How to Win Friends & Influence People

किसी को भी अपना दोस्त बनाइये
हाउ टु विन फ्रेंड्स एण्ड इंफ्लुएंस पीपल (How to Win Friends & Influence People) उनके लिए एक बहुत अच्छी किताब साबित हो सकती है जो समाज में अपनी एक अच्छी पहचान बनाना चाहते हैं या फिर जिन्हें हर रोज बहुत से लोगों के साथ काम करना होता है। इस किताब की मदद से आप लोगों का दिल जीत सकते हैं और उनमें अपनी एक अच्छी इमेज बना सकते हैं।
लेखक Dale Carnegie
डेल कार्नेगी (Dale Carnegie) एक अमेरिकी लेखक और लेक्चरर थे जो अपनी सेल्समैन, कार्पोरेट ट्रेनिंग और लोगों के साथ मिलकर काम करने की कला को सिखाने के लिए जाने जाते थे। वे एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे। उनकी किताब हाउ टु विन फ्रेंड्स एण्ड इंफ्लुएंस पीपल जो कि 1936 में लिखी गई थी, आज भी बहुत फेमस है।
जो लोग अपनी अच्छी इमेज बनाना चाहते हैं।
जब आप के आस पास के लोग आपको पसंद करते हों तो जिन्दगी जीने का अपना अलग ही मजा होता है। आप जरूर यह चाहते होंगे कि आप जहां भी जाएं तो लोग आप से अच्छे से बात करें और आपकी इज्जत करें। तो आखिर आपको किस तरह का व्यवहार करना चाहिए जिससे लोग आप से खुश हो जाएं।
यह किताब आपको बताती है कि किस तरह से आप नए और अच्छे दोस्त बना सकते हैं और अपने साथियों का भरोसा जीत सकते हैं। यह किताब उनके लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है जो एक सेल्समैन हैं या फिर राजनीति में कदम रखने के बारे में सोच रहे हैं।
किसी से रिश्ते की शुरुआत करने का सबसे अच्छा तरीका है मुस्कुराना।
ऐसा कहा जाता है कि मुस्कुरा कर दी गई गाली का भी कोई बुरा नहीं मानता। यह जरूरी नहीं है कि किसी से मिलने पर आप उससे क्या बोलते हैं क्योंकि लोग आपके शब्दों को कभी याद नहीं रखते। जरूरी यह है कि आप उनसे मिलने पर कैसा व्यवहार करते हैं। तो किसी से पहली बार मिलने पर आखिर ऐसा क्या करें कि जिससे सामने वाले पर एक अच्छा इंप्रेशन बने? एक शब्द में – मुस्कुराइए।
जब हम मुस्कुराते हैं तो सामने वाले को लगता है कि उनसे मिलकर हम खुश हैं और उनका साथ हमें अच्छा लग रहा है। जब सामने वाला देखता है कि उनसे मिलने पर आप खुश हैं तो वो भी खुश हो जाता है।
मुस्कुराने के और भी बहुत से फायदे हैं। साइकोलॉजिस्ट्स ने इस बात का पता लगाया है कि मुस्कुराने से हमारे अंदर खुशी की भावना अपने आप ही पैदा होने लगती है। अगर आपका मूड अच्छा नहीं है तो आप मुस्कुराने की कोशिश कीजिए। इससे आप खुश हो जाएंगे।
मुस्कुराने से हम खुश रह सकते हैं, इससे हमें देखने वाला भी खुश हो जाता है और किसी से मिलने पर सिर्फ मुस्कुरा देने से उसके ऊपर एक अच्छा इंप्रेशन बन जाता है। इस तरह से इसके बहुत से फायदे हैं।
दूसरों की शिकायत करने वाला व्यक्ति किसी को पसंद नहीं होता।
जब हमें किसी व्यक्ति की कोई बात या उसकी कोई हरकत अच्छी नहीं लगती तो हम उसकी शिकायत करने लगते हैं। शिकायत करने के पीछे हमारा अक्सर सिर्फ एक मकसद होता है – उसे यह एहसास दिलाना की उसने गलती की है और उसे सुधरने पर मजबूर करना। लेकिन यह मकसद बहुत कम ही पूरा हो पाता है।
