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The 7 Habits of Highly Effective People

The 7 Habits of Highly Effective People

The 7 Habits of Highly Effective People
The 7 Habits of Highly Effective People

 

Stephen R. Covey

प्रभावशाली लोगों की 7 आदतें

द 7 हैबिट्स आफ हाइली एफेक्टिव पीपल (The 7 Habits of Highly Effective People) में हम देखेंगे कि एक बेहतर और कामयाब व्यक्ति बनने के लिए आपको कौन सी आदतें अपनानी होंगी। इस किताब में 7 आदतें बताई गई हैं जिन्हें अपना कर आप एक बेहतर व्यक्ति बन सकते हैं। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह हम अपने साथियों, अपने कर्मचारियों या अपने परिवार वालों से अच्छे रिश्ते बना कर उनसे फायदा पा सकते हैं।

लेखक

स्टीफेन आर कोवे (Stephen R. Covey) अमेरिका के एक लेखक, बिजनेसमैन और स्पीकर थे। वे लोगों को शिक्षा देते थे। उन्होंने बहुत सी किताबें लिखीं हैं जिसमें से उनकी अब तक की सबसे प्रसिद्ध किताब है – 7 हैबिट्स आफ हाइली इफेक्टिव पीपल (7 Habits of Highly Effective People)। उनकी मौत 16 जुलाई 2012 को हुई। अपनी मौत से पहले वे जॉन एम हंट्समैन स्कूल आफ बिजनेस के प्रोफेसर थे।

अपनी आदतों को बदल कर खुद को एक बेहतर इंसान में बदलें।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि हम अच्छी आदतें बना कर कामयाबी पा सकते हैं। सुबह जल्दी उठने, अपने समय को महत्व देने, मेहनत करने और अपने काम से प्यार करने जैसी आदतें डाल कर हम कामयाबी पा सकते हैं। लेकिन क्या खुद को बदलने के लिए सिर्फ आदतें बदलना काफी है?

अच्छी आदतों से आप कामयाबी हासिल कर सकते हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है। लेकिन अगर आप पहले से बेहतर इंसान बनना चाहते हैं और अपनी बुरी आदतों को जड़ से खत्म करना चाहते हैं तो आपको अपने चरित्र पर ध्यान देना होगा।

हम सभी के अन्दर कुछ उसूल फिट हैं। हमारी सभी आदतों की जड़ यही उसूल हैं। इन्हीं उसूलों की मदद से हम दुनिया को अपने नजरिए से देख पाते हैं। अगर आपको पूरी तरह से एक बेहतर इंसान में खुद को बदलना है तो आपको इन उसूलों पर ध्यान देना होगा। इस किताब में हम इसी बारे में बात करेंगे।

अपनी सेहत का खयाल रखना क्यों जरूरी है।
शुरू करने से पहले खत्म करने के बारे में सोचना क्यों अच्छा है।
किस तरह से आप अच्छे रिश्ते बना सकते हैं।

अपने अंदर झाँक कर खुद को बदलने की कोशिश कीजिए।

अक्सर लोग सोचते होंगे कि अगर वे अपनी आदतों को बदल दें तो वे एक बेहतर इंसान बन सकते हैं। यह बात कुछ हद तक ठीक है। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि अपनी आदतों को बदल कर आप पूरी तरह से बदल सकते हैं तो आप गलत सोचते हैं। अगर आप अपने घर को ऊपर से पेंट कर दें तो आपका घर पहले से सुंदर दिखता है लेकिन बदलता नहीं।

दूसरे शब्दों में आप अपनी आदतों को पहले से बेहतर बना कर एक कामयाब इंसान बन सकते हैं लेकिन खुद को पूरी तरह से बदल नहीं सकते। इससे आपका नजरिया नहीं बदलता सिर्फ काम करने का तरीका बदलता है। अगर आपको अपना नजरिया बदलना है तो आपको अपना चरित्र बदलना होगा।

