों में उन्हें वो चीज़ मिल गई जिसके वो लायक नहीं थे।
दूसरी तरफ विलियम टेकुसे शर्मन भी ग्रैंट के साथ मिलिट्री में काम करते थे। वे भी बहुत कामयाब था लेकिन उन्होंने उस चीज़ को हासिल करने की जिद्द नहीं की जिसके लिए वे अभी तैयार नहीं थे। वे मिलिट्री में एक लीडर बनने की कोशिश में लग गए। इसे महत्वाकांक्षा कहा जाता है। जब आप किसी चीज़ को हासिल करने के लिए मेहनत करते हैं तब आप महत्वाकांक्षी कहे जाते हैं।
यह सोचिए कि आपको अभी भी बहुत कुछ सीखना है।
बहुत से लोगों को सब कुछ पता होता है। शायद आप ने कुछ इस तरह के शब्द सुने होंगे- “मुझे मत समझाओ, मुझे पता है तुम क्या बोल रहे हो।” या फिर “जो तुम कर रहे हो वो हम कर के छोड़ चुके हैं, इसलिए मुझे मत पढ़ाओ”। जैसा कि हमने पहले कहा कि ईगो उस चीज़ को पाना चाहता है जिसके वो लायक नहीं है। इसलिए बहुत बार हम खुद को इस वहम में डाल लेते हैं कि हम बहुत चालाक हैं और हमें सामने वाले से ज्यादा पता है।
अपने ईगो को काबू में करने का एक अच्छा तरीका यह है कि आप हमेशा खुद को एक स्टुडेंट की तरह देखिए। वो हर एक व्यक्ति जिससे आप इस दुनिया में मिलते हैं, कुछ ना कुछ ऐसा जरूरत जानता है जिसका आप ने नाम भी नहीं सुना। इसलिए जब भी कोई आपको कुछ बताने की कोशिश करे तो आप उसकी बात को सुनिए।
शायद आप ने बिल गेट्स या वैरन बुफ्फे का नाम सुना होगा। ये लोग दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। ना जाने कितना पैसा कमा लेने के बाद भी और ना जाने कितने बिजनेस खरीदने, बेचने और बनाने के बाद भी बिल गेट्स साल में लगभग 80 किताबें पढ़ते हैं और वैरन बुफ्फे हर रोज 5 अखबार पढ़ा करते हैं।
जब आप खुद को एक स्टुडेंट की तरह देखते हैं तो आप कभी यह नहीं सोचते कि आपको सब कुछ पता है। आप खुद से बेहतर लोगों को खोज निकालते हैं जो कि आपको कुछ नया सिखा सकें। बिल गेट्स जिन लेखकों की किताब पढ़ते हैं, वे लेखक उनके जितने कामयाब बिल्कुल भी नहीं हैं, लेकिन फिर भी वे खुद को एक स्टुडेंट बना कर रखते हैं और अपने ईगो को हावी नहीं होने देते।
गिरने से पहले घमंड पैदा होता है।
कभी कभी हम एक कामयाबी के लिए खुद को इतनी सराहना देने लगते हैं कि हम यह भूल जाते हैं कि अभी तो हमने शुरुआत की है। जब हम शुरुआत में इतनी कामयाबी हासिल कर सकते हैं तो आगे के सफर में ना जाने कितने मुकाम हासिल कर सकते हैं।
जब हम एक बार कामयाब हो जाते हैं तो हमें लगता है कि अब हम सब कुछ हासिल कर चुके हैं। इसे ही घमंड कहते हैं जो ईगो का एक अच्छा दोस्त है। ये दोनों हमेशा साथ साथ रहा करते हैं। एक छोटी कामयाबी हासिल कर लेने पर हम सीखना छोड़ देते हैं और वहीं से हमारा गिरना शुरू हो जाता है। हम अपने आस पास की चेतावनी को अन्देखा करने लगते हैं और अगर कोई हमें सलाह देता है, या फिर हमें बताता है कि अभी हम बहुत पीछे हैं तो हम बुरा मान जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे घमंड का दोस्त, हमारा ईगो, उसे बचाने के लिए आ जाता है और हमें यह एहसास दिलाने लगता है कि हम सब कुछ हासिल कर चुके हैं, जो कि अभी नहीं हुआ है।