हम जिस व्यक्ति की शिकायत कर रहे होते हैं वो व्यक्ति इसे एक हमले की तरह देखता है जो उसे कहीं न कहीं तकलीफ पहुँचाती है। इसलिए वो इसके जवाब में अपने शब्दों के तीर छोड़ने लगता है और आपकी बात नहीं सुनता। इस तरह से दोनों लोग एक दूसरे से लड़ने लगते हैं और एक दूसरे को नापसंद करने लगते हैं।
बहुत सारी हस्तियों ने शिकायत ना करने का नियम बना लिया था। उन्होंने खुद से वादा किया था कि वे कभी किसी की शिकायत लोगों के सामने नहीं करेंगे। बेंजामिन फ्रैंक्लिन ने कहा था – किसी भी व्यक्ति की बुराई मत करो। अब्राहम लिंकन ने भी शिकायत ना करने का नियम बनाया था। पहले वे खुलकर सबकी बुराई करते थे लेकिन बाद में उन्हें यह एहसास हुआ कि इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा होता है। हम सभी किसी न किसी काम में गलतियाँ कर बैठते हैं। इसलिए बेहतर यही है कि आप सामने वाले की गलतियों को माफ कर के उसकी कमियों को अपना लीजिए।
दूसरों की तारीफ कर के आप उनके साथ अपने रिश्ते को बरकरार रख सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति हमें पसंद करता है तो वह हमारी बात जल्दी मान लेता है और हमारा कहा हुआ काम तुरंत कर देता है। लेकिन ऐसा क्या किया जाए जिससे सामने वाला व्यक्ति हमें पसंद करने लगे? आसान है उनकी तारीफ करते रहिए। खुद की तारीफ सुनना किसे नहीं पसंद। जब आप किसी की तारीफ करते हैं तो उसे अच्छा लगता है और इस वजह से वो आपको पसंद करने लगता है। पुराने वक्त से बहुत से लोगों ने दूसरों का प्यार और तारीफ पाने के लिए है बहुत से काम किए हैं। हम कभी कभी अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं सिर्फ इसलिए ताकी हम फेमस हो सकें और लोगों की तारीफ पा सकें।
इसलिए अगर आप किसी के काम की तारीफ करेंगे तो वह अगली बार और अच्छे से काम करेगा। लेकिन अगर आप किसी के खराब काम करने पर उसे नौकरी से निकाल देने की धमकी या उसे सजा देंगे तो शायद वो अगली बार अच्छे से काम करे, लेकिन वो काम बिना मन के करेगा और साथ ही साथ आपको नापसंद भी करेगा। किसी को उसके किए गए काम के लिए धन्यवाद कहना ही काफ़ी होता है। इसके अलावा आप दूसरे शब्द जैसे सॉरी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। तारीफ करते वक्त एक बात का ध्यान रखिए कि कहीं आपकी तारीफ चापलूसी तो नहीं लग रही है। क्योंकि अगर ऐसा है तो सामने वाले पर इसका कुछ खास असर नहीं होगा।
आप यह सोचिए कि यहाँ पर हर किसी के पास आपको सिखाने के लिए कुछ है और उनके साथ रहकर आप कुछ अच्छी बातें जान सकते हैं। इस तरह से आपके अंदर उनके लिए इज्जत अपने आप ही पैदा हो जाएगी। आप दूसरों को सीरियसली लीजिए और ईमानदारी से उनके काम की तारीफ करना सीखिए।
अगर आप चाहते हैं कि दूसरे आप में इंट्रेस्ट लें तो पहले आप उनमें इंट्रेस्ट लीजिए।