खुद की सोच और खुद का नजरिया बदलने के लिए आपको लम्बे रास्ते तय करने होंगे। खुद को पूरी तरह से बदलने के लिए आपको अपने अन्दर झाँक कर यह देखना होगा कि आप असल में क्या हैं और कैसे बनना चाहते हैं। एक बार जब आपका नजरिया बदल जाएगा तो आपकी दुनिया भी बदल जाएगी।

एक्ज़ाम्पल के लिए अगर आप एक अच्छे इंसान बनना चाहते हैं तो सिर्फ दूसरों की मदद करने से आप कभी अच्छे नहीं बन पाएंगे। आप अच्छे तब बनेंगे जब आप दूसरों की परेशानियों को महसूस कर के उसे खुद की परेशानी समझ कर सुलझाने की कोशिश करेंगे।

अपने चरित्र को बदलने के लिए आपको अपने उसूलों को बदलना होगा।

हम सभी के अंदर कुछ ऐसी आदतें होती हैं जिनसे हम जल्दी छुटकारा नहीं पा पाते। हम भले ही कितनी भी कोशिश कर लें, एक समय के बाद हम खुद को वो काम करने से रोक नहीं पाते। इसकी वजह है आपके उसूल। उसूल आपके अंदर की वो भावनाएं होती हैं जिनकी वजह से आप किसी आदत को अपनाते हैं।

तो अगर आपको अपने आप को पूरी तरह से बदलना है तो आपको अपने उसूलों पर काम करना होगा। उसूल ही आपके सभी कामों की जड़ है। एक बार आपने अपने उसूलों को बदल दिया, तो आपकी आदतें भी अपने आप बदल जाएंगी। हमारे उसूल ही यह तय करते हैं कि हम किसी चीज़ को किस तरह से देख रहे हैं। इसलिए अपनी बुरी आदतों को जड़ से खत्म करने के लिए आपको उसूल बदलने होंगे।

अगर आप बेहतर बनना चाहते हैं तो अपने उसूलों को इस दुनिया के सिद्धांत से जोड़ लीजिए। दुनिया के सिद्धांतों में वो बातें आती हैं जिनसे हर कोई सहमत है। उदाहरण के लिए आप ईमानदारी को ले लीजिए। दुनिया में हर कोई एक ईमानदार व्यक्ति पर भरोसा करना चाहेगा। यह एक ऐसा सिद्धांत है जिससे सभी लोग सहमत हैं।

अगर आप अपने उसूलों को दुनिया के सिद्धांत के हिसाब से बदलेंगे तो लोग आप पर भरोसा करेंगे और आप लोगों से बेहतर तरीके से मिल जुल पाएंगे। लेकिन हम अपने उसूलों को कैसे बदलें? आने वाले सबक में हम इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करेंगे।

The 7 Habits of Highly Effective People
The 7 Habits of Highly Effective People

एक बेहतर इंसान बनने के लिए आपको अपनी सेहत का खयाल रखना होगा।

अगर आप अपने हथियारों की धार को तेज किए बगैर युद्ध लड़ते जा रहे हैं तो इसकी भारी संभावना है कि आप युद्ध हार जाएंगे। ठीक उसी तरह अगर आप अपनी सेहत का खयाल रखे बगैर काम किए जा रहे हैं तो आप कामयाब नहीं होंगे। आपकी सेहत आपका हथियार है जिसकी धार आपको तेज करनी होगी।

सेहत चार तरह की हो सकती है और अपने आप को पूरी तरह से सेहतमंद रखने के लिए आपको चारों का खयाल रखना होगा।

– शारीरिक सेहत के लिए आप अच्छा खाना खाइए और रोज कसरत कीजिए। इसके अलावा आप तनाव से दूर रहिए।

– मानसिक सेहत के लिए आप रोज किताबें पढ़िए और कुछ लिखने की आदत डालिए। आप एक डायरी लिखना शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपनी आखिरी मंजिल को देखते हुए अपने हर दिन को प्लान कीजिए।

– सामाजिक सेहत का खयाल रखने के लिए आप ज्यादा से ज्यादा लोगों से अच्छे संबंध बनाइए। आप समाज के साथ घुलना मिलना सीखिए।