विनम्रता हमें बहुत कुछ सिखाती है। यह हमें बताती है कि हमें अभी भी बहुत दूर तक जाना है और अगर हम एक पेड़ की तरह अकड़ जाएंगे तो आँधी हमें तोड़ कर गिरा देगी। लेकिन अगर हम एक पौधे की तरह लचीले रहेंगे, तो आँधी आने पर हम झुक जाएंगे और उसे सहकर फिर से खड़े हो जाएंगे। इसलिए विनम्रता को अपनाइए।
दूसरों के काम की इज्जत करना सीखिए।
बहुत बार ऐसा होता है कि हम किसी को दूसरे व्यक्ति से नहीं करवा कर खुद ही करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि वो व्यक्ति हमारे काम को बिगाड़ देगा। हम सोचते हैं कि उस काम को हम से अच्छा कोई नहीं कर सकता और इसलिए हम सारे काम खुद करने लगते हैं।
इस तरह से काम करना यह दिखाता है कि आपका ईगो आप पर हावी हो चुका है। इसके अलावा इस तरह से काम करना आप के लिए एक बोझ भी हो सकता है। हम चाहते हैं कि हमें अपने काम के लिए तारीफ मिले। इसलिए हम सारे काम खुद करने लगते हैं। लेकिन अपनी टीम के साथ मिलकर काम करना और साथ ही उनके काम को भी महत्व देना यह दिखाता है कि आप एक अच्छे लीडर हैं।
सारे कामों को खुद करना छोड़ कर कुछ कामों को दूसरों को करने दीजिए। इससे आपको लोगों की और उनके काम की इज्जत करना सीखते हैं। इससे आप खुद का समय बचा कर दूसरे कामों पर अच्छे से ध्यान दे पाते हैं।
अगर आप एक बिजनेस में हैं तो सब कुछ खुद करने के बारे में सोचना भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। जब आप सारे फैसले खुद लेने लगेंगे तो जाहिर सी बात है कि आप सही फैसले नहीं ले पाएंगे क्योंकि बिजनेस के हर एक पहलू में माहिर हो पाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए बेहतर है कि आप एक टीम बनाएँ और उसपर भरोसा करना सीखें।
एक व्यक्ति के कामयाब होने के पीछे बहुत से लोगों का हाथ होता है।
क्या आपको लगता है कि आप सब कुछ अकेले कर के बिना किसी के मदद के कामयाब हो सकते थे ? क्या आपको लगता है कि आपको आज जो कुछ भी आता है उसे आप बिना किसी के बताए या सिखाए सीख सकते थे ? बिल्कुल नहीं। यहाँ तक की बोलने और चलने जैसे आसान काम भी सीखने के लिए आपको आपके माता पिता की जरूरत पड़ी थी। आप खुद से उतना भी नहीं कर पाते।
कामयाब होने पर हमारे अंदर यह भावना आती है कि हम काबिल हैं। लेकिन जब यह बताने का वक्त आता है कि हम इतने काबिल किसकी वजह से बन पाए तो हम मुँह फेर लेते हैं, क्योंकि हमें लगने लगता है कि ऐसा कर के हम यह जाहिर कर देंगे कि हम कमजोर हैं और खुद से कुछ नहीं कर पाते। एक तरह से यह बात सच है। आप अकेले तो वाकई कुछ नहीं कर पाते, फिर सच से भागना क्यों?