अगर आप चाहते हैं कि आपको इज्जत मिले तो पहले इज्जत देना सीखिए। बिना कुछ दिए आप किसी से कुछ हासिल करने की उम्मीद नहीं रख सकते। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि दूसरे आप में इंट्रेस्ट लें तो पहले ख़ुद आपको उनमें इंट्रेस्ट लेना होगा। दूसरों में इंट्रेस्ट लेने से हमारा मतलब उनकी बातों को ध्यान से सुनने से है। अगर आप सामने वाले की बात को बार बार काट कर अपनी बात कहने लगते हैं तो सामने वाले को यह लगेगा कि आप उसकी बातों में इंट्रेस्ट नहीं ले रहे हैं और फिर वो भी आप में इंट्रेस्ट नहीं लेगा।
सुनने के और भी बहुत से फायदे हैं। अगर आप ध्यान से सामने वाले की बात सुनेंगे तो इससे आप उसके बारे में बहुत सी बातें जान सकते हैं। आप उनकी प्राइवेट बातें, उनकी पसंद नापसंद और दूसरी चीजों के बारे में जानकर उन्हें अच्छे से समझ सकते हैं। एक बार आप ने सामने वाले को समझ लिया तो आप वो बात कीजिए जिसके बारे में बात करना उसे पसंद हो। इस तरह से आप उसके साथ घुलमिलकर अच्छे संबंध बना सकते हैं।
तो अब जब आप किसी से मिलें तो पहले अपनी बात मत कहिए। आप सामने वाले को ज्यादा से ज्यादा बोलने के लिए मजबूर कीजिए जिससे आप उसे अच्छे से समझ सकें। उसे अपना पूरा ध्यान दीजिए और साथ ही उसे यह एहसास दिलाइए कि वो जो बोल रहा है उसमें आप वाकई इंट्रेस्ट रखते हैं।
लोगों की पसंद को पहचान कर उसके बारे में बात कीजिए।
जब बात हमारे मन की हो रही होती है तो हमें बहुत अच्छा लगता है। अगर आपको क्रिकेट में दिलचस्पी हो और आप किसी ऐसे के साथ बैठें हों जो कि क्रिकेट की बात कर रहा हो तो जाहिर सी बात है कि आप उसकी बातों को अच्छे से सुनेंगे और उससे घुल मिलकर बातें भी करेंगे। इस तरह से आप दोनों के बीच अच्छी बातचीत और अच्छे रिश्तों की शुरुआत हो सकती है। तो अगली बार जब आप किसी से मिलने जाएं तो यह पता करने की कोशिश करें कि उसे किस चीज में दिलचस्पी है और इस बारे में कुछ जानकारी इकट्ठा कर लीजिए। इस तरह से आप उस व्यक्ति से अच्छे से और लम्बे समय तक के लिए बात कर पाएंगे।
लेकिन हर बार किसी से मिलने से पहले जानकारी इकट्ठा करना थोड़ा मुश्किल काम हो सकता है। हो सकता है कि आपको एक ही दिन में कई लोगों से मिलना पड़े या शायद किसी ऐसे से मिलना पड़े जिसके बारे में आप कुछ भी ना जानते हों। ऐसे हालात में आप उस व्यक्ति से उसके बारे में ही बात कीजिए। अपने बारे में बात करना हर किसी को पसंद है। तो जब भी आप किसी से मिलें आप उनकी थोडी सी तारीफ कर दीजिए। उनके आखों या बालों के बारे में जो बात आपको अच्छी लगे वो उन्हें बता दीजिए। जब भी कोई अपने बारे में अच्छी बात सुनता है तो वह खुश हो जाता है। यह एक ऐसा टापिक है जिसमें हर किसी को दिलचस्पी है और एक ऐसा तरीका है जिससे आप किसी के दिल में बहुत जल्दी जगह बना सकते हैं।
लोग उन्हें पसंद करते हैं जिन्हें उनकी हर एक चीज याद हो।
जब आप किसी को यह दिखाते हैं कि आप उसकी बहुत परवाह करते हैं तो लोग आपको पसंद करने लगते हैं। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको पसंद करें तो सबसे पहले आप उन्हें यह दिखाइए कि आप उनकी परवाह करते हैं। लेकिन कैसे?