– आध्यात्मिक सेहत का खयाल रखने के लिए आप रोज साधना या पूजा कीजिए। इसके अलावा आप अपनी नैतिकता के बारे में हर रोज सोच कर उसके हिसाब से काम करने की कोशिश भी कर सकते हैं।

अगर आप सोच रहे हैं कि आपके पास इतना करने का समय नहीं है तो आप यह बात जान लीजिए कि ये सारे काम आपको लम्बी दौड़ में काफी हद तक फायदा पहुंचा सकते हैं। आपको अपने आप को रिचार्ज करने के लिए कुछ समय देना ही चाहिए।

अपने आप को बाहर के माहौल के हिसाब से मत ढालिए।

ज्यादातर लोग अपनी किस्मत के ऊपर निर्भर रहते हैं। उनके हिसाब से वे कुछ भी नहीं कर सकते अगर उनके आस- पास का माहौल अच्छा नहीं है तो। वे किसी काम को करने के लिए सही माहौल और सही मूड का इंतजार करते हैं।

दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी किस्मत का रास्ता खुद बनाते हैं। वे अपने दिमाग के मालिक होते हैं और अपने काम के हिसाब से अपना मूड बनाते हैं। उन्हें मौसम या माहौल से कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आप कामयाब होना चाहते हैं तो आपको अपने दिमाग का मालिक बनना होगा।

इंसान इसलिए जानवरों से अलग होते हैं क्योंकि वे अपने दिमाग पर काबू पा कर उस से माहौल के हिसाब से काम करवा सकते हैं। एक जानवर एक जैसी ज़िन्दगी जीता है। लेकिन इंसान अपनी आदतों को बदलने की जिम्मेदारी उठा कर खुद को बदल सकता है।

कामयाब लोगों को मौसम या माहौल से फर्क नहीं पड़ता। वे अपने नियमों के हिसाब से काम करते हैं और उन्हें बाहर के किसी भी नियम या हालात से कोई फर्क नहीं पड़ता। वे हमेशा अपनी समस्या से निकलने के लिए कोशिश करते हैं। वे कभी भी शिकायत नहीं करते।

दूसरी तरफ जो माहौल के हिसाब से रहते हैं वे हमेशा कहते रहते हैं कि – “इसमें हम क्या कर सकते थे?” या फिर “वो मेरी गलती नहीं थी।” वे हमेशा बाहर की चीज़ों को दोष देते रहते हैं।

आप शुरू करने से पहले खत्म करने के बारे में सोचिए।

आइए हम कुछ सवालों पर गौर करें। आप अब से 20 साल के बाद अपने आप को कहाँ देखते हैं? वो कौन सी चीज है जिसे हासिल कर लेने के बाद आपको किसी चीज़ की ख्वाहिश नहीं होगी? अगर आप इन सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं तो आप एक गोल रास्ते पर दौड़ रहे हैं जो आपको कहीं नहीं ले जा रहा है।

ज्यादातर लोग अपनी रोज की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। वे कुछ भी हासिल करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। वे सिर्फ अपना खर्च चलाने के बारे में सोचते हैं। इसलिए वे जिन्दगी भर सिर्फ अपना खर्च चलाते रह जाते हैं। आप जिस चीज के बारे में सोचते हैं वही बन जाते हैं।

सबसे पहले आपको यह तय करना होगा कि आप किस चीज़ को हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए आप अपना एक बड़ा मिशन तय कीजिए और उसके हिसाब से काम करना शुरू कीजिए। आप खुद से कुछ इस तरह के सवाल कीजिए – ” मरने के बाद लोग मुझे किस काम के लिए याद रखेंगे? ”

अगर आप अपनी मंजिल के बारे में जानते रहेंगे तो आप उसके हिसाब से एक रास्ता बना कर उस पर चल सकेंगे। आपके सारे काम उस मंजिल को पाने की दिशा में होंगे जिससे आपकी जिन्दगी गोल – गोल नहीं घूमेगी। और आप आगे बढ़ते रहेंगे।

