Thinking, Fast  And Slow

By DANIEL KAHNEMAN

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आलस किस तरह हमारे दिमाग पर असर डालता है? हम अक्सर सुनते हैं कि ये काम सोच समझकर किया गया और वो एकदम ऑटोमेटिक तरीके से। यानि हमारे बर्ताव को इन दो तरह से बांटा जा सकता है automatic और considered लेकिन दिमाग के अंदर इन दो तरीकों को लेकर जैसे कोई फिल्मी ड्रामा चल रहा होता है जहां दो हीरो एक दूसरे का आमना सामना कर रहे हैं।

हम ऑटो पायलट मोड में क्यों जाते हैं? अच्छा अगर कभी आपको ये शब्द "SO_P" दिखाया जाए तो आप खाली जगह पर क्या भरेंगे? चलो मान लिया आपके पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है। पर आपको ये कहा जाए कि ये खानपान से जुड़ी चीज है तो? अब शायद आप इसे "SOUP" लिखकर पूरा कर दें। इस प्रोसेस को priming कहते हैं।आमना सामना कर रहे हैं।

हमारा दिमाग ऐसी तस्वीरें बना देता है जो हमको और उलझा दें। किसी सिचुएशन को समझने के लिए हमारा दिमाग cognitive coherence का इस्तेमाल करता है। यानि एक तस्वीर बन जाती है। जैसे हमारे दिमाग में मौसम को लेकर तरह-तरह की तस्वीरें बनी हुई हैं। गर्मी का नाम लें तो चमकता हुआ सूरज और पसीना बहाते लोग नजर आने लगते हैं। सर्दी कहा जाए तो मोटे कपड़े पहने ठिठुरते हुए लोग। इसी तरह कोई फैसला लेते हुए भी हम इन तस्वीरों का सहारा लेते हैं। यानि इनको बुनियाद बना लिया जाता है। अगर आपको ये बताना हो कि गर्मी में कैसे कपड़े पहने जाते हैं तो आप गर्मी की इमेज को ध्यान में रखकर जवाब देंगे।

शॉर्टकट के तरीके हम अक्सर खुद को ऐसी किसी ना किसी सिचुएशन में पाते हैं जहां हमें जल्दी फैसले लेने होते हैं। इसके लिए हमारे दिमाग ने कुछ ऐसे शॉर्टकट ढूंढ लिए हैं जो हमें ऐसी सिचुएशन को तुरंत समझ पाने में मदद करें। इनको heuristics कहा जाता है। ये तरीके ज्यादातर हमारे लिए फायदेमंद ही होते हैं। लेकिन परेशानी ये है कि हमारा दिमाग इनको जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने लगता है। ऐसी सिचुएशन में भी इनका सहारा लेना जहां इनका रोल नहीं है गल्ती की वजह बन सकता है।