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क्यों कुछ लोगों के पास होता है सफलता का जादू और दूसरों के पास नहीं

ये किताब आपको कुछ ऐसी आसान और असरदार सलाह देती है जो आपको दूसरी किसी करियर गाइडेंस में नहीं मिलेगी। ऐसा भी नहीं है कि इसके तरीके आपने एक बार इस्तेमाल कर लिए और उनका असर खत्म हुआ। आप इनको बार बार इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बहुत instant हैं और तुरंत ही आपके काम आने लगते हैं।

लेखक

Jeffrey Pfeffer, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में organizational behavior के प्रोफेसर हैं। उनको आज के दौर के टॉप मैनेजमेंट थिंकर में गिना जाता है।

ज्यादातर लोगों का मानना (गलतफहमी) है कि ताकत और सफलता नियमों पर चलकर मिलती है

हममें से ज्यादातर लोग अपनी जिंदगी ये सोचते हुए बिता देते हैं कि न तो हम किसी ताकतवर पोजीशन या पावर के लायक हैं और न ही किसी तरक्की के। यानि हमें तरक्की और ऊंची पोजीशन पाने के लिए कोशिश ही नहीं करनी चाहिए। हम बस मन मारकर, सिर झुकाकर काम की शक्ल में मजदूरी करते रहते हैं और ये सोच लेते हैं कि शायद इसी तरह एक एक कदम चलते हुए हम आगे पहुंच जाएंगे। लेकिन ये किताब बताती है कि ऐसी सोच गलत है। सही तरह कोशिश की जाए तो हममें से हर कोई ऊंचाई पर पहुंच सकता है और वो भी इस तरह कि हम भीड़ से बिल्कुल अलग नजर आएं।

आप नियम से काम पर जाते हैं। समय से पहले पहुंच जाते हैं, देर रात तक लगन से काम करते हैं। आपको जो जिम्मेदारी दी जाए उसे पूरे मन से निभाते हैं। आप ये सोचते हैं कि जैसे ही आपका बॉस आपको इस तरह काम करते देखेगा आपकी तरक्की कर देगा। पर हो सकता है कि अपको सालों इंतजार करना पड़े। क्योंकि ढेरों स्टडीज ये बताती हैं कि आपकी परफार्मेंस और प्रमोशन के बीच कोई खास कनेक्शन नही है। जैसे एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी Fokker पर हुई एक स्टडी से पता चला कि जिन लोगों को परफार्मेंस के लिए very good मिला था उनके प्रमोशन की संभावना good पाने वालों से सिर्फ 12 परसेंट ज्यादा थी। अब यहां एक बड़े पैमाने पर फैली हुई गलतफहमी नजर आती है। लोग ये मान लेते हैं कि रुतबे और पावर वाली जगह उनको मिलती है जो इसके लायक हों। यानि दुनिया तो सही रास्ते पर जा रही है। ये सोच साइकोलॉजिस्ट Melvin Lerner ने just-world hypothesis के नाम से दुनिया के सामने रखी थी। हमारा ये मानना कि जो लोग नियमों पर चलते हैं वो सफल होते हैं इसी सोच के अंतर्गत आता है। लेकिन ये सोच हमें उन बुरे तरीकों का इस्तेमाल करने से रोक देती है जिनकी मदद से दूसरे लोगों ने पावर और पोजीशन हासिल की। जब कभी ऐसा सच हमारे सामने आता है तो हम भी इससे सीखने की कोशिश नहीं करते। जैसे किसी ने अपनी टीम की जीत का क्रेडिट खुद ले लिया या फिर किसी के साथ सख्त रवैया अपनाकर आगे बढ़ा तो हम बस इतना सोच लेते हैं कि उसे उसके गलत बर्ताव की सजा मिलेगी। पर हम उसकी सफलता से सीख नहीं लेते। इस तरह हम दूसरों के अनुभव से सीखने का मौका गंवा देते हैं क्योंकि हमें वो इंसान अच्छा नहीं लगता।