आप अपने लक्ष्य को लिख लीजिए। उसमें आप लिखिए कि आप किस तरह से काम करना चाहते हैं, क्यों काम कर रहे हैं और कहाँ पहुंच कर आप चैन की साँस लेंगे। इसे आप रोज देखकर खुद को याद दिलाइए कि आपकी जिन्दगी का मकसद क्या है।

The 7 Habits of Highly Effective People
The 7 Habits of Highly Effective People

किसी भी काम को करने से पहले उसके नतीजों के बारे में सोच लीजिए।

अगर कोई आप से पूछे कि ताजमहल सबसे पहले कहाँ बना था, तो शायद आप जवाब में आगरा कहेंगे। लेकिन आपको बता दें, ताजमहल सबसे पहले किसी के दिमाग में बना था, फिर उसे आगरा में बनाया गया। इसलिए किसी भी काम को करने से पहले उसके बारे में सोच लेने से आप कामयाबी हासिल कर सकते हैं।

इसके लिए आपको दो बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले तो आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपको जाना कहाँ है और आपके उसूल क्या हैं। इन बातों को ध्यान में रखने से आप वही काम करेंगे जो आपके आपकी मंजिल की तरफ ले कर जायेंगे। अगर आप इस बारे में नहीं सोचेंगे तो आप एक ही जगह पर गोल गोल घूमते रहेंगे।

इसके बाद आपको यह ध्यान में रखना है कि आप जो भी काम कर रहे हैं उसका नतीजा क्या होगा। आप अपने दिमाग में उस काम को करने के तरीके के बारे में विस्तार से सोच लीजिए जिससे आपको वही नतीजा मिले जिसकी आप उम्मीद कर रहे हैं।

इस तरह से आप किसी भी हालात में काम कर सकते हैं। अगर आप एक सेल्समैन हैं तो आप अपने कस्टमर से किस तरह से बात करेंगे और कैसे उसे अपना प्रोडक्ट खरीदने के लिए उकसाएँगे इसका फैसला पहले ही कर लीजिए। इस काम के लिए आप जो समय देंगे वो कभी बेकार नहीं जाएगा। जल्दबाजी में उठाया गया कदम ठीक नहीं होता। इसलिए आप प्लानिंग कर लीजिए।

उस काम को सबसे पहले कीजिए जो आपको आपकी मंजिल के करीब लेकर जाएगा।

अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए आपको उसे हर दिन जीना होगा। आपको हर दिन कुछ ऐसा काम करना होगा जिससे आप अपनी मंजिल के करीब जा सकें। इसके लिए आपको आदतें बनानी होगी जो लम्बे समय तक आपके साथ रह सकें।

हम अक्सर उस काम को ज्यादा समय देते हैं जिसे करने से हमारे काम करने की क्षमता बढ़ती है। हम हमेशा किसी चीज़ की प्रैक्टिस करते रहते हैं जिससे हम कम समय में उस काम को बेहतर तरीके से कर पाएँ। लेकिन हम कभी अपने काम करने के तरीके को सुधारने के बारे में नहीं सोचते। आपको अपने काम करने के तरीके को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

इसके लिए आप उस काम को सबसे पहले कीजिए जो आपको आपकी मंजिल के करीब लेकर जाए। आप अपने सबसे जरूरी काम को सबसे ऊपर रखिए और जो काम जरूरी नहीं हैं उन्हें बाद में करने के लिए छोड़ दीजिए।

जरूरी काम में वो काम नहीं आते जिन्हें करने की आपको जरूरत है। अगर आपको कुछ ऐसा काम करना पड़ रहा है जो आपको लम्बे समय में कोई फायदा नहीं देगा तो वो काम जरूरी नहीं है। आप उस काम पर अपना समय बरबाद मत कीजिए।

अपने आप को अपने काम को समर्पित करने के लिए आपको यह सीखना होगा कि कब आपको हाँ कहना है और कब ना कहना है। ना कहना कभी कभी अच्छा होता है। अगर कोई काम आपके जरूरी काम के रास्ते में आ रहा है तो उसे ना कहने से अच्छी बात हो ही नहीं सकती।

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आप हमेशा जीतने के बारे में सोचिए।