दूसरों से पूरे उत्साह के साथ बात कीजिए। आपके उत्साह से यह लगना चाहिए कि वो जो बोल रहा है आप उसे वाकई सुनना चाहते हैं। इसके अलावा वे जो कुछ भी कहें आप उसे याद रखने की कोशिश कीजिए। आप उनका नाम, पता या जन्मदिन याद रखने की कोशिश कीजिए। सुनने में यह थोड़ा मुश्किल काम लग रहा है लेकिन इस मुश्किल काम के बहुत सारे फायदे हैं। जब आप किसी का नाम याद रखते हैं और बात करते वक्त बार बार उसके नाम का इस्तेमाल करते हैं तो उसे अच्छा लगता है और वह तुरंत ही आपको पसंद करने लगता है। बात करते वक्त आप समय समय पर उनका नाम लेते रहिए।
थियोडोर रूज़वेल्ट (Theodore Roosevelt) की यह आदत थी कि वे जब भी अपने साथियों से मिलते थे तो उनका नाम लेकर उनका स्वागत करते थे। इस तरह से वे अपने साथियों में बहुत फेमस हुए जिसका समय के साथ उन्हें फायदा भी मिला।
किसी से बहस करने का कोई फायदा नहीं है।
अगर आप किसी से बहस कर के उसे गलत साबित कर देते हैं तो आप चालाक हो सकते हैं लेकिन अगर आप बहस करते ही नहीं तो आप समझदार हैं। एक समझदार व्यक्ति वो काम नहीं करता जिससे फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो। अगर हम बहस की बात करें तो इससे सिर्फ नुकसान ही होता है। बहस करते वक्त कोई किसी से अपनी बात मनवा नहीं पाता।
बहस से बचने का एक ही तरीका है कि उसे शुरु होने से पहले ही खत्म कर दीजिए। अगर आपके सामने कोई कुछ ऐसा कहे जिससे आप सहमत नहीं हैं तो आप उससे बहस मत कीजिए। या तो उसकी बात को अनदेखा कर दीजिए या फिर खुद से सवाल कीजिए कि कहीं वो सही तो नहीं कह रहा। खुद से इस तरह का सवाल कर के आप अपने अंदर नए विचार पैदा कर सकते हैं।
ऐसा कभी नहीं हो सकता कि दो लोग हमेशा एक दूसरे से सहमत ही हों। कभी कभी दो अलग विचार आपस में टकरा जाते हैं। कभी कभी लोग बहस करते वक्त अपनी भावनाओं को उसमें शामिल कर लेते हैं और जब उन्हें कुछ ज्यादा गलत बात सुनने को मिलती है तो वे गुस्सा हो जाते हैं क्योंकि इससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
इसलिए अगर आप वाकई सामने वाले की बात से सहमत नहीं हैं और जवाब में कुछ बोलना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी भावनाओं को उस बहस से बाहर निकाल लीजिए और सामने वाले व्यक्ति से भी कह दीजिए कि वो आपकी बात का बुरा ना माने। इस तरह से बहस होने पर भी आप अपने रिश्तों को बचा लेंगे
दूसरों से यह मत कहिए कि वे गलत हैं।
जब आप किसी को यह एहसास दिलाते हैं कि वो गलत है तो असल में आप उसके आत्म सम्मान को ठेस पहुंचा रहे होते हैं। अगर आप सामने वाले से कहेंगे कि वो गलत है तो उसे यह लगेगा कि आप उससे कह रहे हैं कि वो बेवकूफ है या आप उनसे ज्यादा समझदार हैं। इस तरह से उनके अंदर एक घाव हो जाएगा और फिर वे उसका बदला लेने के बारे में सोचने लगेंगे।
इसलिए जब भी आपको लगे कि समाने वाला कुछ गलत बोल रहा है तो आप उससे कुछ इस तरह से बात कीजिए। आप उनसे कहिए कि – “मेरी समझ में तो.. ” या फिर “जहाँ तक मुझे पता है ..”। इसके बाद आप अपनी बात को रखिए। इस तरह से बात करने का फायदा यह है कि सामने वाला अगर जान भी जाए कि वो गलत बोल रहा है तो भी उसे इस बात का बुरा नहीं लगेगा। लेकिन जब आप कहते हैं – “यह बात बिल्कुल साफ है कि .. ” या फिर “इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि .. ” तो सामने वाले को अंदर से यह लगने लगता है कि आप उसे गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