खुद में लीडरशिप बढ़ाने के लिए अपनी ताकत और कमजोरियों का सही तरह पता लगाइए

राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे किसी बड़े लीडर को देखकर आपके मन में तुरंत ये ख्याल आता होगा कि ये तो पैदाइशी लीडर हैं। ये इसी काम के लिए पैदा हुए हैं। पर ये हमारी गल्ती है। हमें लगता है पावर कुदरत की देन है। लेकिन हर इंसान लीडर बन सकता है क्योंकि लीडरशिप सीखी जा सकती है। आपको सबसे पहले ये सीखना होगा कि एक लीडर के अंदर क्या गुण होने चाहिए। किसी लीडर में जो चीज सबसे पहले नजर आती है वो है आत्मविश्वास। आपको सबसे पहले तो ये मानना होगा कि आप भी लीड कर सकते हैं। इसलिए आपमें भी आत्मविश्वास होना जरूरी है। आप चाहे एवरेस्ट जीतना चाह रहे हों या प्रमोशन जब तक आप खुद को इनके लायक नहीं समझेंगे तब तक आपको सफलता की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। लेकिन लीडरशिप सिर्फ आत्मविश्वास या सुबह से देर रात तक एनर्जी बनाए रखने तक ही सीमित नहीं है। लीडर को ये भी समझ आना चाहिए कि दूसरे क्या चाहते हैं। अपने पूरे करियर में आपको अलग नजर आना होगा ताकि आपसे ऊपर बैठे लोग आपको नोटिस कर सकें। इसलिए ये समझना जरूरी है कि वो क्या चाहते हैं। क्या उनको किसी भरोसेमंद इंसान की तलाश है या फिर वो किसी ऐसे इंसान को ढूंढ रहे हैं जिसकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी हो। पर ये भी बस कुछ ही गुण हैं। इस लिस्ट में resilience और self- awareness जैसे नाम भी आकर जुड़ते हैं। अब आपको ये देखना होगा कि इनमें से कौन से गुण आपमें हैं और कौन से नहीं। यहां से आपकी लीडरशिप की शुरुआत होती है। जो गुण आपमें हैं उनको और निखारिए और जो कमियां हैं उनको पूरा करिए। आगे बात करते हैं इनके तरीकों पर।

अगर आपको पावर की तलाश है तो सही जगह पर कीजिए

जब करियर का सवाल आता है तो ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि किसी बैंक या ऑफिस जैसी नौकरी एक डिपार्टमेंटल स्टोर से अच्छा भविष्य दे सकती है। लेकिन जिस तरह अलग अलग कंपनियों में फर्क होता है उसी तरह एक ही कंपनी के अलग डिपार्टमेंट में भी फर्क होता है। इसलिए अगर आप पावर की तलाश में हैं तो इसे सही जगह ढूंढना जरूरी है। चलिए आपको इसके सबूत दिए जाएं। 3500 कर्मचारियों वाली एक कंपनी में 338 मैनेजरों के करियर पर स्टडी की गई। इसमें देखा गया कि जिन मैनेजरों ने high-powered departments से अपने करियर की शुरुआत की थी वो बेहतर तनख्वाह ले रहे थे और जब कभी उन्होंने अपनी नौकरी बदली तो उनको ऐसे ही high-powered departments में जगह मिली। अब कौन सा डिपार्टमेंट कितना ताकतवर है इसका पता कैसे लगाया जाए? इसका कोई एक पक्का जवाब नहीं है। इसका अंदाजा आपको ही हालात के हिसाब से लगाना होगा। पर तीन बातें आपकी मदद कर सकती हैं। पहली तो सबसे आसान है जिसमें आपको हर डिपार्टमेंट की सैलरी देखनी है। जितना ताकतवर डिपार्टमेंट होगा उतनी ज्यादा सैलरी होगी। अब ये देखिए कि कोई डिपार्टमेंट, टॉप मैनेजमेंट से कितना नजदीक है। जैसे Pacific Gas and Electric Company के हेडक्वार्टर में पावर शिफ्ट के लिए कुछ बदलाव किए गए थे। लॉ और फाइनेंस डिवीजन को ऊपरी मंजिल पर ले जाया गया जहां सीनियर मैनेजमेंट बैठा करता था। जबकि इंजीनियरिंग यूनिट को निचले फ्लोर पर भेज दिया गया। इस दौरान लॉ और फाइनेंस की टीम से सीनियर मैनेजमेंट में जाने वालों की गिनती भी बढ़ गई। अगला तरीका है important कमेटियों या ग्रुप को देखना जैसे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स। कोई डिपार्टमेंट जितना ताकतवर होगा उसके उतने ज्यादा लोग ऐसे इन ग्रुप्स में शामिल होंगे।