जीतने के लिए हमेशा प्रतियोगिता करना जरूरी नहीं है। जहाँ पर प्रतियोगिता होती हैं वहाँ अच्छे रिश्ते नहीं बन पाते। लम्बे समय तक सफल रहने के लिए आपको अच्छे रिश्ते बनाने होंगे और प्रतियोगिता करने से आप अच्छे रिश्ते नहीं बना पाएंगे।

प्रतियोगिता को अपनी जिन्दगी से हटाने के लिए आप हार-जीत के बारे में सोचना छोड़ दीजिए। आप सिर्फ जीत-जीत के बारे में सोचिए। किसी के जीतने के लिए हर बार किसी को हारना हो यह जरूरी नहीं है। अगर आप यह सोचेंगे कि यहाँ हर कोई एक साथ जीत सकता है और आप भी बिना किसी को हराए जीत सकते हैं तो आप प्रतियोगिता को अपनी जिन्दगी से बाहर निकाल सकेंगे।

जब दो लोग हार जीत के बारे में सोच कर काम करते हैं तो वे प्रतियोगिता करने में यह भूल जाते हैं कि उनकी मंजिल क्या है। वे हमेशा सामने वाले को हरा कर खुद जीतने के बारे में सोचने लगते हैं जिससे रिश्ते बिगड़ जाते हैं। अगर आप तेज भागना चाहते हैं तो अकेले भागिए, लेकिन अगर आप दूर तक चलना चाहते हैं तो आप सबको साथ ले कर चलिए।

दूसरों के जीतने के बारे में सोचने से हम अच्छे फैसले ले पाते हैं। किसी से बहस होने पर हम बैठ कर यह फैसला कर सकते हैं कि हम क्या करें जिससे दोनों का फायदा हो। इसमें एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना नहीं होती और अंत में जो समाधान निकल कर आता है उससे दोनों लोगों का फायदा होता है। यानि दोनों लोगों के जीत होती है।

 

अच्छे रिश्ते बनाने के लिए आप अपने वादों को निभाइए।

अच्छे रिश्ते हमेशा ही फायदे दिया करते हैं। चाहे यह रिश्ता आपका आपके कर्मचारी के साथ हो, आपको बॉस के साथ हो या फिर आपके परिवार के साथ। सभी रिश्तों के कुछ फायदे होते हैं। तो आइए देखें कि आप इन रिश्तों को मजबूत कैसे बना सकते हैं।

इसके लिए सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि रिश्ता एक बैंक अकाउन्ट जैसे होता है जिसमें आप पैसे डालते और निकालते हैं। जब आप इस अकाउन्ट में पैसे जमा करते हैं तो आप रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। जब आप पैसे निकालते हैं तो यह कमजोर हो जाता है।

पैसे जमा करने से मतलब है वो काम करना जिससे आपका रिश्ता मजबूत बने। इसके लिए आप हमेशा अपने वादों को पूरा कीजिए और सामने वाले समझने की कोशिश कीजिए। पैसे निकलने से मतलब हैं वादे तोडने और सामने वाले की बात को ना समझना।

जब आप अपने अकाउन्ट से पैसे निकालें तो इस बात का ध्यान रखें कि उससे आपका रिश्ता कुछ ज्यादा कमजोर ना हो जाए। आप अपने पार्टनर से माफी मांग कर बात को सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे आपके रिश्ते पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अपनी गलती मान लेना रिश्ते बचाने के लिए बहुत जरूरी होता है।

जब आपके अकाउन्ट में बहुत पैसे हो जाएंगे तब आपका रिश्ता मिलकर काम करने के लिए पर्फेक्ट हो जाएगा। अब आप एक दूसरे के साथ अपने मिशन के बारे में बात कर के काम कर सकते हैं।

दूसरों को कुछ समझाने से पहले आप उन्हें समझने की कोशिश कीजिए।

अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि हम सुनने से पहले ही जवाब दे देते हैं। यह बहुत ही बुरी आदत है और अगर यह आपके अन्दर है तो इसे जल्द से जल्द छोड़ दीजिए। अगर आप दूसरों को समझने की कोशिश नहीं करेंगे तो वे भी आपकी सलाह को नहीं मानेंगे। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात मानें तो पहले आपको उनकी बातों को सुनना होगा।