किसी की बात का विरोध कुछ इस तरह से करना सीखिए कि उसे यह ना लगे कि आप उसे गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। आप अपनी बात के अंत में कुछ इस तरह के सेंटेंस का इस्तेमाल कीजिए- “मुझे ऐसा लगता है लेकिन मेरा लगना गलत भी हो सकता है।”
अपनी गलतियों को बिना देर किए कुबूल कर लीजिए।
अक्सर यह होता है कि जब हम से कोई गलती हो जाती है तो हम उसे छिपाने लगते हैं या फिर इल्जाम किसी और पर लगाने लगते हैं। हम यह मानने के लिए तैयार नहीं होते कि गलती हमारी है। अपनी कोशिश में हम खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश करते हैं लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं होता।
इसलिए अगर कहीं पर भी आप से गलती हो जाए तो आप उसे बिना देर किए मान लीजिए। जब सामने वाला आपको आपकी गलती के लिए डाँटने वाला होगा और आप उससे उसी वक्त माफी माँग लेंगे तो आप उसके गुस्से को कुछ हद तक शाँत कर देंगे।
एक्साम्पल के लिए आप लेखक को ले लीजिए जो एक बार अपने कुत्ते को बिना पट्टे के घुमा रहे थे। एक आफिसर ने उन्हें देख लिया और लेखक समझ गए कि अब उनके ऊपर मुसीबत आने वाली है। उन्होंने तुरंत मान लिया कि उन्होंने गलती की है और आफिसर ने उन्हें बिना फाइन के ही जाने दिया।
अगर आप लोगों के सामने खुद की बुराई करेंगे तो इससे आपकी बेइज्जती नहीं होगी। लेकिन अगर कोई दूसरा व्यक्ति लोगों के सामने आपकी बुराई करेगा तो आपकी बेइज्जती हो जाएगी। इसलिए बेहतर है कि आप अपनी गलती मान लें। इससे यह जाहिर होता है कि आप अपनी कमियों को पहचानते हैं और उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं।
दूसरों को मनाने के लिए उनसे जल्दी से जल्दी हाँ बुलवा लीजिए।
लोगों को यह बिल्कुल नहीं पसंद की कोई उनकी सोच के साथ खिलवाड़ करे। इसलिए अगर आपको किसी से बात मनवानी है तो अपने विचारों को उनके सामने तुरंत मत रखिए। इसे एक तरीके से करिए ताकि जवाब में हाँ मिलने के चांसेस बढ़ जाए।
सबसे पहले आप सामने वाले से अच्छे से बात कीजिए ताकि उसे आप अच्छे लगने लगें और वो आपकी बात अच्छे से सुने। अगर सामने वाला आपको पसंद नहीं करेगा तो वो आपकी बात नहीं सुनेगा।
इसके बाद आप कुछ सवाल पूछ कर इस बात को पक्का कर लीजिए कि आप जिस बात के लिए उससे हाँ करवाना चाहते हैं उसे उस काम में इंट्रेस्ट है और वो भी आपकी तरह ही सोचता है। अगर ऐसा नहीं है तो आपकी कही गई बात में उसे दिलचस्पी नहीं होगी और वो ना कह देगा।
इसके बाद आप सामने वाले से जल्दी से जल्दी हाँ बुलवा लीजिए। सुकरात ने इसके लिए सबसे अच्छा तरीका बताया था- जब सामने वाला आपके ज्यादातर सवालों का जवाब हाँ में दे रहा हो तब समझ जाइए कि जब आप उससे काम की बात करेंगे तो भी वो हाँ बोलेगा। इसलिए आप उससे कुछ छोटे छोटे सवाल पूछिए जिसका जवाब उसे हाँ में देना हो। इस तरह से वो आपकी बात के लिए राजी हो जाएगा।

जिन्हें हर रोज बहुत से लोगों के साथ काम करना होता है।
अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको पसंद करें तो सबसे पहले आपको उन्हें पसंद करना होगा और उनकी बातों में दिलचस्पी दिखानी होगी। आप उन्हें कभी गलत साबित करने की कोशिश मत कीजिए और अपनी गलतियों को तुरंत मान लीजिए। किसी से बात करते वक्त मुस्कुराते रहिए क्योंकि इससे यह लगता है कि आप उसे पसंद करते हैं और बदले में वो भी आपको पसंद करने लगता है।
मुस्कुराइए।
अगली बार आप अगर किसी नए व्यक्ति से मिलें या अपने किसी पुराने दोस्त से मिलें तो उनका स्वागत मुस्कुरा कर कीजिए। इस तरह से आप सामने वाले के ऊपर एक अच्छा इंप्रेशन बना सकते हैं जिससे आप एक नए और बेहतर रिश्ते की शुरुआत कर सकते हैं।