सवाल पूछकर और नियम तोड़कर अपनी पहचान बनाएं

एक जापानी कहावत है “जो कील बाहर निकलती है उसे ठोक दिया जाता है” यानि दूसरों से अलग नजर आने वाली चीजों या लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। जेफरी ने इस कहावत को उल्टा साबित कर दिया है। खुद को अपने मैनेजर की जगह रखकर देखिए जिसे ये तय करना है कि अगली प्रमोशन किसे मिलेगी। अब आप किसी लकड़ी के तख्ते पर लगी दर्जनों कीलों को देख रहे हैं जिसमें सिर्फ एक ही उभरी नजर आती है तो आप किसे चुनेंगे? जब करियर की बात आती है तो भीड़ से अलग नजर आना फायदेमंद साबित होता है। पर ये visibility कैसे लाई जाए? ताकतवर लोगों की मदद लीजिए। जैसे आपने अपने बॉस को लंच पर बुलाया और साफ पूछ लिया कि प्रमोशन के लिए क्या करना होगा? जब कभी प्रमोशन की बात आएगी तो उसे याद रहेगा कि आपने कितने आत्मविश्वास और हिम्मत से अपने प्रमोशन की बात की थी। लोग अक्सर इस तरह के कदम उठाने से घबराते हैं क्योंकि उनको लगता है कि ये कहीं नुकसानदायक साबित न हो। Frank Flynn और Vanessa Lake ने इस पर एक स्टडी की है। इसमें भाग लेने वालों को दो टास्क दिए गए थे। एक था किसी से छोटा मोटा एहसान मांगना और दूसरा था इस बात का अंदाजा लगाना कि कितने लोगों से मदद मांगने पर कोई एक जाकर उनकी मदद को राजी होगा। हैरानी की बात है कि लोगों ने तीन गुना बढ़कर अंदाजा लगाया। इस स्टडी से ये साबित होता है कि हमें हाथ बढ़ाकर मदद मांगने में हिचकिचाने की इतनी भी जरूरत नहीं है जितना हमने मान लिया है। पर इतना काफी न हो तो क्या किया जाए? अपने आप को ऐसा बनाइए कि दूसरे आपको याद रखें। कुछ हटकर करिए ताकि लोगों की नजर आप पर पड़ सके। रोनाल्डो को सारी दुनिया जानती है जबकि उनकी तरह बेहतरीन फुटबॉलर और भी हैं। पर रोनाल्डो इसलिए फेमस नहीं हैं क्योंकि वो दूसरों से ज्यादा खेल के नियम तोड़ते हैं। वो overly narcissistic होकर सामाजिक नियमों को तोड़ने के लिए जाने जाते हैं।

अगर आप दूसरों से मदद चाहते हैं तो पहले उनकी मदद करने का तरीका ढूंढिए

अकेले अपने दम पर पावर हासिल करना काफी मुश्किल है। हमें दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। पर मदद कैसे मिलेगी? आपको इसके बदले कुछ ऐसा देना होगा जो सामने वाले के काम आए। जैसे इमोशनल सपोर्ट, पैसे, कोई सलाह, किसी काम में मदद वगैरह। ऐसी कोई भी चीज जिसकी लोगों को चाहत या जरूरत हो। अपने पास मौजूद रिसोर्स बांटेंगे तो दूसरे भी आपकी मदद को आगे आएंगे। आखिर समाज में एहसान चुकाने का चलन जो है। जैसे आपने अपने किसी दोस्त से बताया कि आपको मकान बदलना है। उसने आपको मदद की पेशकश कर दी। उसकी मदद लेकर आपके मन में भी ये बात घर कर जाएगी कि आप उसके एहसानमंद हैं और एक न एक दिन ये एहसान चुकाना है। आप उसकी मदद न भी लें तो भी आपको ये ख्याल तो रहेगा कि जरूरत पड़ने पर उसकी मदद की जाए। मदद करना अपने आप में एक बड़ी पावर है। ऑफिस में ऐसे इतने काम होते हैं जिनमें ज्यादा वक्त या थकान तो नहीं लगती पर वो इतने बोरिंग होते हैं कि लोग उनको टालते रहते हैं। अगर आप ऐसे काम कर दें तो आपका ज्यादा कुछ नहीं जाएगा पर सामने वाला आपका आभारी बन जाएगा। मान लीजिए आपके बॉस ने आपकी यूनिट के लिए कोई फील्ड वर्क रखा। चाहे आपका नाम इसमें शामिल न हो फिर भी आप आगे बढ़कर इसमें हाथ बंटाते हैं तो आपका बॉस बहुत खुश होगा और आपकी मदद याद भी रखेगा। लोगों के साथ प्यार और अपनेपन से पेश आकर भी आप बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। अगर आपको इस बात पर यकीन न हो तो Democrat, Willie Brown का उदाहरण आपके सामने है। वे 16 साल तक कैलीफोर्निया संसद के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने गे कम्यूनिटी को समानता दिलाने और मारिजुआना की थोड़ी मात्रा के इस्तेमाल को मंजूरी दिए जाने जैसे कानून पास करवाए। पर सच कहा जाए तो उनको विरोधी विचारधारा के Republican सांसदों का भरपूर सपोर्ट मिला। लेकिन कैसे? वे संसद में आने से पहले एक कमेटी के हेड थे जिसमें वे रिपब्लिक सांसदों से बहुत सम्मान और बिना पक्षपात के पेश आते थे। इसके बदले में लोग भी उनका सम्मान करते थे और उनकी मदद को तैयार रहते थे भले ही आपस में विचारधाराओं का फर्क रहता हो।