सुनने से मतलब है कि आप सामने वाले के हालात और उसकी परेशानी को महसूस करने की कोशिश कीजिए। आप उनके व्यवहार की नकल करने की कोशिश कीजिए और बीच बीच में उनकी बातों को अपने शब्दों में दोहराइए। ऐसा करने से वह व्यक्ति यह समझ जाएगा कि आप उनकी बात को समझ रहे हैं और वह खुलकर आप से बात करने लगेंगे।

जब वह खुलकर अपनी बात आपसे करने लगेंगे तब वह आपकी बात को भी समझने की कोशिश करेंगे और आपका कहा मानेंगे। इस तरह से आप अच्छे रिश्तों की शुरुआत कर सकते हैं। जब आप दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगेंगे तब आपके बीच का नाता मजबूत हो जाएगा।

यह कला सीखने में आपको कुछ समय लग सकता है। अगर आप इससे बिल्कुल अनजान हैं तो यह आपके लिए मुश्किल भी हो सकता है। लेकिन अगर आप इसे कुछ समय और मेहनत दें तो आप यह कला अपने अन्दर विकसित कर के अच्छे रिश्ते बना सकते हैं। इस कला के जरिए लोग आपको पसंद करने लगेंगे और आपकी बात को सुनने की कोशिश करेंगे।

दूसरों की कमियों को समझ कर के एक साथ काम करने की कोशिश कीजिए।

अगर किसी काम को कुछ लोग मिलकर करें तो वह काम ज्यादा बेहतर होता है। अगर किसी काम को सिर्फ एक ही इंसान करे तो उससे गलतियाँ होने की संभावना बढ़ जाती है। एक साथ काम करने पर हम एक दूसरे की गलतियों को कम कर देते हैं।

लेकिन एक साथ काम करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। इसके लिए सबसे पहले आपको अपने साथियों को समझना होगा और उनकी इज्जत करनी होगी। हर किसी की अपनी कमजोरियाँ होती हैं और एक साथ काम करने पर आप इस बात का खयाल रखें कि आप उनकी कमजोरियों को अपना कर उसे दूर करने की कोशिश करें।

आपको दूसरों की आँखों से दुनिया देखना सीखना होगा। ऐसा जरूरी नहीं है कि इसका नतीजा हमेशा अच्छा ही हो। एक साथ काम करने पर भी कुछ चीज़ों को आप काबू नहीं कर सकते। लेकिन फिर भी आपको अपने टीम में एकता बनाए रखने के लिए यह काम करना होगा।

इसके लिए आपको ये भरोसा होना चाहिए कि एक साथ काम करने के नतीजे अकेले काम करने के नतीजों से बेहतर होते हैं। इसके अलावा आपको अपनी टीम के लोगों को भी इसपर भरोसा दिलाना होगा।

आपको अपने टीम का माहौल कुछ ऐसा बनाना होगा जिसमें हर कोई एक दूसरे की बात को सुने और उसके हालात को समझने की कोशिश करे। इससे आपकी टीम का हौसला बना रहेगा और वे अच्छे से काम कर सकेंगे। ऐसा हो सकता है कि कभी कभी आपकी टीम में मतभेद हो जाए और नतीजे अच्छे ना हों, लेकिन एक साथ काम करने पर नतीजे बेहतर हो सकते हैं।

खुद को बदलने के लिए आपको अपने चरित्र और उसूलों को बदलना होगा। सिर्फ आदतें बदलने से आप अपने आप को अन्दर से नहीं बदल सकते। आपको हमेशा अपनी सेहत का खयाल रखना होगा और अपने दिमाग का मालिक बनना होगा। जरूरी काम को पहले करके और अच्छे रिश्ते बना कर आप कामयाबी जल्दी हासिल कर सकते हैं। अच्छे रिश्ते बनाने के लिए दूसरों को समझना बहुत जरूरी है। इसलिए आप सामने वाले को सुनने की कोशिश कीजिए।

 

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