जब हमारे बहुत सारे फैन हो जाते हैं या जब लोगों में यह बात फैलने लगती है कि हम बहुत काबिल व्यक्ति हैं, तो हम अपने काम के साथ साथ अपनी टीम के काम का भी क्रेडिट लेने लगते हैं जो कि गलत बात है। माना कि एक सेलिब्रिटी का कैरिअर इसी बात पर निर्भर करता है कि उसके कितने फैन हैं, लेकिन अपने साथियों के साथ ताल मेल बना कर रहने से और हर हालात में विनम्र बने रहने से कामयाबी हमारे साथ हमेशा के लिए रह जाती है।
जब एक व्यक्ति स्टेज पर खड़ा होकर बोलता है तो अक्सर यह होता है कि उसकी स्पीच किसी और ने लिखी होती है या फिर वो जो आँकड़े बताता है, वो किसी और ने इकट्ठा किया होता है। इसलिए यह जरूरी है कि बोलने के बाद जो तालियाँ उसे मिल रही हैं उसका क्रेडिट वो अपनी टीम को दें। इस तरह से वे उनके साथ एक अच्छा रिश्ता बना सकता है और जहां रिश्ते अच्छे होते हैं, वहाँ सब कुछ अच्छा होता है।
अपनी हार से सीख कर आगे बढ़ते रहिए।
हारने का मतलब यह होता है कि आप जिस चीज़ को हासिल करना चाहते हैं, अभी आप उसके लायक नहीं हुए हैं। लेकिन अगर आपको अपने हारने का बुरा लगता है तो समझ जाइए कि आपका ईगो कहीं ना कहीं हावी हो रहा है। क्योंकि ईगो हमेशा चाहता है कि उसे वो सब मिले जो वो चाहता है, भले ही वो उसके लायक हो या ना हो।
सच बात यह है कि – हारने पर सभी को बुरा लगता है। लेकिन
कामयाब लोग अपनी हार से सीखते हैं। वे यह देखते हैं कि उनसे कहाँ गलती हुई, वे उसे किस तरह से सुधार सकते हैं, या अगर वे उसे नहीं सुधार सकते तो वे ऐसा क्या करें कि अगली बार उनसे वो गलती ना हो। हारने पर आप एक बार फिर से अपनी मेहनत पर ध्यान दीजिए।
हम हर बार इस बात की उम्मीद नहीं कर सकते कि मेहनत का फल मीठा हो। कभी कभी हम किसी काम को अपना सब कुछ दे देते हैं लेकिन फिर भी हमें अच्छे नतीजे नहीं मिलते। इसे ही जिन्दगी कहते हैं और इस जिन्दगी की खास बात यह है कि यह चलती रहती है। तो आप भी अपनी एक हार को पकड़ कर बैठिए मत, उससे सीख कर आगे बढ़िए।
इसके अलावा कभी कभी यह भी होता है कि कम मेहनत कर कर भी हमें कामयाबी मिल जाती है। इसे हम एक तरह से किस्मत कह सकते हैं। लेकिन यह किस्मत धोखेबाज होती है, इसलिए कभी यह मत सोचिए कि आपको हर बार इसी तरह से कामयाबी मिल जाएगी। किसी जीत को भी पकड़ कर मत बैठिए, उसके लिए खुद को शाबाशी दीजिए, और आगे बढ़िए।
जो एक कामयाबी पाने के या एक बार हारने के बाद रुक गए हैं।
ईगो ही हमारा दुश्मन होता है क्योंकि यह हमें इस वहम में डाल देता है कि हमें हर चीज़ की जानकारी है। इस तरह से यह हमें कुछ नया सीखने से रोकता है और साथ ही साथ कामयाब होने से भी। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने ईगो को काबू कीजिए। खुद को हमेशा एक स्टुडेंट की तरह देखिए और विनम्रता को अपनाइए। अपनी कामयाबी के लिए उनका आभार जताइए जो आपके साथ थे। अपनी हार से सीखिए ना कि उसे पकड़ कर बैठिए। इस तरह से आप अपने ईगो को काबू कर सकते हैं।