अपने हावभाव ऐसे रखिए जैसे आप ताकत से भरपूर हों

आपने किसी भी पॉलिटिकल शो में नेताओं को किसी मुद्दे पर लड़ते देखा होगा। अब ऐसे किसी पल के बारे में सोचकर देखिए जब दो विरोधी नेता किसी बात पर सहमत हों। कुछ याद नहीं आया? एक बात हर नेता मानता है कि उनका बोलना, चलना और बर्ताव जनता पर असर डालता है और ये भी बताता है कि वो कितने प्रभावशाली हैं। हर ताकतवर इंसान ने एक नियम अच्छी तरह याद रखा है कि आप जिस तरह दूसरों को नजर आते हैं उसके हिसाब से दूसरे आपके साथ बर्ताव करते हैं। आपके इमोशन भी दूसरों पर असर डालते हैं। जैसे आप ऑफिस से मुस्कुराते हुए गुजरें तो दूसरे भी आपको देखकर मुस्कुराते हैं। मार्केटिंग में इस पर एक रिसर्च हुई और देखा गया कि जब लोगों ने सामने वाले को मुस्कुराते हुए देखा तो वो खुश हुए। यानि जब किसी एड में कोई मुस्कुराता है तो वो प्रोडक्ट लोगों के दिल पर असर करता है और लोग उसके बारे में सोचने लगते हैं। यानि ताकतवर बनने के लिए ताकतवर होने वाला बर्ताव करना चाहिए। दूसरों के साथ बातचीत करते हुए dominant बने रहिए। जैसे किसी बात को समर्थन न देते हों तो गुस्सा दिखाइए। साइकोलॉजिस्ट Larissa Tiedens ने इसे एक बढ़िया रणनीति कहा है। जो लोग आसानी से अपना गुस्सा जाहिर कर देते हैं उनको मजबूत, काबिल और होशियार समझा जाता है। खुद को ताकतवर दिखाने का एक और तरीका है ठहराव के साथ बोलना। इस तरह आपके शब्द भी बर्बाद नहीं होते और आप कुछ गलत कहने की संभावना से बच जाते हैं। यानि फिर से आप एक काबिल इंसान नजर आते हैं। हर सफल और बड़ा नेता आराम आराम से सोच समझकर बोलता है। इस तरह लोगों को उनकी बात साफ समझ आ जाती है।

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अच्छी इमेज आपको बहुत आगे ले जा सकती है

साल 2001 में कैलीफोर्निया मेडिकल एसोसिएशन के सामने डॉक्टर Albin Avgher ने ह्यूमन कम्युनिकेशन की थ्योरी रखी। उनकी बातें उस वक्त माने जा रहे नियमों से बिल्कुल अलग थीं। फिर भी ज्यादातर लोग अपनी जगह बैठकर उनकी बातें सुनते रहे। उनको ये जानने की पूरी दिलचस्पी थी कि एक एक्सपर्ट क्या कह रहा है जब तक बोलने वाले ने ये खुलासा नहीं किया कि वो कोई डॉक्टर नहीं बल्कि Charlie Varon नाम का एक कॉमेडियन है और उसकी हर बात गप है। ये घटना इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि इमेज या reputation कितनी असरदार होती है। ये हमें आगे ले जाने में कितनी मदद कर सकती है। जब लोग आपके बारे में कोई धारणा बना लेते हैं तो हर हाल में उसे बनाए रखना चाहते हैं। वो हमेशा उन बातों पर ध्यान देंगे जो उस इमेज से मेल खाती हों और बाकी को नजरअंदाज कर देंगे। इसे cognitive discounting कहा जाता है। यानि जब एक कॉमेडियन को डॉक्टर बनाकर पेश कर दिया तो लोगों ने पहले ही ये मान लिया कि वो जो कहेगा उसमें सच्चाई होगी। इसलिए उसकी बातें भले ही सुनने वालों को अजीब लग रही थीं पर वो फिर भी सुनते रहे। लेकिन ये बात यहीं खत्म नहीं हो जाती। लोग आपसे बातचीत करते हुए भी अपनी धारणाओं के मुताबिक अपना बर्ताव बदलते हैं। यानि Varon अपनी असलियत जाहिर न भी करता तो भी सुनने वाले उससे सवाल करते। भले ही तीखी बौछार न होती पर नरम लहजे में ये जरूर पूछा जाता कि आखिर वो जो बोल रहा है उसके पीछे क्या सबूत हैं ताकि दूसरे भी कुछ नया सीख सकें। अब reputation का महत्व तो समझ आ गया। तो इसे अच्छी तरह बनाए रखने के लिए क्या करें? सबसे ऊपर है first impression. कहा भी तो जाता है first impression is last impression. अगर यहीं गड़बड़ हो जाती है तो आप ऐसी जगह रुक जाएंगे जहां लोगों ने आपके बारे में गलत सोच बना ली होगी। इसलिए लोगों की सोच बदलने से अच्छा रहेगा आप कंपनी बदल लें।

पावर का रास्ता घुमावदार मोड़ों से गुजरता है

हम सब किसी तरह के conflict से बचना पसंद करते हैं लेकिन हर अच्छा लीडर इसका उल्टा करता है। इनको पता होता है कि इनके सफर में ऐसे लोग आएंगे ही जिनकी सोच, जिनके गोल और मान्यताएं अलग होंगी। इसलिए हर अच्छा लीडर इनसे निपटने की तैयारी पहले ही करके जीत हासिल कर लेता है। पर इसका मतलब ये नहीं है कि आप हर उस इंसान से जाकर लड़ पड़ें जिसकी सोच आपसे अलग है। यहां भी कुछ नियम याद रखने होते हैं। किससे उलझना है और किससे बचना है ये आपको पता होना चाहिए। अगर कोई आपकी डेस्क से स्टेशनरी उठा ले या आपकी पार्किंग पर गाड़ी लगा दे तो आगबबूला होने की जरूरत नहीं है। लेकिन कोई आपके मेहनत से बनाए प्रोजेक्ट में बिना वजह कमियां निकालकर आपको पीछे धकेलने की कोशिश करे तो गुस्सा जायज है। जब कभी टकराव की नौबत आए तो सामने वाले को सम्मान के साथ पीछे हटने का मौका दें। आखिर आपको पक्के दुश्मन तो नहीं बनाने जो हाथ धोकर आपके पीछे पड़ जाएं। इसलिए किसी से सहमत न होते हुए भी आपा नहीं खोना चाहिए। एक बार फिर

Willie Brown का ही उदाहरण लेते हैं। चुनाव जीत जाने के बाद उन्होंने अपने खिलाफ खड़े लोगों को उनकी मनचाही पोस्ट दिलाने में मदद की। अब सोचिए जीतने के बाद कितने लोग अपने competitors को याद रखते हैं और मदद करना तो बहुत बड़ी बात है।

अगर कभी आपकी हार होती है तो भी आपको आगे बढ़ जाना चाहिए। हारने के बाद वापस लौट जाना सबसे अच्छा कदम लगता है पर इस सोच के आगे घुटने मत टेकिए। Apple ने अपने को फाउंडर स्टीव जॉब्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। वो इतना टूट चुके थे कि सिलिकॉन वैली छोड़कर जाने का सोचने लगे थे। लेकिन उन्होंने खुद को संभालकर दोबारा शुरुआत की। उन्होंने NeXT और Pixar नाम की दो कंपनियां खोलीं जो बहुत सफल हुई। उनका मानना था कि Apple से बाहर कर दिया जाना उनके जीवन की सबसे अच्छी घटना थी।

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हममें से ज्यादातर लोग ये गलतफहमी रखते हैं कि पावर या सफलता नियम पर चलने वालों का साथ देती है। लेकिन ये कोई बेहतर रास्ता नहीं है। इसकी जगह आपको खुद में लीडरशिप डेवलप करनी चाहिए। आपको दूसरों से अलग नजर आना होगा और आत्मविश्वास से भरपूर रहना होगा। क्या करें

मदद करें और मदद लें

हमारी खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश दूसरों की नजर में खुदगर्जी की तरह नजर आती है। लेकिन कोई और आपको आगे बढ़ाए तो ऐसी बातों से बचा जा सकता है। जितना हो सके दूसरों की मदद करें। इस तरह आपको जरूरत पड़ने पर वो आपकी मदद को तैयार रहेंगे। फिर वो चाहे ऑफिस का काम हो या आपकी प्रमोशन हर राह आसान बन जाएगी।

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